बघेल ने नहीं मानी चन्नी गुट की बात... पंजाब कांग्रेस में तल्ख हुई रार, अब आगे क्या?

भूपेश बघेल पांच दिन के दौरे पर पहुंचे थे, लेकिन छठवें दिन छत्तीसगढ़ लौटे. करीब 92 नेताओं के साथ मैराथन बैठकें कीं, लेकिन नतीजा यह कि उनके वापस लौटते ही चन्नी और वडिंग गुट के नेता फिर से बयानी जंग के अखाड़े में आ डटे.

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बघेल के दौरे से दूर नहीं हुआ गतिरोध (Photo: ITG) बघेल के दौरे से दूर नहीं हुआ गतिरोध (Photo: ITG)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 12 जुलाई 2026,
  • अपडेटेड 1:24 PM IST

पंजाब कांग्रेस में मची रार खत्म कराने के लिए कांग्रेस नेतृत्व ने छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को चंडीगढ़ भेजा था. बघेल के इस दौरे के पीछे मुख्य मकसद विधानसभा चुनाव से पहले पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वडिंग और पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी के धड़े में सीजफायर कराना, दोनों नेताओं को एक मंच पर लाना था.

भूपेश बघेल के चंडीगढ़ पहुंचते ही बैठक पर बैठक शुरू हुई. करीब 92 नेताओं के साथ भूपेश बघेल की बैठकें भी पंजाब कांग्रेस का घमासान थामने में सफल नहीं हो सकीं. चन्नी की अगुवाई वाला गुट अमरिंदर सिंह राजा वडिंग को प्रदेश अध्यक्ष पद से हटाने की मांग पर अड़ा हुआ है. थक-हारकर भूपेश बघेल ने भी साफ कह दिया कि राजा वडिंग ही पंजाब कांग्रेस के प्रधान बने रहेंगे.

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चरणजीत सिंह चन्नी, सुखजिंदर सिंह रंधावा जैसे वरिष्ठ नेताओं ने बघेल के साथ बैठक में राजा वडिंग को प्रदेश अध्यक्ष से हटाने की मांग की. बैठक के बाद बघेल ने कहा कि कुछ नेताओं को शंका है, सुझाव हैं जिन्हें हम हाईकमान के सामने रखेंगे. उन्होंने साथ ही यह भी जोड़ा कि कोई भी नेता हाईकमान के फैसले के खिलाफ नहीं है. सभी के हितों का ध्यान रखा जाएगा और उचित प्रतिनिधित्व सुनिश्चित किया जाएगा.

पांच दिन के दौरे पर चंडीगढ़ पहुंचे भूपेश बघेल छठे दिन छत्तीसगढ़ के लिए रवाना हुए. बघेल के लौट जाने के साथ ही एक सवाल अनसुलझा रह गया. वह सवाल ये कि पंजाब की राजनीति में अब आगे क्या होगा? यह सवाल इसलिए भी, क्योंकि बघेल के साथ मैराथन बैठक के बाद भी चन्नी गुट अपनी मांग पर अड़ा हुआ है. पंजाब के पूर्व डिप्टी सीएम सुखजिंदर सिंह रंधावा ने दो टूक कहा है कि परिस्थितियों को देखते हुए पार्टियों को अपने फैसले बदलने पड़ते हैं.

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उन्होंने प्रदेश अध्यक्ष पर तीखा तंज करते हुए कहा कि हमारा लक्ष्य 2027 में चुनाव जीतकर सत्ता में लौटना है. इसके लिए हमें मजबूत नेतृत्व चाहिए, समझौतावादी नेता नहीं जो भगवंत मान की चुनौतियों का जवाब न दे सके. बघेल के दौरे के तुरंत बाद राजा वडिंग ने भी रंधावा के वार पर पलटवार किया. अब तक टकराव का संदेश देने वाले बयान देने या सोशल मीडिया पोस्ट करने से बचते नजर आए अमरिंदर सिंह राजा वडिंग ने अब गियर बदल लिया है.

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पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि रंधावा और हम साढ़े चार साल साथ रहे हैं. समझौतावादी होता तो रंधावा मेरे साथ नहीं रहते. उन्होंने रंधावा की बात से सहमति भी जताई और कहा कि पार्टी में समझौतावादी नेताओं और स्लीपर सेल के लिए कोई जगह नहीं होनी चाहिए. बीजेपी नेताओं से जो लोग मिलते हैं, उनके लिए कांग्रेस में कोई जगह नहीं है. राजा वडिंग का यह बयान नाम लिए बिना रंधावा पर निशाना है.

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बता दें कि सुखजिंदर सिंह रंधावा ने हाल ही में दिल्ली में गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात की थी. कांग्रेस सांसद सुखजिंदर सिंह रंधावा ने इस मुलाकात को लेकर यह भी स्पष्ट किया था कि ये मुलाकात पंजाब की बिगड़ती कानून-व्यवस्था, सीमावर्ती क्षेत्रों में नार्को-टेरर और गैंगस्टर्स के बढ़ते प्रभाव को लेकर थी. 

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