पाकिस्तान बनाने के विरोध में थे मौलाना, नहीं लिया था भारत रत्न

11 नवंबर को भारत में राष्ट्रीय शिक्षा दिवस के रूप में मनाया जाता है. यह दिवस भारत के पहले शिक्षा मंत्री, स्वतंत्रता सेनानी, शिक्षाविद्, लेखक, पत्रकार मौलाना अब्दुल कलाम आजाद साहब के जन्मदिवस पर मनाया जाता है.

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प्रतीकात्मक फोटो प्रतीकात्मक फोटो

मोहित पारीक

  • नई दिल्ली,
  • 11 नवंबर 2017,
  • अपडेटेड 10:59 AM IST

11 नवंबर को भारत में राष्ट्रीय शिक्षा दिवस के रूप में मनाया जाता है. यह दिवस भारत के पहले शिक्षा मंत्री, स्वतंत्रता सेनानी, शिक्षाविद्, लेखक, पत्रकार मौलाना अब्दुल कलाम आजाद साहब के जन्मदिवस पर मनाया जाता है. मौलाना अबुल कलाम आजाद का जन्म 11 नवंबर 1888 को हुआ था. आजाद उर्दू में कविताएं भी लिखते थे. इन्हें लोग कलम के सिपाही के नाम से भी जानते हैं.

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मौलाना अबुल कलाम आजाद का असली नाम अबुल कलाम गुलाम मुहियुद्दीन है. लेकिन इन्हें मौलाना आजाद नाम से ही जाना जाता है. मौलाना आजाद महात्मा गांधी के सिद्धांतों का समर्थन करते थे. उन्होंने हिंदू-मुस्लिम एकता के लिए कार्य किया और वो अलग मुस्लिम राष्ट्र (पाकिस्तान) के सिद्धांत का विरोध करने वाले मुस्लिम नेताओ में से थे.

आजाद भारत के पहले शिक्षा मंत्री

स्वतंत्रता के बाद वे भारत के पहले शिक्षा मंत्री बने और विश्वविद्यालय अनुदान आयोग की स्थापना में उनके सबसे अविस्मरणीय कार्यों मे से एक था. मौलाना आजाद 35 साल की उम्र में इंडियन नेशनल कांग्रेस के सबसे नौजवान अध्यक्ष बने.

भारत रत्न लेने से किया था मना

आजाद साहब ने भारत रत्न लेने से मना कर दिया था. बाद में 1992 में उन्हें मरणोपरांत भारत रत्न दिया गया. उनकी जयंती राष्ट्रीय शिक्षा दिवस के रुप में मनाई जाती है. आजाद साहब ने कहा था, मैं उस अखंडता का हिस्सा हूं, जिसे भारतीय राष्ट्रवाद कहा जाता है.

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