ये है ब्रिक्स का दम, इकोनॉमी से लेकर सैन्य ताकत तक नहीं है कोई मुकाबला

दुनिया की पांच उभरती हुई अर्थव्यवस्थाओं का समूह है ब्रिक्स. साल 2016 का ब्रिक्स शिखर सम्मेलन इस बार भारत के गोवा प्रांत में हो रहा है. जानें क्य है ब्रिक्स...

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BRICS BRICS

विष्णु नारायण

  • नई दिल्ली,
  • 15 अक्टूबर 2016,
  • अपडेटेड 2:31 PM IST

इस वक्त पूरी दुनिया की निगाह गोवा में हो रही ब्रिक्स समिट पर टिकी हुई है. अंग्रेजी अक्षरों BRICS से बना शब्द 'ब्रिक्स' दुनिया की पांच उभरती हुई अर्थव्यवस्थाओं का एक समूह है. ये देश हैं - ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका. ब्रिक्स में शामिल पांचों देश G 20 का भी हिस्सा हैं. साल 2010 में साउथ अफ्रीका इसका हिस्सा बना. उससे पहले इसे 'ब्रिक' नाम से ही जाना जाता था. साल 2016 का ब्रिक्स सम्मेलन गोवा में हो रहा है. इस वजह से भी पूरी दुनिया की नजरें इस बार भारत पर टिकी हुई हैं.

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दुनिया के 43 फीसदी आबादी का प्रतिनिधित्व
ब्रिक्स समूह 5 देशों से मिलकर बना है लेकिन ये देश काफी संभावनाओं वाले हैं. भारत, चीन, दक्षिण अफ्रीका जैसे देश इसका हिस्सा हैं जो कि न केवल आबादी में बड़े देश हैं बल्कि रूस जैसी महाशक्ति भी इसमें शामिल हैं. ये देश आर्थिक रूप से उभरते हुए हैं और बड़े बाजार के मालिक भी. दुनिया की 43 फीसदी जनता इन देशों में रहती है.

दुनिया की 30 फीसदी जीडीपी...
ये सारे देश दुनिया के 30 फीसदी जीडीपी (सकल घरेलू उत्पाद) में भी अहम भूमिका अदा करते हैं. इसके अलावा विश्व व्यापार में उनकी 17 फीसद हिस्सेदारी है. भारत और चीन जैसे बड़ी सैन्य ताकतें इसका हिस्सा हैं तो एक समय दुनिया के दो सुपरपावरों में शामिल रूस के इसमें होने से इस समूह की ताकत का एहसास होता है. इन सब खूबियों के कारण ब्रिक्स समिट पर सबकी निगाहें टिकी हुई हैं कि बड़े वैश्विक मुद्दों पर यह समूह क्या रुख अपनाता है.

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भारत कर रहा 8वें ब्रिक्स सम्मेलन की मेजबानी...
साल 2009 में ब्रिक्स सम्मेलन का शुरुआत हुआ था. तब से अब तक 7 हो चुके हैं. पिछला ब्रिक्स शिखर सम्मेलन रूस (ऊफा) में हुआ था. इस बार इसकी मेजबानी भारत कर रहा है. यह गोवा प्रांत में हो रहा है.

परस्पर हित और आर्थिक मुद्दों पर होती है बात...
वैसे तो ब्रिक्स सम्मेलन के शुरुआती मुद्दों में परस्पर हित और हावी थे, लेकिन समय बीतने के साथ-साथ वे वैश्विक मुद्दों को भी तरजीह दे रहे हैं. इसके अलावा ब्रिक्स में शामिल होने वाले नेता और प्रतिनिधि वित्त, व्यापार, स्वास्थ्य, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, शिक्षा, कृषि, संचार, श्रम आदि मुद्दों को उठा कर उन्हें सार्थक रूप देने के लिए प्रयासरत हैं.

 

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