House Help monthly income: घर-घर झाड़ू-पोछा, महीने की कमाई ₹50 हजार! कैसे मिल रहा काम?

हाउसहेल्प का काम अब पूरी तरह से प्रोफेशनल और एप बेस्ड हो गया है. मेट्रो सिटीज़ में ऐसी एप जो दस मिनट के भीतर आपके घर पर हाउसहेल्प को भेजती हैं, वो ट्रेंड में हैं. कई महिलाएं, लड़कियां और पुरुष भी इनके ज़रिए अच्छी खासी कमाई कर रहे हैं और ये कमाई का बेहतर ज़रिया बना है.

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हाउसहेल्प का काम अब प्रोफेशनल हो गया है. (फोटो: AI Generated) हाउसहेल्प का काम अब प्रोफेशनल हो गया है. (फोटो: AI Generated)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 09 अक्टूबर 2026,
  • अपडेटेड 11:48 AM IST

पुरुषों के लिए बाइक राइडर से लेकर डिलीवरी पार्टनर जैसा काम उन्हें गिग वर्कर बना रहा है, साथ ही अच्छी कमाई का मौका भी दे रहा है. लेकिन इस मामले में महिलाएं भी पीछे नहीं हैं, कई लड़कियां भी डिलीवरी पार्टनर या बाइक राइडर का काम करती हैं. इसके अलावा महिलाओं को घरेलू कामकाज से कमाई करने का भी मौका मिल रहा है. 

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भारत में बर्तन धोने और घरेलू कामकाज जैसे झाड़ू-पोछा, कपड़े धोना और रसोई में मदद के जरिए महिलाएं और दूसरे वर्कर हर महीने ₹45,000 से ₹55,000 तक कमा रहे हैं. ये कमाई ऑन-डिमांड क्विक सर्विस और हाउसकीपिंग प्लेटफॉर्म्स जैसे स्नैबिट और प्रोंटो के जरिए हो रही है.

इन प्लेटफॉर्म्स पर कमाई का मॉडल अलग-अलग है. स्नैबिट पर बर्तन धोने, झाड़ू-पोछा और किचन हेल्प जैसे कामों से हर महीने ₹45,000 तक कमाए जा सकते हैं. प्रोंटो पर बर्तन धोना, सफाई और बाथरूम क्लीनिंग जैसे दैनिक घरेलू कामों से प्रति माह ₹55,000 तक कमाई का अवसर मिलता है.

यहां भी पूरा प्रोसेस किसी भी अन्य ऐप जैसा ही है, जहां पार्टनर ऐप या वेबसाइट पर नाम, मोबाइल नंबर और शहर जैसी डिटेल्स भरकर रजिस्टर करना होता है. चयन होने के बाद सेंटर या ऐप के जरिए छोटी और व्यावहारिक फ्री ट्रेनिंग दी जाती है, ताकि काम के सही तरीके सीखे जा सकें.

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ट्रेनिंग के बाद पार्टनर ऐप पर नजदीकी इलाकों से बर्तन धोने या सफाई की बुकिंग्स, यानी ऑर्डर, मिलने लगते हैं. वर्कर अपनी सुविधा के हिसाब से पार्ट-टाइम या 6, 8, या 12 घंटे की शिफ्ट चुनकर काम कर सकते हैं.

पैसों के अलावा इन प्लेटफॉर्म्स पर दूसरी सुविधाएं भी दी जाती हैं. इनमें बैंक अकाउंट में समय पर सीधी सैलरी या पेआउट, ₹2 लाख से ₹6 लाख तक का स्वास्थ्य और दुर्घटना बीमा, नए जुड़ने पर जॉइनिंग बोनस और दूसरों को जोड़ने पर रेफरल बोनस शामिल हैं.

इसके साथ इमरजेंसी के लिए एसओएस बटन, हब मैनेजर सपोर्ट और महिला सुरक्षा के कड़े इंतजाम भी दिए जाते हैं. बच्चों की पढ़ाई के लिए सपोर्ट के साथ फाइनेंशियल अवेयरनेस और हेल्थ वर्कशॉप्स भी इस मॉडल का हिस्सा हैं. जुड़ने के लिए आधार कार्ड या वोटर आईडी, पैन कार्ड और कमाई ट्रांसफर के लिए बैंक अकाउंट डिटेल्स चाहिए होती हैं.

अक्सर हम सुनते हैं कि कोई भी काम छोटा या बड़ा नहीं होता है. मेट्रो सिटीज़ में जहां हसबैंड और वाइफ दोनों ही ऑफिस टाइमिंग्स की वजह से व्यस्त और थके हुए रहते हैं, वहां ऐसी ऐप के ज़रिए आपको अपने घर के काम में मदद करने का मौका मिलता है. साथ ही कुछ ऐसी महिलाओं के लिए एक रोजगार का अवसर भी मिलता है, जो अपने घर की आर्थिक मदद करना चाहती हैं. 
 

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