जंतर-मंतर से 8 राज्यों तक, क्यों सुलग रहा युवाओं का गुस्सा? पेपर लीक से भर्ती में देरी तक उठे सवाल

द‍िल्ली की सड़कों से उठी बगावत की गूंज नई नहीं है. इस साल उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, बिहार, झारखंड समेत देश के आठ राज्यों में छात्रों की नाराजगी साफ द‍िखी है. पुलिस और शिक्षक भर्ती से लेकर पेपर लीक, हाईटेक नकल और भर्ती परीक्षाओं में अंतहीन देरी से त्रस्त युवाओं का सब्र अब जवाब दे चुका है. पढ़ें विशेष रिपोर्ट.

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आखिर क्यों उबल रहा है देश का युवा? (File Photo- PTI) आखिर क्यों उबल रहा है देश का युवा? (File Photo- PTI)

आजतक एजुकेशन डेस्क

  • नई दिल्ली ,
  • 12 अक्टूबर 2026,
  • अपडेटेड 6:51 PM IST

राजधानी दिल्ली के ऐतिहासिक जंतर-मंतर की जमीन पर भले ही छात्रों का वह तात्कालिक प्रदर्शन थम गया हो, लेकिन क्या सच में युवाओं का गुस्सा शांत हो गया है? हकीकत यह है कि आज देश के कोने-कोने में जंतर-मंतर जैसी ही सुलगती नाराजगी हर तरफ दिखाई दे रही है. भले ही हालिया सड़कों पर उतरे युवाओं के मुद्दे अलग रहे हों, लेकिन इस साल राज्य सरकारों की भर्ती प्रक्रियाओं और परीक्षाओं को लेकर छात्रों का जो उबाल देखा गया है, उसने सिस्टम की नींव हिलाकर रख दी है.

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कहीं पेपर लीक के काले कारनामों ने युवाओं को सड़क पर उतरने के लिए मजबूर किया, तो कहीं भर्ती में कथित गड़बड़ियों और नियुक्तियों में अंतहीन देरी ने उनके सब्र का बांध तोड़ दिया. उत्तर प्रदेश से लेकर महाराष्ट्र, बिहार और झारखंड तक आखिर क्यों उबल रहा है देश का युवा? आइए, इस विशेष पड़ताल में जानते हैं पूरी सच्चाई...

उत्तर प्रदेश: सिपाही और शिक्षक भर्ती से लेकर टीईटी तक...

उत्तर प्रदेश में प्रतियोगी परीक्षाओं का इतिहास इस साल भी विवादों के साए में रहा है. राज्य में चाहे पुलिस भर्ती परीक्षा हो, उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (UPTET) हो या फिर अन्य राज्य स्तरीय आयोग की परीक्षाएं—पर्चे लीक होने और परीक्षा रद्द होने के चक्रव्यूह ने यूपी के युवाओं को बुरी तरह तोड़ दिया है.

प्रयागराज का जनसैलाब: इस साल 29 मई को प्रयागराज में प्रतियोगी छात्रों ने भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं और बेरोजगारी के खिलाफ ऐतिहासिक कैंडल मार्च निकाला.

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असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती और अन्य विवाद: जनवरी 2026 में यूपी सरकार को असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती परीक्षा रद्द करनी पड़ी, क्योंकि एसटीएफ (STF) की जांच में पेपर लीक और अवैध वसूली का बड़ा खेल सामने आया था, जिसके बाद गिरफ्तारियां भी हुईं.

प्रयागराज से लेकर लखनऊ तक, जब छात्र सड़कों पर उतरते हैं, तो उनकी एक ही चीख होती है, आखिर बार-बार उनकी मेहनत और सपनों का सौदा क्यों किया जाता है?

मध्य प्रदेश: ऑनलाइन परीक्षाओं में संदिग्ध कारनामे

मध्य प्रदेश में प्रतियोगी परीक्षाओं की डगर हमेशा से कांटों भरी रही है. इस साल 2 मार्च को मध्य प्रदेश कर्मचारी चयन मंडल की आबकारी आरक्षक ऑनलाइन भर्ती परीक्षा में भारी गड़बड़ी सामने आई, जब सिस्टम अलर्ट ने बताया कि 12 अभ्यर्थियों ने 100 सवालों का पेपर महज 15 मिनट में पूरा कर लिया! परीक्षा एजेंसी की जांच के बाद इन सभी के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई. यह मामला इस बात का सबूत है कि ऑनलाइन परीक्षाओं की निगरानी और सुरक्षा पर आज भी बड़े और गंभीर सवाल खड़े होते हैं.

महाराष्ट्र: MPSC के खिलाफ 11 दिन का ऐतिहासिक आंदोलन और सरकार का यू-टर्न

महाराष्ट्र में लोक सेवा आयोग (MPSC) की परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं और पेपर लीक के आरोपों को लेकर पुणे के छात्रों ने जो तेवर दिखाए, उसने पूरे देश का ध्यान खींचा. छात्रों ने आयोग के अध्यक्ष के इस्तीफे और पारदर्शी जांच की मांग को लेकर लगातार 11 दिनों तक कड़ा संघर्ष किया. बढ़ते दबाव के बीच आखिरकार राज्य सरकार को झुकना पड़ा और एक उच्च स्तरीय जांच समिति बनाने के साथ-साथ आयोग के अध्यक्ष को अनिवार्य अवकाश पर भेजना पड़ा. यह जीत इस बात की मिसाल है कि जब युवा एकजुट होते हैं, तो सरकार को भी अपनी नीतियां बदलनी पड़ती हैं.

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झारखंड: JPSC-JSSC परीक्षाओं के खिलाफ सड़कों पर फूटा उबाल

खनिज संपदा से संपन्न झारखंड के युवाओं की किस्मत के साथ खिलवाड़ का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है. अगस्त 2026 के दौरान रांची में छात्रों ने 14वीं JPSC परीक्षा और JSSC-CGL जैसी संयुक्त स्नातक स्तरीय परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों के खिलाफ मोर्चा खोल दिया.

छात्रों ने सीबीआई (CBI) और ईडी (ED) से उच्च स्तरीय जांच की मांग करते हुए महीनों तक आवाज उठाई. छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो के नेतृत्व में चली भूख हड़ताल और सड़कों पर उतरा जनसैलाब यह बताने के लिए काफी था कि राज्य का युवा अब प्रशासनिक तानाशाही को और बर्दाश्त करने के मूड में नहीं है. अंत में शीबू सोरेन सरकार को सामने आकर भर्ती रद्द करनी पड़ी, हालांक‍ि अभी ये मामला हाई कोर्ट में है. 

बिहार: शिक्षक भर्ती (TRE-4) का पैटर्न 

पेपर लीक को लेकर बिहार में इस साल युवाओं ने अपनी रणनीति बदली और सिस्टम को सुधारने के लिए लोकतांत्रिक लड़ाई लड़ी. अगस्त 2026 में शिक्षक भर्ती परीक्षा (TRE-4) के पैटर्न को लेकर छात्रों ने उग्र प्रदर्शन किया. उनकी मांग थी कि परीक्षा दो चरणों के बजाय एक ही चरण में हो और 'वन कैंडिडेट, वन र‍िजल्ट' नीति लागू की जाए, ताकि एक ही मेधावी छात्र कई सीटें न घेरे और बाकी युवाओं को भी मौका मिले. छात्रों के दबाव के आगे झुकते हुए शिक्षा विभाग को उनकी यह मांग माननी पड़ी.

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पंजाब: फार्मेसी ऑफिसर भर्ती परीक्षा और हाईटेक नकल का चक्रव्यूह

पंजाब में 19 जुलाई 2026 को बाबा फरीद यूनिवर्सिटी ऑफ हेल्थ साइंसेज द्वारा आयोजित फार्मेसी ऑफिसर भर्ती परीक्षा उस वक्त विवादों में आ गई जब पेन कैमरा और ब्लूटूथ ईयरपीस जैसे हाईटेक गैजेट्स के जरिए नकल का मामला सामने आया. जहां विश्वविद्यालय प्रशासन इसे तकनीकी नकल बता रहा था, वहीं छात्र संगठनों ने इसे सीधा पेपर लीक करार दिया और दोबारा परीक्षा की मांग की.

मामले की गंभीरता को देखते हुए पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने नियुक्तियों पर रोक लगा दी, जिससे यह साफ हो गया कि चयन प्रक्रिया की शुचिता पर से भरोसा डगमगा चुका है.

कर्नाटक: KPSC में सुधार की मांग को लेकर फ्रीडम पार्क में गूंजी आवाज

दक्षिण भारत के तकनीकी हब कर्नाटक में भी हालात जुदा नहीं हैं. 19 सितंबर 2026 को बेंगलुरु के फ्रीडम पार्क में नौकरी के अभ्यर्थियों ने कर्नाटक लोक सेवा आयोग (KPSC) में आमूल-चूल सुधार की मांग को लेकर जोरदार प्रदर्शन किया. 'जॉब एस्पिरेंट्स स्ट्रगल कमेटी' और अन्य संगठनों ने आयोग को पारदर्शी बनाने, पिछले कई वर्षों की रुकी हुई भर्तियों की स्वतंत्र जाँच कराने और दोषियों पर सख्त कार्रवाई करने की पुरजोर मांग उठाई.

ओडिशा: पुलिस सब-इंस्पेक्टर भर्ती का पेपर लीक 

ओडिशा में पुलिस सब-इंस्पेक्टर भर्ती परीक्षा का पेपर लीक मामला इस साल तब और गर्मा गया जब प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने मनी लॉन्ड्रिंग के तहत राज्यभर में कई ठिकानों पर ताबड़तोड़ छापेमारी की. पिछले साल परीक्षा रद्द होने और सीबीआई द्वारा चार्जशीट दाखिल किए जाने के बाद से ही यह मामला युवाओं के बीच प्रशासनिक भ्रष्टाचार के खिलाफ एक बड़ा प्रतीक बन चुका है.

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क्या अब भी नहीं जागेगा सिस्टम?

इन आठ राज्यों के ये सुलगते उदाहरण साफ चीख-चीख कर कह रहे हैं कि देश के युवाओं की समस्याएं अब क्षेत्रीय नहीं रहीं, बल्कि यह पूरे देश की प्रशासनिक व्यवस्था पर एक बड़ा बदनुमा दाग बन चुकी हैं. समय पर परीक्षा कैलेंडर जारी करना, पेपर लीक रोकने के लिए फूल-प्रूफ सुरक्षा चक्र बनाना, परिणामों की समयसीमा तय करना और दोषियों को सलाखों के पीछे भेजना, यही वो एकमात्र रास्ते हैं जिनसे युवाओं का टूटा हुआ भरोसा वापस आ सकता है. जब तक हुक्मरान इस आग की तपिश को नहीं समझेंगे, तब तक देश का युवा इसी तरह अपनी डिग्रियां हाथों में लेकर सड़कों पर इंकलाब लिखता रहेगा.

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