केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) के 'थ्री-लैंग्वेज फॉर्मूला' (तीन-भाषा फॉर्मूला) सर्कुलर को चुनौती देने वाली एक जनहित याचिका (PIL) पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई. सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश (CJI) की अगुवाई वाली पीठ ने याचिकाकर्ता संगठन के नाम पर हैरानी जताई और इस मामले को पहले से लंबित अन्य संबंधित मामलों के साथ टैग करने का आदेश दिया. कोर्ट ने इस पर कोई भी जल्दबाजी में आदेश देने से साफ इनकार कर दिया.
यह कौन है? याचिकाकर्ता के नाम पर भड़के CJI
सुनवाई शुरू होते ही मुख्य न्यायाधीश (CJI) की नजर याचिकाकर्ता संगठन के नाम पर पड़ी, जिस पर उन्होंने तीखी टिप्पणी की. कोर्ट में चीफ जस्टिस ने पूछा कि यह कैसा नामकरण (nomenclature) है? 'फ्रेंड्स ऑफ द पीपल फॉर डेमोक्रेसी' ? यह कौन है? कोर्ट ने संगठन की पहचान और इसकी साख को लेकर अनौपचारिकता पर सवाल उठाए.
CBSE ने मिस की 13 जून की डेडलाइन
वहीं याचिकाकर्ता के वकील ने अदालत के सामने सीबीएसई (CBSE) की लापरवाही का मुद्दा उठाने की कोशिश की. याचिकाकर्ता ने दलील दी कि तय कार्यक्रम के अनुसार, सीबीएसई को 13 जून तक इस थ्री-लैंग्वेज फॉर्मूले को लागू करने के संबंध में विस्तृत दिशा-निर्देश जारी करने थे. वकील ने कोर्ट को बताया कि बोर्ड को दी गई समयसीमा बीत चुकी है, लेकिन अभी तक जमीनी स्तर पर सीबीएसई द्वारा कोई कदम नहीं उठाया गया है.
कोर्ट का सिंगल-लाइन ऑर्डर देने से साफ इनकार
याचिकाकर्ता की दलीलें सुनने के बाद चीफ जस्टिस ने स्पष्ट किया कि कोर्ट इस संवेदनशील नीतिगत मामले पर कोई तदर्थ (ad-hoc) आदेश पारित नहीं करेगा. CJI का आदेश के अनुसार हम इस मामले में कोई सिंगल-लाइन ऑर्डर (एक लाइन का आदेश) पास नहीं करने जा रहे हैं. इसी तरह के एक दूसरे मामले में पहले ही बहुत विस्तृत सुनवाई की जा चुकी है. इसलिए, हम इस नई याचिका को भी उसी से जुड़े अन्य मामलों के साथ टैग कर रहे हैं.
क्या है थ्री-लैंग्वेज फॉर्मूला विवाद?
राष्ट्रीय नई शिक्षा नीति (NEP) के तहत स्कूलों में तीन भाषाओं (हिंदी, अंग्रेजी और एक क्षेत्रीय/स्थानीय भाषा) को पढ़ाने का सर्कुलर सीबीएसई द्वारा जारी किया गया है. कई संगठन इसके क्रियान्वयन, भाषाओं के चयन की अनिवार्यता और बुनियादी ढांचे की कमी को लेकर अदालतों का दरवाजा खटखटा रहे हैं. अब सुप्रीम कोर्ट इन सभी याचिकाओं पर एक साथ व्यापक सुनवाई करेगा.
अनीषा माथुर