खत्म नहीं हुई थी CBSE की जांच, तब तक सार्थक सिद्धांत ने बना दिया 1.66 करोड़ का रिकॉर्ड पोर्टल

कक्षा 12 के छात्र सार्थक सिद्धांत ने एक सार्वजनिक पोर्टल लॉन्च किया है, जिसमें करीब 1.66 करोड़ खरीद रिकॉर्ड शामिल है. उनका कहना है कि यह डेटाबेस नागरिकों, पत्रकारों और शोधकर्ताओं को सरकारी अनुबंधों की जानकारी आसानी से देखने में मदद करेगा. 

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सार्थक सिद्धांत ने बना दिया 1.66 करोड़ का रिकॉर्ड पोर्टल सार्थक सिद्धांत ने बना दिया 1.66 करोड़ का रिकॉर्ड पोर्टल

आजतक एजुकेशन डेस्क

  • नी दिल्ली,
  • 27 जून 2026,
  • अपडेटेड 1:18 PM IST

हाल ही में कक्षा 12वीं के छात्र सार्थक सिद्धांत केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) के डिजिटल मूल्यांकन टेंडर का विश्लेषण करने के लिए सुर्खियों में आए थे, ने भारत सरकार के केंद्रीय सार्वजनिक खरीद (सीपीपी) पोर्टल से लगभग 1.66 करोड़ रिकॉर्ड वाले एक सार्वजनिक पोर्टल शुरू किया है. सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर शेयर करते हुए सार्थक ने लिखा कि पारदर्शिता आसानी से उपलब्ध होनी चाहिए और अब यह उपलब्ध है. पिछले दो हफ्तों में सीपीपी पोर्टल से करीब 1.66 करोड़ खरीद रिकॉर्ड निकाले गए हैं और उन्हें नागरिकों, पत्रकारों और शोधकर्ताओं के लिए सार्वजनिक रूप से उपलब्ध कराया गया है. उन्होंने लोगों को डेटाबेस डाउनलोड करके खुद रिकॉर्ड जांचने के लिए भी कहा है. इसे उन्होंने एक बड़े पारदर्शिता अभियान की शुरुआत बताया है. 

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क्या है इसका उद्देश्य? 

यह पोर्टल केवल शिक्षा या उसके क्षेत्र तक ही सीमित नहीं है बल्कि इसे और आगे तक बढ़ाया गया है. सिद्धांत के अनुसार, इसमें सरकार के सीपीपी पोर्टल से ली गई खरीद से जुड़ी जानकारी शामिल है. इसका मकसद सरकारी खर्च के रिकॉर्ड को ढूंढना और उनका विश्लेषण करना और उसे आसान बनाना है. सीबीएसई टेंडर से जुड़े उनके निष्कर्ष पहले ही संसद तक भी पहुंच चुके थे. वे मूल्यांकन प्रणाली और खरीद प्रक्रिया पर अपनी राय देने के लिए शिक्षा संबंधी संसदीय स्थायी समिति के सामने भी पेश हुए थे. सिद्धांत का कहना है कि इस नए खरीद डेटाबेस से अब ज्यादा लोग सरकारी रिकॉर्ड का खुद विश्लेषण कर सकेंगे, जिससे सार्वजनिक जवाबदेही और पारदर्शिता बढ़ेगी. 

ऑन-स्क्रीन मार्किंग पर भी खड़े कर चुके हैं सवाल 

बता दें कि सिद्धांत पहले भी ऑन-स्क्रीन मार्किंग(OSM) सिस्टम और कक्षा 12वीं की आंसर कॉपी के डिजिटल मूल्यांकन से संबंधित डॉक्यूमेंट पब्लिश किया था जिसके बाद पहली बार वह केंद्र पर आए थे. अपनी उत्तर पुस्तिकाओं की स्कैन कॉपी देखने और अंकों में अंतर पाए जाने के बाद उन्होंने इस मामले की जांच शुरू की. जैसे-जैसे कई छात्रों ने डिजिटल मूल्यांकन की पारदर्शिता पर सवाल उठाए, उन्होंने सीबीएसई टेंडर दस्तावेजों के अलग-अलग संस्करणों पर फोकस किया. सिद्धांत ने प्रदर्शन शर्तों और प्रमाणन नियमों में हुए बदलावों को नोट किया. उनका कहना है कि इन बदलावों से सरकारी खरीद प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल उठते हैं.

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