दिल्ली के प्रतिष्ठित लेडी श्रीराम (LSR) कॉलेज फॉर विमेन के पिछले गेट से महज 50 मीटर की दूरी पर हुई पुलिस मुठभेड़ ने पूरे कैंपस को हिलाकर रख दिया है. कालकाजी गैंगरेप केस के आरोपी के साथ हुई इस मुठभेड़ के बाद कॉलेज प्रशासन ने सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए तुरंत भौतिक कक्षाएं रद्द कर दीं और बुधवार से सभी क्लासेज को ऑनलाइन मोड में शिफ्ट कर दिया.
मंगलवार दोपहर 12 बजे के बाद से ही कॉलेज परिसर की सभी गतिविधियों को रोक दिया गया था. प्रशासन का कहना है कि यह फैसला छात्राओं, फैकल्टी और स्टाफ की सुरक्षा को सर्वोपरि रखते हुए लिया गया है.
कॉलेज की प्रिंसिपल आहूजा ने बताया कि इस दुर्भाग्यपूर्ण घटना की जानकारी मिलते ही हमने तुरंत क्लासेज रद्द कर दीं. हमारे छात्रों की सुरक्षा और भलाई हमारे लिए सबसे ज्यादा मायने रखती है. हमने अपने फैकल्टी मेंटर्स और कॉलेज काउंसलर को एक्टिव रहने को कहा है ताकि अगर किसी छात्र को मानसिक या भावनात्मक मदद की जरूरत हो, तो वे हर वक्त उपलब्ध रहें.
मंगलवार को बैक गेट पर क्या हुआ?
कॉलेज प्रशासन ने छात्राओं, शिक्षकों और कर्मचारियों को सख्त हिदायत जारी करते हुए पिछले गेट के पास एकत्र न होने की सलाह दी है. प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया कि वे कॉलेज परिसर की बाहरी सुरक्षा को लेकर दिल्ली पुलिस के लगातार संपर्क में हैं. इसके अलावा, गेस्ट फैकल्टी को भी बुधवार को अपनी कक्षाएं ऑनलाइन मोड में ही संचालित करने के निर्देश दिए गए हैं.
दूसरी तरफ, घटना की गंभीरता को देखते हुए लेडी श्रीराम कॉलेज की स्टूडेंट्स यूनियन ने मंगलवार रात 9 बजे एक इमरजेंसी ऑनलाइन जनरल बॉडी मीटिंग (GBM) बुलाई. स्टूडेंट्स यूनियन ने अपने आधिकारिक बयान में कहा कि कॉलेज के इतने करीब एनकाउंटर होने से कई छात्राएं काफी डरी हुई और असुरक्षित महसूस कर रही हैं.
यूनियन के मुताबिक, गूगल मीट के जरिए आयोजित इस बैठक का मकसद छात्रों को अपनी चिंताएं जाहिर करने, सवाल पूछने और कैंपस सुरक्षा के लिए जरूरी कदम उठाने पर चर्चा करने का मंच देना था. यूनियन अब सुरक्षा मांगों को लेकर जल्द ही प्रिंसिपल ऑफिस से औपचारिक मुलाकात करेगी ताकि कैंपस को कागजों में ही नहीं, बल्कि जमीनी हकीकत में एक 'सुरक्षित ठिकाना' बनाया जा सके.
क्या थी पुलिस की एनकाउंटर कार्रवाई?
पुलिस रिकॉर्ड्स के मुताबिक, अमर कॉलोनी के बैक गेट रोड (DM ऑफिस रोड) के पास तड़के पुलिस टीम जब आरोपी को पकड़ने पहुंची, तो उसने पुलिस पार्टी पर गोलियां चला दीं. पुलिस की जवाबी कार्रवाई में 'आसिफ' नाम के आरोपी के पैर में गोली लगी, जिसके बाद उसे गिरफ्तार कर लिया गया.
यह एनकाउंटर कालकाजी मंदिर के पास स्थित आस्था कुंज पार्क में 17 वर्षीय नाबालिग लड़की के साथ हुए भयानक गैंगरेप केस के मुख्य आरोपी को पकड़ने के लिए चलाया गया ऑपरेशन था.
पुलिस शिकायत के अनुसार, सोमवार शाम जब पीड़िता अपने 17 वर्षीय पुरुष मित्र के साथ पार्क में बैठी थी, तब तीन व्यक्तियों ने खुद को 'पुलिस वाला' बताकर उन्हें रोका. आरोपियों ने नाबालिग होने का डर दिखाकर उन पर केस दर्ज करने की धमकी दी. इसके बाद दोनों को अलग किया गया और लड़की को पार्क के एक सुनसान हिस्से में ले जाया गया.
प्राथमिकी (FIR) के मुताबिक, आरोपी आसिफ ने बंदूक और चाकू की नोक पर नाबालिग को डराकर उसके साथ यौन उत्पीड़न किया. अन्य दो आरोपियों ने भी लड़की के साथ दरिंदगी की. घटना के बाद पीड़िता का एम्स (AIIMS) में मेडिकल परीक्षण कराया गया, जिसके आधार पर अमर कॉलोनी थाने में भारतीय न्याय संहिता (BNS) और पॉक्सो (POCSO) एक्ट के तहत गंभीर धाराओं में केस दर्ज किया गया.
आरोपियों के परिवार का पलटवार: 'साजिश में फंसाया जा रहा है'
जहां एक तरफ पुलिस आसिफ को एनकाउंटर के बाद पकड़े जाने का दावा कर रही है, वहीं मामले में नामजद अन्य दो आरोपियों यानी हेमंत और मुकेश के पिता (अधिवक्ता जे.आर. ढांकड़) ने पुलिसिया कार्रवाई पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं.
एडवोकेट ढांकड़ का आरोप है कि पुलिस उनके बेटों को मंगलवार सुबह 7 बजे उनके घर से उठाकर ले गई और उन्हें इस हिरासत का कोई कारण नहीं बताया गया. उन्होंने आरोप लगाया कि मेरे बेटों के साथ पुलिस ने मारपीट की है. हम उस लड़की को जानते तक नहीं हैं और न ही मेरे बेटों का उससे कोई संबंध है. यह मेरे बेटों को झूठे केस में फंसाने की एक बड़ी साजिश है.
परिजनों के मुताबिक, हेमंत दिल्ली के साकेत कोर्ट में वकालत करते हैं, जबकि मुकेश बीएससी (गणित) अंतिम वर्ष का छात्र है. हालांकि, परिवार के इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है और मामले में कानूनी जांच जारी है.
बहरहाल, दिल्ली के पॉश इलाके में स्थित नामी गर्ल्स कॉलेज के ठीक बाहर हुई इस वारदात और पुलिसिया मुठभेड़ ने राजधानी में महिलाओं की सुरक्षा व्यवस्था और शैक्षणिक संस्थानों के आसपास के माहौल पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं.
अनमोल नाथ