भारत में कर्मचारी तो खुश... लेकिन नहीं करना चाहते एक्स्ट्रा एफर्ट्स

भारतीय वर्क प्लेस पर पहले से कहीं बेहतर सुविधाएं, फायदे और कर्मचारी अनुभव प्रदान कर रहे हैं लेकिन फिर भी ग्रेट प्लेस टू वर्क की एक नई रिपोर्ट के मुताबिक, कई चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं. कर्मचारी अब पहले की तरह अतिरिक्त मेहनत करने के लिए तैयार नहीं दिख रहे हैं जिसका सबसे ज्यादा असर आईटी सेक्टर में देखने को मिल रहा है.

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क्या एक्स्ट्रा काम नहीं करना चाहते कर्मचारी? क्या एक्स्ट्रा काम नहीं करना चाहते कर्मचारी?

आजतक एजुकेशन डेस्क

  • नई दिल्ली,
  • 26 जुलाई 2026,
  • अपडेटेड 6:30 PM IST

आजकल केवल जॉब मार्केट ही नहीं बदल रहा है बल्कि वर्क प्लेस की आदतें और सुविधाएं भी बदल रही हैं. ऑफिस में अब कर्मचारियों को ज्यादा सुविधा मिल रही है, जो पहले नहीं मिलती थी. धीरे-धीरे वर्क प्लेस कर्मचारियों के लिए अनुकूल बन रहा है. कंपनियां आजकल अपने कर्मचारियों के लिए बेहतर सुविधाओं में निवेश कर रही हैं. लेकिन फिर भी एम्पलाई अधिक मेहनत करने के लिए तैयार नहीं है. पहले की तुलना में  वह कम प्रयास कर रहे हैं. 

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ग्रेट प्लेस टू वर्क इंडिया की 2026 की रिपोर्ट के अनुसार, कंपनियों में कर्मचारियों का अनुभव पहले से बेहतर हुआ है, लेकिन उनकी काम करने की इच्छा कम हो रही है. कई कर्मचारी अब पहले की तरह अपनी क्षमता से बढ़कर काम करने के लिए उत्साहित महसूस नहीं करते. 

क्या भारतीय वर्क प्लेस में आ रहा है बदलाव? 

बता दें कि रिपोर्ट में कहा गया है कि साल 2023 के मुकाबले कर्मचारियों  की अपनी जिम्मेदारियों से बढ़कर काम करने की इच्छा में 4% की गिरावट आई है. इससे भी ज्यादा हैरान करने वाली बात यह है कि सर्वे में शामिल 63 कंपनियों ने बताया कि कर्मचारियों की एक्स्ट्रा काम करने की इच्छा कम हुई है और ये साल दर साल गिरती जा रही है. 

कंपनियां दे रही हैं बेहतर सुविधाएं 

हैरानी की बात यह है कि ये ऐसे समय में हो रहा है जब कंपनियां अपने कर्मचारियों को बेहतर सुविधाएं और अच्छा कार्य माहौल दे रही हैं. इसके बावजूद कर्मचारियों का काम के प्रति उत्साह और समर्पण पहले जैसा नहीं रहा. रिपोर्ट में कहा गया है कि अब कई कर्मचारियों को लगता है कि जरूरत से ज्यादा मेहनत करने का उन्हें कोई खास फायदा नहीं मिलता. 

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कुछ सेक्टर में इसका असर है ज्यादा 

कुछ उद्योगों में कर्मचारियों की अतिरिक्त मेहनत करने की इच्छा दूसरों के मुकाबले ज्यादा घटी है. रिपोर्ट बताती है कि आईटी सेक्टर में सबसे बड़ी गिरावट देखी गई है. इसमें 6 प्रतिशत की गिरावट हुई है. इसके बाद प्रोफेशनल सर्विसेज में 5% और कंस्ट्रक्शन, इंफ्रास्ट्रक्चर और रियल एस्टेट सेक्टर में 4% की कमी देखी गई.

वहीं, मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में यह स्थिति अपेक्षाकृत बेहतर रही. इस क्षेत्र के कर्मचारियों ने अन्य उद्योगों की तुलना में अतिरिक्त मेहनत करने की अपनी इच्छा को काफी हद तक बनाए रखा है. रिपोर्ट का कहना है कि आईटी और अन्य नॉलेज बेस्ड कंपनियों में काम का दबाव और बढ़ती अपेक्षाओं के कारण कर्मचारियों के रवैये में सबसे ज्यादा बदलाव देखने को मिल रहा है. 

केवल सुवधाएं नहीं हैं पर्याप्त

रिपोर्ट में बताया कि पहले माना जाता था कि कर्मचारियों को बेहतर सुविधाएं और काम करने के लिए अच्छे वर्क प्लेस देने से उनका प्रदर्शन अच्छा होगा. लेकिन अब यह सोच पूरी तरह सही साबित नहीं हो रही है. आज कर्मचारियों के लिए लचीली नीतियां, मनोरंजक गतिविधियां या अच्छी सुविधाएं ही काफी नहीं हैं. वे चाहते हैं कि उनके काम की सराहना हो, उन्हें महत्व दिया जाए और उन्हें महसूस हो कि उनका काम किसी बड़े उद्देश्य से जुड़ा है. 

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रिपोर्ट का कहना है कि अगर कर्मचारियों को यह जुड़ाव और सम्मान नहीं मिलता, तो अच्छा कार्यस्थल होने के बावजूद वे पहले जैसी लगन और समर्पण से काम नहीं करते. 

नेतृत्व ही बन गया अंतर की वजह 

रिपोर्ट के मुताबिक, कर्मचारियों की प्रेरणा बनाए रखने में सबसे बड़ी भूमिका कंपनी के लीडरशिप की होती है. लेकिन रिपोर्ट में पाया गया कि जिन कंपनियों के लीडर कर्मचारियों का ध्यान रखते हैं, उनकी बात सुनते हैं और उनके काम की सराहना करते हैं, वहां कर्मचारियों को लंबे समय तक बनाए रखना, नई हायरिंग, ग्राहक सेवा और काम का प्रदर्शन बेहतर रहता है. 

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि एआई के बढ़ते इस्तेमाल के दौर में सिर्फ अच्छी सुविधाएं देना काफी नहीं है. कर्मचारी तब ज्यादा मेहनत करते हैं, जब उन्हें लगता है कि उनका काम महत्वपूर्ण है, उनके योगदान की कद्र होती है और उनके नेता उनकी बात सुनते हैं. 

रिपोर्ट का निष्कर्ष है कि आज कंपनियों के सामने सबसे बड़ी चुनौती केवल अच्छा वर्क प्लेस बनाना नहीं, बल्कि कर्मचारियों को उनके काम का उद्देश्य और महत्व महसूस कराना है. 

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