दिल्ली विश्वविद्यालय छात्रसंघ (DUSU) चुनाव 2026 की सबसे हॉट और हाई-प्रोफाइल 'अध्यक्ष' सीट का फैसला आ चुका है. हर बीतते राउंड के साथ घटती-बढ़ती धड़कनों और सांसे रोक देने वाले कड़े मुकाबले के बीच अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) के दांव यश डबास ने आखिरकार बाजी मार ली है.
अपनी दमदार रणनीति, जमीनी कैडर की ताकत और दूरदर्शी वादों के दम पर यश डबास ने एनएसयूआई के विजय शंकर मीणा को शिकस्त देकर डूसू प्रेसिडेंट की कुर्सी पर अपना कब्जा जमा लिया है. लेकिन अंतरराष्ट्रीय खेल के मैदान में भारत का नाम रोशन करने वाले यश डबास कौन हैं? कैसे उन्होंने फेक मार्कशीट विवाद के बीच भी छात्रों का भरोसा जीता? आइए जानते हैं डूसू के नए 'बॉस' की पूरी कहानी.
इंटरनेशनल टेनिस प्लेयर हैं यश
छात्र राजनीति की गलियों में कदम रखने से बहुत पहले यश डबास खेल जगत में अपनी एक खास पहचान बना चुके थे. यश एक पेशेवर और अंतरराष्ट्रीय स्तर के टेनिस खिलाड़ी रहे हैं. उन्होंने स्पेन, ऑस्ट्रेलिया और सर्बिया में आयोजित प्रतिष्ठित ITF (इंटरनेशनल टेनिस फेडरेशन) प्रतियोगिताओं में भारत का प्रतिनिधित्व किया है.
इसके अलावा उन्होंने 'खेलो इंडिया', सीबीएसई नेशनल्स, SGFI नेशनल्स और ऑल इंडिया यूनिवर्सिटी गेम्स में भी अपनी खेल प्रतिभा का लोहा मनवाया है. खेल के मैदान पर अनुशासन और 'लास्ट सेकेंड तक लड़ने' की जिस सीख को उन्होंने सीखा, उसी ने उन्हें डूसू के इस कांटेदार चुनावी मुकाबले में अंत तक टिके रहने और जीत दर्ज करने का हौसला दिया.
खालसा कॉलेज से ग्रेजुएशन, लॉ ग्रेजुएट और अब बुद्धिस्ट स्टडीज
बाहरी दिल्ली के कंझावला इलाके के रहने वाले यश डबास पढ़ाई-लिखाई में भी पीछे नहीं रहे हैं. उन्होंने दिल्ली यूनिवर्सिटी के प्रतिष्ठित श्री गुरु तेग बहादुर खालसा (SGTB Khalsa) कॉलेज से अपना ग्रेजुएशन पूरा किया. इसके बाद उन्होंने डीयू के कैंपस लॉ सेंटर (CLC) से कानून (LL.B) की डिग्री हासिल की. वर्तमान में यश दिल्ली विश्वविद्यालय के 'बौद्ध अध्ययन विभाग' से मास्टर्स (MA) की पढ़ाई कर रहे हैं. वे पिछले 6 सालों से एबीवीपी के एक समर्पित और सक्रिय कार्यकर्ता के रूप में कैंपस में लगातार छात्रों के मुद्दों पर आवाज उठाते रहे हैं.
'फेक मार्कशीट' का लगा था आरोप
जैसे ही एबीवीपी ने डूसू चुनाव के लिए उम्मीदवारों की लिस्ट में यश डबास के नाम का ऐलान किया था, सोशल मीडिया पर कथित तौर पर उनकी एक मार्कशीट तेजी से वायरल कर दी गई. विरोधी छात्र संगठनों ने उनके शैक्षणिक रिकॉर्ड और अंकों को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए और उन्हें घेरने की पूरी कोशिश की.
हालांकि, एबीवीपी और खुद यश डबास ने इसे 'चुनावी फायदे के लिए रचा गया दुष्प्रचार' करार दिया. एबीवीपी का कहना था कि चुनाव से ठीक पहले यश की बढ़ती लोकप्रियता से घबराकर विरोधियों ने यह फेक मार्कशीट कैंपेन चलाया. अंततः डीयू के आम छात्रों ने इस राजनीतिक बवंडर को खारिज करते हुए उनके काम और विजन पर अपनी मोहर लगाई.
पिंक बूथ, वामिका वैन और 'अ-भा-वि-प' मॉडल पर जीता भरोसा
यश डबास ने केवल नारों के दम पर चुनाव नहीं लड़ा, बल्कि उनका चुनावी एजेंडा सुरक्षा और बुनियादी सुविधाओं पर केंद्रित रहा. इनमें गर्ल्स कॉलेजों के पास 'पिंक बूथ' की स्थापना, कैंपस में 1,000 से अधिक सीसीटीवी (CCTV) कैमरे लगाना और छात्राओं की आपातकालीन सुरक्षा के लिए 'वामिका' वैन की तैनाती का ठोस रोडमैप. यश ने अपने कैंपेन को 'अ' (अवास/हॉस्टल), 'भा' (निर्णय प्रक्रिया में भागीदारी), 'वि' (विश्वास/परीक्षा सुधार) और 'प' (परिणाम/रोजगार) के चार स्तंभों पर केंद्रित किया. बढ़ते पीजी किरायों और हॉस्टल की किल्लत पर लगातार आवाज उठाना और लाइब्रेरी-कैंपस में वाई-फाई जैसी बुनियादी सुविधाओं की गारंटी देना.
टेनिस कोर्ट में हर अंक के लिए संघर्ष करने वाले यश डबास ने साबित कर दिया है कि जब इरादे मजबूत हों, तो विरोधी कैंपेन और राजनीतिक बवंडर भी जीत की राह नहीं रोक सकते.
आजतक एजुकेशन डेस्क