बेटी के साथ रहने के लिए ठुकरा दिया 5 लाख का पैकेज, अब जूस बिजनेस से कर रही 50 लाख की कमाई 

इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी करने के बाद मयूरी नितिन काले ने 5 लाख रुपये सालाना की सैलरी वाली कॉर्पोरेट नौकरी के लिए नासिक जाने के लिए अपने बेटी की वजह से मना कर दिया. इसके बजाय उन्होंने नासिक में ही एक जूस की दुकान शुरू की. आज उनके व्यवसाय से सालाना लगभग 50 लाख रुपये की कमाई होती है. 

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बेटी के लिए मां ने छोड़ दी नौकरी. बेटी के लिए मां ने छोड़ दी नौकरी.

आजतक एजुकेशन डेस्क

  • नई दिल्ली,
  • 01 अगस्त 2026,
  • अपडेटेड 5:14 PM IST

कई इंजीनियरिंग ग्रेजुएट्स का सपना किसी बड़ी कंपनी में नौकरी पाने का होता है. लेकिन मयूरी नितिन काले ने अलग फैसला लिया. इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी करने के बाद शादी और मां बनने के बाद उन्हें 5 लाख रुपये सालाना की कॉर्पोरेट नौकरी मिली. लेकिन नौकरी के लिए पुणे जाना पड़ता और उन्हें अपनी छोटी बेटी से दूर रहना पड़ता. इसलिए उन्होंने यह नौकरी छोड़कर दूसरा रास्ता चुना. 

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कॉर्पोरेट नौकरी करने के बजाय मयूरी नासिक में ही रहीं और एक छोटा-सा जूस स्टॉल शुरू किया. उनका यह फैसला सफल रहा और आज उनके इस कारोबार से कथित तौर पर सालाना करीब 50 लाख रुपये की कमाई होती है. 

नौकरी के बजाय परिवार को चुना 

खबरों के मुताबिक, मयूरी ने कंपनी का ऑफर केवल इसलिए ठुकरा दिया क्योंकि वह अपनी बेटी से दूर नहीं जाना चाहती थीं. जहां कई लोगों ने इस फैसले को करियर के लिए एक त्याग की तरह देखा, तो वहीं कई लोगों ने कहा कि उन्हें इसे एक ऐसे अवसर के रूप में देखना चाहिए था जिससे वह काम और पारिवारिक जीवन में बैलेंस बना सकें. 

शुरू किया अपना काम 

मयूरी को बिजनेस चलाने का कोई अनुभव नहीं था और उन्होंने बड़े निवेश से शुरुआत नहीं की थी. उन्होंने नासिक में एक छोटे से जूस स्टॉल से शुरुआत की, जहां उनका मुख्य उद्देश्य ग्राहकों को फ्रेश जूस परोसना था. समय के साथ, लगातार अच्छी सर्विस और बढ़ती मांग ने उनके व्यवसाय को विस्तार देने में मदद की. 

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मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, आज यह व्यवसाय कथित तौर पर हर महीने लगभग 80,000 रुपये कमाता है, और इसका सालाना प्रॉफिट लगभग 50 लाख रुपये होने का अनुमान है. 

प्रेरणा है मयूरी की कहानी 

मयूरी की कहानी इस धारणा को चुनौती देती है कि सफलता हमेशा पारंपरिक कॉर्पोरेट करियर से ही मिलती है. हालांकि, व्यवसाय स्थापित करने में अपने जोखिम और चुनौतियां होती हैं, लेकिन उनकी इस जर्नी ने इस बात को उजागर करती है कि छोटे बिजनेस में जब मेहनत की जाए तो, वह बड़े बन जाते हैं. 

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