हार्वर्ड, येल और स्टैनफोर्ड जैसे 15 बड़े विश्वविद्यालयों ने 19 साल के जैक यादेगारी को दाखिला देने से मना कर दिया था. लेकिन कहते हैं न जब आप किसी चीज के लिए मेहनत करते हैं, तो उसका फल आपको जरूर मिलता है. विश्वविद्यालयों से मिली रिजेक्शन के बाद अब उन्होंने अपने नए AI स्टार्टअप पर्सोना के लिए 1 करोड़ डॉलर की फंडिंग जुटा ली है. जैक इससे पहले कैलोरी गिनने वाले ऐप कैल AI के सह-संस्थापक भी रह चुके हैं. हालांकि, उन्होंने इसे मायफिटनेसपाल को बेचे दिया. लेकिन उन्होंने बताया कि उसकी इस डील से पहले हर साल 3 करोड़ डॉलर (करीब 250 करोड़ रुपये) से ज्यादा की कमाई हो रही थी.
अब जैक एक ऐसा AI असिस्टेंट बना रहे हैं, जो लोगों को रोजमर्रा के काम संभालने में मदद करेगा. टेकक्रंच के मुताबिक, इस स्टार्टअप की फंडिंग में वाइन वेंचर्स ने नेतृत्व किया. इसमें जेड फेलो के संस्थापक कोरी लेवी और कलेक्टिव ग्लोबल ने भी निवेश किया है.
रिजेक्शन से करोड़ों के सफर तक
जैक की यह स्टोरी हर उस युवा को प्रोत्साहित करती है जो मिली हार की वजह से अपने कदम पीछे कर लेते हैं, लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया. न्यूयॉर्क के लॉन्ग आइलैंड के रहने वाले अमेरिकी उद्यमी यादेगारी ने सात साल की उम्र में कंप्यूटर प्रोग्रामिंग सीखना शुरू कर दिया था. प्रौद्योगिकी में उनकी शुरुआती रुचि ने उन्हें स्कूल में रहते हुए ही कई व्यावसायिक उद्यम शुरू करने के लिए प्रेरित किया.
सॉफ्टवेयर विकास के साथ-साथ उन्होंने रोबोटिक्स और अनुसंधान में भी रुचि दिखाई और अपने स्कूल के रोबोटिक्स क्लब के अध्यक्ष के रूप में भी काम किया. उन्होंने एक रिसर्च प्रतियोगिता भी जीती थी, जिसमें उन्होंने ऐसा एआई हाथ बनाने पर काम किया था, जो छूने पर रिएक्शन दे सके. इससे पता चलता है कि उन्हें तकनीक की मदद से असल जिंदगी की समस्याओं को हल करने में दिलचस्पी है.
बिजनेस इनसाइडर के मुताबिक, उनके शुरुआती प्रोजेक्ट्स में से एक टोटली साइंस था, जो एक गेमिंग वेबसाइट थी जिसके जरिए छात्र उन गेम्स को खेल सकते थे जो स्कूल नेटवर्क पर ब्लॉक थे. बताया जाता है कि उन्होंने महज 16 साल की उम्र में इस प्लेटफॉर्म को लगभग 100,000 डॉलर में बेच दिया था. इस शुरुआती अनुभव ने उनके बाद के उद्यमों की नींव रखी, जिसमें कैलोरी-ट्रैकिंग ऐप भी शामिल है जिसने उन्हें प्रौद्योगिकी उद्योग में व्यापक पहचान दिलाई.
कॉलेजों से मिली रिजेक्शन ने नहीं टूटने दिया हौसला
पिछले साल जैक यादगारी उस समय चर्चा में आए जब उन्होंने बताया कि जिन 18 विश्वविद्यालयों में उन्होंने दाखिले के लिए आवेदन किया था, उनमें से 15 ने उन्हें मना कर दिया. इन विश्वविद्यालयों में हार्वर्ड, येल और स्टैनफोर्ड जैसे बड़े नाम भी शामिल थे. हालांकि, यह बात लोगों को हैरान करने वाली थी.
ऐसा इसलिए क्योंकि कई रिपोर्ट्स के मुताबिक, जैक के GPA में पूरे अंक थे, ACT में उन्हें 34 स्कोर मिले थे और उनका खुद का बिजनेस भी था. आखिरकार, उन्होंने मियामी विश्वविद्यालय में एडमिशन लिया. पढ़ाई के साथ-साथ उन्होंने अपना बिजनेस आगे बढ़ाने पर भी ध्यान दिया. साल 2024 में जैक ने कैल AI नाम का ऐप शुरू किया. इस ऐप की मदद से लोग अपने खाने की फोटो अपलोड करके उसमें मौजूद कैलोरी का अंदाजा लगवा सकते हैं. इससे उन्हें हर चीज का हिसाब खुद लिखने की जरूरत नहीं पड़ती.
मार्च 2026 में MyFitnessPal ने कैल AI को खरीदने का ऐलान किया. हालांकि, यह डील कितने रुपये में हुई, इसका खुलासा नहीं किया गया था. टेकक्रंच के मुताबिक, सिर्फ दो साल में इस ऐप को 1.5 करोड़ से ज्यादा बार डाउनलोड किया गया और इससे सालाना 3 करोड़ डॉलर से ज्यादा की कमाई होने लगी थी. कैल AI की सफलता जैक के लिए बड़ी उपलब्धि रही. इससे पता चलता है कि कम उम्र में भी सही आइडिया और मेहनत से एक छोटा स्टार्टअप बड़ा बिजनेस बन सकता है.
कैसे काम करता है उनका ऐप पर्सोना?
जून में MyFitnessPal की डील के बाद जैक यादगारी ने Persona नाम का एक AI असिस्टेंट बनाना शुरू किया. यह लोगों को रोजमर्रा के काम संभालने में मदद करता है. कंपनी दिसंबर में 179 डॉलर का एक खास डिवाइस लॉन्च करने की योजना बना रही है. इसे लगातार सुनने के लिए नहीं बनाया गया है, बल्कि बटन दबाकर या कलाई की मदद से स्टार्ट किया जा सकता है.
यादगारी ने टेकक्रंच को बताया कि Persona का फिलहाल iMessage पर बीटा टेस्ट चल रहा है और इसे कुछ हजार लोग इस्तेमाल कर रहे हैं. इस लेकर यादगारी का कहना है कि कंपनी यूजर्स की बातचीत का डेटा विज्ञापन देने वाली कंपनियों को नहीं बेचेगी. हालांकि, Persona की कमाई के तरीकों में स्पॉन्सर्ड शॉपिंग सुझाव भी शामिल होंगे. अब इस स्टार्टअप की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि वह लोगों का भरोसा कितना जीत पाता है और दूसरे AI असिस्टेंट से खुद को कितना अलग बना पाता है.
जैक ने आगे बताया कि उन्होंने सात साल की उम्र में कोडिंग सीखना शुरू किया था और 16 साल की उम्र में अपनी गेमिंग वेबसाइट बेच दी थी. इसके बाद उन्होंने Cal AI की सह-स्थापना की और अब Persona के लिए 1 करोड़ डॉलर की फंडिंग जुटाई है. उनका सफर दिखाता है कि उन्होंने कम उम्र में ही तकनीक और बिजनेस की दुनिया में अपनी जगह बनाने की कोशिश की है लेकिन Persona को लंबे समय तक सफल बनाए रखने के लिए उन्हें ऐसा प्रोडक्ट तैयार करना होगा, जो लोगों के रोजमर्रा के काम आए और उनका भरोसा भी कायम रखे.
आजतक एजुकेशन डेस्क