19 साल की उम्र में AI से हर महीने 1 करोड़ की कमाई, नौकरी की जरूरत नहीं

कई बार आपको कुछ भी सीखने के लिए पैसे की नहीं बल्कि जज्बे की जरूरत होती है. ऐसी ही कहानी एक युवा की सामने आई है जो केवल 19 साल की उम्र में 1 करोड़ रुपये कमा रहा है. घर की आर्थिक तंगी के कारण उसने खुद ही मशीन लर्निंग सीखना शुरू कर दिया. छह साल की मेहनत के बाद 19 साल की उम्र में उसने AI आधारित शिक्षा का अपना बिजनेस खड़ा कर लिया है. 

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19 साल में युवा कमा रहा है 1 करोड़ रुपये. 19 साल में युवा कमा रहा है 1 करोड़ रुपये.

आजतक एजुकेशन डेस्क

  • नई दिल्ली,
  • 24 जून 2026,
  • अपडेटेड 5:37 PM IST

जब लोग युवा संस्थापकों के बारे में बात करते हैं, तो चर्चा हमेशा प्रतिष्ठित कॉलेजों, प्रभावशाली नेटवर्कों या संसाधनों तक पहुंच से शुरू होती है लेकिन 19 वर्षीय आयुष सिंह की सफलता की कहानी कुछ और ही बता रही है. सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर इन दिनों वह चर्चा में बने हुए हैं. एक्स पर शेयर की गई एक पोस्ट में ऐसा दावा किया जा रहा है कि आयुष अपने AI (कृत्रिम बुद्धिमत्ता) आधारित शिक्षा कारोबार से हर महीने करीब 1 करोड़ रुपये कमा रहे हैं. खास बात यह है कि वे न तो किसी बड़े संस्थान जैसे IIT या MIT से पढ़े हैं और न ही किसी अमीर परिवार से आते हैं. 

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अपने पोस्ट से उन्होंने बताया कि उनकी यात्रा 13 साल की उम्र में शुरू हुई, जब कोविड-19 महामारी के दौरान उनके परिवार को आर्थिक मुश्किलों का सामना करना पड़ा. इसी दौरान उन्होंने खुद से मशीन लर्निंग सीखने का फैसला किया. सीमित संसाधनों, एक लैपटॉप और सीखने की मजबूत इच्छा के दम पर उन्होंने AI की दुनिया में अपनी पहचान बनाई. 

सीखने में आई कई परेशानी 

एक्स पोस्ट से मालूम चला कि आयुष ने बहुत कम उम्र में खुद से AI और मशीन लर्निंग पढ़ना शुरू किया. कुछ महीनों में ही उसने कथित तौर पर विदेशों के स्टार्टअप्स के साथ काम करना शुरू कर दिया. पोस्ट के अनुसार 14 साल की उम्र में MIT ने उसके कोर्स की सार्वजनिक रूप से सिफारिश की और आगे चलकर उसने अमेरिका के एक स्टार्टअप में NLP (Natural Language Processing) पर काम किया और MLOps इंजीनियर और डेटा साइंटिस्ट जैसी भूमिकाएं निभाईं. 

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शुरू किया अपना काम 

जैसे-जैसे आयुष का टेक्नोलॉजी में अनुभव बढ़ता गया, वैसे-वैसे उनकी बड़ी चीजें करने की इच्छा भी बढ़ती गई. पोस्ट के अनुसार उन्होंने एंटर्न नाम की कंपनी बनाई और बाद में सेकंड ब्रेन लैब्स के सह-संस्थापक बने. पोस्ट में यह भी बताया गया है कि उन्होंने इतनी कम उम्र में इतनी उपलब्धियां हासिल कर लीं है, जो आमतौर पर लोगों को कई सालों की मेहनत के बाद मिलती है.लेकिन फिर भी उनके सामने एक और बड़ी चुनौती बाकी है. 

पहुंच से बाहर वाली मिल रही है नौकरी 

पोस्ट में कहा गया है कि आज वे पूरे भारत में सैकड़ों इंजीनियरों को एआई सिखा रहे हैं जिससे उन्हें ऐसी नौकरियां हासिल करने में मदद मिल रही है जो कभी उनके पहुंच से बाहर लगती थी. वे छात्रों को ऐसी स्किल सिखा रहे हैं, जो टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में कई अवसर खोल रही है. 

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