शिमला में 21 अक्टूबर को IIT मंडी के GUESSS सर्वे रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में हर पांच में से एक कॉलेज छात्र, यानी करीब 22 प्रतिशत छात्र, अपना कारोबार शुरू कर चुका है. यह रिपोर्ट भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान मंडी ने बेंगलुरु की रेवा यूनिवर्सिटी के साथ मिलकर जारी की है.
सर्वे में 34 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के 1,200 से ज्यादा उच्च शिक्षा संस्थानों के 25,783 छात्रों को शामिल किया गया. बुधवार को जारी बयान के मुताबिक, हर 100 में से 43 भारतीय छात्र कारोबार शुरू करना चाहते हैं, जबकि वैश्विक औसत 23 प्रतिशत है.
कॉलेज के बाद कारोबार करना चाहते हैं ज्यादा छात्र.
पढ़ाई पूरी करने के तुरंत बाद अपना बिजनेस चलाने की इच्छा रखने वाले छात्रों की हिस्सेदारी 2023 के सर्वे में 14 प्रतिशत थी, जो 2025 में बढ़कर 16.2 प्रतिशत हो गई. इसी दौरान पढ़ाई के बाद सरकारी नौकरी करने की इच्छा 12.7 प्रतिशत से घटकर 10.1 प्रतिशत रह गई. बड़ी कंपनी में नौकरी करने की इच्छा भी 31.3 प्रतिशत से घटकर 27.4 प्रतिशत हो गई.
2025 में शुरू हुए 31 प्रतिशत छात्र बिजनेस
ग्लोबल यूनिवर्सिटी एंटरप्रेन्योरियल स्पिरिट स्टूडेंट्स सर्वे, यानी GUESS, छात्र उद्यमिता पर दुनिया की सबसे बड़ी शोध परियोजनाओं में से एक है. रिपोर्ट के मुताबिक, नियमित बिक्री वाले छात्र कारोबारों में से 31 प्रतिशत अकेले 2025 में शुरू किए गए. ऐसे कारोबार शुरू करने वाले 41 प्रतिशत छात्र पहले अपना एक कारोबार बंद कर दोबारा शुरुआत कर चुके हैं. वहीं, 42 प्रतिशत छात्र दो या उससे ज्यादा कारोबार चला रहे हैं.
पाठ्यक्रम और परिसर के इनक्यूबेटर का दिख रहा असर.
रिपोर्ट का नेतृत्व करने वाले आईआईटी मंडी के प्रबंधन स्कूल में एसोसिएट प्रोफेसर और गेस इंडिया के देश प्रतिनिधि डॉक्टर पूरन सिंह ने कहा, "भारत के छात्र दुनिया के किसी भी देश के छात्रों जितने महत्वाकांक्षी हैं. कारोबार शुरू करने वाले छात्र वास्तविक व्यवसाय खड़े कर रहे हैं, जिनमें लोगों को रोजगार भी मिल रहा है."
उन्होंने कहा, "पाठ्यक्रम, खास कार्यक्रम और परिसर में बने इनक्यूबेटर साफ तौर पर काम कर रहे हैं. अब जरूरत है कि छात्रों के जीवन में ज्यादा कारोबार शुरू करने वाले लोग हों और उन्हें जल्द पहला वास्तविक कदम उठाने में मदद मिले. इसके बाद यह गिना जाए कि कितने छात्र सिर्फ स्टार्टअप बनाने की बात करने के बजाय अपनी इच्छा को काम में बदलते हैं."
जान-पहचान में कारोबारी होने से बढ़ती है शुरुआत की संभावना.
सर्वे के नतीजे बताते हैं कि छात्र कारोबार शुरू करने के लिए सबसे ज्यादा आईटी, एआई और डिजिटल क्षेत्र की योजना बनाते हैं. हालांकि, चल रहे छात्र कारोबारों में केवल करीब हर 10 में से एक कारोबार ही डिजिटल है. जिन छात्रों के रिश्तेदारों, दोस्तों, सहपाठियों या शिक्षकों में कोई कारोबार शुरू कर चुका है, उनके खुद कारोबार शुरू करने की संभावना तीन गुना ज्यादा है.
"हम छात्र उद्यमी कैसे बनाएं?" नाम की यह रिपोर्ट डॉक्टर पूरन सिंह और प्रेरक शर्मा ने लिखी है. यह सर्वे सितंबर से दिसंबर 2025 के बीच किया गया.
गेस इंडिया 2025 की राष्ट्रीय भागीदार रेवा यूनिवर्सिटी के कुलपति डॉक्टर पी श्यामा राजू ने कहा, "यूनिवर्सिटी का काम अब केवल छात्रों को नौकरी के लिए पढ़ाना नहीं है. उसका काम उन्हें कारोबार के लिए भी तैयार करना है, ताकि वे रोजगार पैदा कर सकें."
आईआईटी मंडी में प्रायोजित शोध और औद्योगिक सलाह विभाग के डीन प्रोफेसर श्याम कुमार मासकापल्ली ने कहा, "उद्यमिता का मतलब समाधान, अवसर और असर पैदा करना है."
रिपोर्ट के मुताबिक, करीब 22 प्रतिशत कॉलेज छात्र कारोबार शुरू कर चुके हैं और पढ़ाई के तुरंत बाद अपना व्यवसाय चलाने की इच्छा रखने वाले छात्रों की हिस्सेदारी बढ़ी है. साथ ही, जान-पहचान में कारोबार शुरू करने वाले लोगों की मौजूदगी छात्रों के खुद व्यवसाय शुरू करने की संभावना बढ़ाती है.
आजतक एजुकेशन डेस्क