ऑफिस में अलग-अलग उम्र के लोगों के साथ काम करना कई बार आसान नहीं होता. खासकर तब, जब आपके कलीग आपसे उम्र में 10-15 साल बड़े हों. काम करने का तरीका, बातचीत की भाषा और छोटी-छोटी बातों पर रिस्पॉन्स देने का तरीका भी पीढ़ियों के बीच डिफ्रेंस पैदा कर सकता है.
रेडिट पर एक 25 साल की महिला यूजर ने अपने इसी एक्सपीरियंस को शेयर किया है. उसने बताया कि वो अपने ऑफिस में बाकी कलीग्स से करीब 10 से 15 साल छोटी है. उसके ज्यादातर कलीग 45 साल से ज्यादा उम्र के हैं. दो साल से जॉब करने के बावजूद उसे कई बार उनसे जुड़ने और उनकी सोच को समझने में मुश्किल होती है.
रेडिट यूजर ने कहा कि उसे डर रहता है कि कहीं उसकी डेली लाइफ की कुछ आदतें बड़े कलीग्स को गलत या अनप्रोफेशनल तो नहीं लगतीं. उसके मुताबिक, जिन बातों को वो नॉर्मल मानती है, उन्हें उम्र में बड़े लोग बदतमीजी या दूसरों का ध्यान न रखने वाला व्यवहार समझ सकते हैं.
बातचीत के तरीके में अंतर
रेडिट यूजर ने एक उदाहरण देते हुए बताया कि उन्होंने पहले भी सुना है कि कुछ लोग 'यू आर वेल्कम' के बजाय 'नो प्रॉब्लम' कहना रूड मानते हैं. उन्हें लगता है कि ऐसे छोटे-छोटे जवाब भी अलग-अलग जेनरेशन्स के बीच कम्युनिकेशन के तरीके का अंतर दिखा सकते हैं. उसने ये भी कहा कि उसे कभी-कभी लगता है कि ऑफिस में जेन जी को लेकर एक खास नजरिया यानी पर्सपेक्टिव बना हुआ है. हालांकि, उन्हें खुद पर पूरा भरोसा है कि वो जानबूझकर ऐसा कोई व्यवहार नहीं करती, जिसे दूसरों के लिए अपमानजनक कहा जाए.
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क्या हर डिफ्रेंस को बदतमीजी समझना सही है?
इस पोस्ट के जरिए महिला ने अपने से ज्यादा उम्र की महिलाओं से एक्सपीरियंस शेयर करने की अपील की. वो जानना चाहती थी कि क्या ऑफिस में यंग कलीग्स की कुछ आदतें सच में दूसरों को परेशान करती हैं.
ये एक्सपीरियंस बताता है कि वर्क प्लेस पर हर गलतफहमी के पीछे बुरा इरादा होना जरूरी नहीं है. कई बार बातचीत की भाषा, काम को देखने का नजरिया और अलग-अलग जेनरेशन्स की उम्मीदें एक-दूसरे से मैच नहीं करती. ऐसे में किसी की आदत को तुरंत बदतमीजी मानने के बजाय उसके पीछे की सोच को समझना जरूरी है.
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