हर काम ऑटोमेट करना पड़ा भारी! मैनेजर ने सिखाया Gen Z को सबक

जेन जी को बार-बार एक ही काम करना पसंद नहीं आता, इसलिए वे उसे आसान बनाने के लिए ऑटोमेशन का सहारा लेते हैं. लेकिन हर काम को ऑटोमेट करना हमेशा टाइम नहीं बचाता. एक एम्प्लॉय ने ऐसा ही किया, जब एक अजीब फाइल ने उसकी पूरी ऑटोमेशन प्रोसेस बिगाड़ दी और उसे ठीक करने में जितना टाइम उसे ठीक होने में लगना चाहिए था उससे ज्यादा टाइम लग गया.

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क्या हर काम में शॉर्टकट लेना जेन जी को पड़ता है भारी? क्या हर काम में शॉर्टकट लेना जेन जी को पड़ता है भारी?

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 07 अक्टूबर 2026,
  • अपडेटेड 4:08 PM IST

जेन जी को काम जल्दी करने का तरीका मिल जाए तो वो उसे आजमाने से पीछे नहीं हटती. खासकर ऐसा काम जो बार-बार करना पड़े, एक ही तरह का काम वो भी रोज. उसे हाथ से करने के बजाय ऑटोमेट यानी किसी काम को इंसान के बजाय मशीन, सॉफ्टवेयर या तकनीक की मदद से अपने आप करवाने का आइडिया उन्हें ज्यादा पसंद आता है. लेकिन क्या हर छोटे काम को आसान बनाने की कोशिश हमेशा टाइम बचाती है? या कभी-कभी आपके लिए हानिकारक भी साबित हो सकती है. एक रेडिट यूजर ने अपना एक्सपीरीयंस शेयर करते हुए बताया कि कैसे एक छोटे से काम को ऑटोमेट करने की कोशिश में उसका ज्यादा टाइम खराब हो गया.

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रेडिट यूजर ने पोस्ट साझा कर बताया कि उसके मैनेजर का मानना है कि जेन जी एक ही बोरिंग काम दो बार नहीं कर सकती और तीसरी बार आते-आते उसे ऑटोमेट करने लगती है. यूजर आमतौर पर इस बात से सहमत नहीं था. यूजर का मानना था कि अगर कोई दोहराया जाने वाला काम बिना ज्यादा मेहनत के ऑटोमेट हो सकता है, तो ऐसा करने में बुराई ही क्या है. लेकिन एक दिन यही सोच उसके लिए परेशानी बन गई.

दस मिनट का काम बना सिर दर्द

मामला कुछ फाइलों को तैयार करने का था. आमतौर पर यूजर ऐसे काम के लिए अलग-अलग टूल इस्तेमाल करता था. किसी फाइल को बदलना हो तो ब्राउजर वाला टूल, पीडीएफ (PDF)  को अलग या जोड़ना हो तो दूसरा सॉफ्टवेयर और छोटे बदलाव के लिए कंप्यूटर का अपना टूल इस्तेमाल कर लेता था.

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इस बार उसने सोचा कि क्यों न पूरा काम एक साथ ऑटोमेट कर दिया जाए. इससे उसे बार-बार खुद काम करने की जरूरत नहीं पड़ेगी और आगे भी टाइम बचेगा. लेकिन तभी एक अजीब फाइल ने पूरा सिस्टम बिगाड़ दिया. एक फाइल सही तरीके से काम नहीं कर रही थी. अब असली काम करने के बजाय यूजर ये पता लगाने में लग गया कि ऑटोमेशन आखिर काम क्यों नहीं कर रहा. करीब 20 मिनट तक वो अपने बनाए सिस्टम को ठीक करने में लगा रहा.

मैनेजर के सामने मिला सबक

तभी उसका मैनेजर वहां से गुजरा. उसने यूजर को काम करने के बजाय ऑटोमेशन सिस्टम से स्ट्रगल करते हुए देखा और उसे समझ आ गया कि इस बार उसकी बात सही साबित हो गई है. और यूज़र ने आगे लिखा कि उसके मैनेजर के चेहरे पर सही साबित होने की खुशी साफ दिख रही है.

आखिरकार यूजर ने ऑटोमेशन का आइडिया छोड़ दिया और वही काम हाथ से कर दिया. मजेदार बात ये रही कि जो काम ऑटोमेट करने की कोशिश में 20 मिनट से ज्यादा ले गया, वो मैन्युअली कुछ ही टाइम में हो गया. इस एक्सपीरीयंस के बाद भी यूजर का मानना है कि बोरिंग और बार-बार होने वाले काम को ऑटोमेट करना गलत नहीं है. फर्क सिर्फ इतना है कि हर छोटे काम के लिए पूरा सिस्टम बनाना जरूरी नहीं.

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जेन जी के लिए यह अनुभव एक आसान सबक हो सकता है- टाइम बचाने के लिए टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करना अच्छी बात है, लेकिन कभी-कभी दस मिनट का काम सीधे कर देना ही सबसे तेज तरीका होता है.

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