आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI का यूज अब केवल ऑफिस, स्कूलों या कॉलेजों तक सीमित नहीं रह गया है. बल्कि आम दुकानों तक भी पहुंच गया है. अब रोज के कामों में भी एआई का इस्तेमाल किया जा रहा है. अपने काम को आसान बनाने के लिए इंसान ही एआई को ट्रेनिंग दे रहे हैं. दरअसल, हाल ही में एक ऐसा पोस्ट सामने आया है जिसने लोगों को अपनी नौकरी के बारे में सोचने पर मजबूर कर दिया है. एक बार्बर अपने सिर पर कैमरा लगाकर ग्राहक की शेविंग करता दिखाई दिया.
इस दौरान उसके हाथों और शरीर की गतिविधियों को रिकॉर्ड किया जा रहा था. इस वीडियो को उद्योगपति हर्ष गोयनका ने शेयर किया. इसके बाद इस बात पर चर्चा शुरू हो गई कि भविष्य में AI और रोबोट इंसानों के ऐसे काम भी सीख सकते हैं, जिन्हें अभी तक पूरी तरह मानवीय स्किल पर निर्भर माना जाता है.
काम करते हुए AI को सिखा रहे इंसान
AI को बेहतर बनाने के लिए अब कुछ लोगों को उनके रोजमर्रा के काम रिकॉर्ड करने के पैसे भी दिए जा रहे हैं. रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में कुछ कर्मचारी कैमरे की मदद से अपने काम को रिकॉर्ड कर रहे हैं. इससे AI सिस्टम को यह समझने में मदद मिलती है कि इंसान किसी हथियार को किस तरह पकड़ता है, कैसे उसे एक जगह से दूसरी जगह ले जाता है और किसी काम को पूरा करने के लिए शरीर का इस्तेमाल कैसे करता है.
एक उदाहरण में सुनीता राठौर नाम की एक महिला अपने सिर पर iPhone लगाकर रीसाइक्लिंग का काम रिकॉर्ड करती हैं. रिपोर्ट के मुताबिक, उन्हें इसके लिए करीब 150 रुपये प्रति घंटे अतिरिक्त मिलते हैं. उनके काम में कचरे से लेबल हटाना, सामान अलग करना और बोरे जमा करना शामिल है.
फैक्ट्री और वेयरहाउस के काम भी हो रहे रिकॉर्ड
यह प्रक्रिया केवल एक तरह के काम तक सीमित नहीं है. फैक्ट्री, वेयरहाउस, खेत और दूसरे जगहों पर भी कुछ लोग अपने काम की गतिविधियों को रिकॉर्ड कर रहे हैं. इसके बदले उन्हें अतिरिक्त कमाई का मौका मिल रहा है. ऐसी रिकॉर्डिंग AI और रोबोटिक्स के लिए ट्रेनिंग डेटा बन सकती है.
इससे मशीनों को वास्तविक दुनिया में इंसानों के काम करने के तरीके को समझने में मदद मिलती है. हालांकि, इसका मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि जो कर्मचारी अपना काम रिकॉर्ड कर रहे हैं, उनकी जगह मशीनें तुरंत लेने वाली हैं लेकिन इससे यह जरूर पता चलता है कि भविष्य में मानवीय काम और स्किल भी AI ट्रेनिंग के लिए महत्वपूर्ण डेटा बन सकते हैं.
घर के सामान्य काम भी AI की ट्रेनिंग का हिस्सा
AI की ट्रेनिंग के लिए अब केवल फैक्ट्री में होने वाले काम रिकॉर्ड नहीं हो रहे हैं. इसके साथ ही रिपोर्ट के मुताबिक, फल काटने और फूलों की माला बनाने जैसे सामान्य घरेलू काम भी कैमरे में रिकॉर्ड कर रहे हैं. ऐसे काम रिकॉर्ड करने के लिए कुछ लोगों को करीब 250 रुपये प्रति घंटे तक मिलने की बात सामने आई है. हेड-माउंटेड कैमरे से बनाई गई वीडियो में मशीन को यह समझने में मदद मिलती है कि काम करते समय इंसान क्या देख रहा है.
फैक्ट्री कर्मचारियों के वीडियो से भी उठे सवाल
यह विवाद यहीं पर खत्म नहीं होता है बल्कि कुछ समय पहले भारतीय फैक्ट्री कर्मचारियों के सिर पर कैमरे लगाकर काम करने के वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हुए थे. इन वीडियो के बाद ऐसी चर्चा शुरू हुई कि क्या इन कर्मचारियों के काम को AI की ट्रेनिंग के लिए रिकॉर्ड किया जा रहा है. हालांकि, उन वीडियो को क्यों रिकॉर्ड किया जा रहा था, इसके पीछे कोई साफ उद्देश्य नहीं मालूम चल पाया है.
बार्बर का उदाहरण क्यों है खास?
बार्बर का काम इस चर्चा को और दिलचस्प बनाता है. आमतौर पर ऑटोमेशन की बात फैक्ट्री या कंप्यूटर से जुड़े कामों के संदर्भ में होती है. लेकिन बाल काटने या शेविंग जैसे काम में हाथों की गति, स्पर्श और अनुभव काफी महत्वपूर्ण होते हैं. अगर इन गतिविधियों को कैमरे और सेंसर के जरिए रिकॉर्ड करके AI को सिखाया जाता है, तो भविष्य में रोबोट ऐसे जटिल शारीरिक काम करने में बेहतर हो सकते हैं.
हालांकि, एक बार्बर का काम रिकॉर्ड किए जाने को इस बात का प्रमाण नहीं माना जा सकता कि बार्बर की नौकरी जल्द खत्म होने वाली है. यह केवल इस बात का उदाहरण है कि AI और रोबोटिक्स की ट्रेनिंग के लिए इंसानी गतिविधियों का इस्तेमाल किस तरह बढ़ रहा है.
इंसानों के लिए कमाई का मौका या भविष्य की चुनौती?
AI ट्रेनिंग के लिए अपना काम रिकॉर्ड करने वाले लोगों को फिलहाल इससे अतिरिक्त कमाई हो रही है. वहीं, कंपनियों और AI डेवलपर्स को वास्तविक दुनिया के काम करने के तरीके का डेटा मिल रहा है. लेकिन जैसे-जैसे AI और रोबोट इंसानों के शारीरिक काम को बेहतर तरीके से समझने लगेंगे, भविष्य में नौकरी के मौकों पर इसका असर दिखाई देगा. यह इस बात पर निर्भर करेगा कि तकनीक कितनी आगे बढ़ती है और कंपनियां उसका इस्तेमाल किस तरह करती हैं.
आजतक एजुकेशन डेस्क