क्या आपने कभी 4.5 लाख के इंटर्नशिप के बारे में सुना है. अगर नहीं तो, इरफान मोहम्मद के लिए यह सपने को साकार करने जैसा है. दरअसल, इसकी शुरुआत हिमाचल प्रदेश के बीर बिलिंग के एक हॉस्टल में हुई अचानक बातचीत से हुई. एनआईटी जालंधर के बीटेक छात्र इरफान अभी रेवोल्यूट के दुबई ऑफिस में आईओएस डेवलपर के तौर पर इंटर्नशिप कर रहे हैं. इससे पहले उन्हें बाली की एप्पल डेवलपर अकादमी में प्रवेश मिला था और उन्होंने दुबई इस्लामिक बैंक में भी इंटर्नशिप की थी. मई 2026 में दिए एक पॉडकास्ट में, इरफान ने विस्तार से बताया कि रिवोल्यूट का अवसर कैसे सामने आया. तो चलिए जानते हैं उनकी कहानी.
घूमने के लिए गए थे...
उन्होंने बताया कि वह दीवाली की छुट्टियों में अकेले हिमाचल प्रदेश घूमने गए थे. बीर बिलिंग के एक हॉस्टल में उनकी मुलाकात इशिका नाम की लड़की से हुई, जो खुद भी वहां घूमने के लिए आई थी, जो संयोग से रेवोल्यूट में काम करती थी. इरफान को रेवोल्यूट के बारे में पहले से पता था क्योंकि वह पहले से ही विदेशों में रिमोट जॉब के मौके तलाश रहे थे. इसलिए उन्होंने बिना झिझक इशिका से रेफरल मांग लिया.
मई 2026 में वैभव कांडा के साथ एक पॉडकास्ट में उन्होंने बताया कि मैंने मजाक में उनसे पूछा कि ‘हे शिखा, क्या आपको लगता है कि मुझे किसी का रेफरल मिल सकता है? और उसने कहा, क्यों नहीं? लेकिन बात यहीं पर खत्म नहीं हुई... इसके बाद कहानी में एक और मोड़ आया. सफर खत्म होने के तुरंत बाद ही इशिका ने रेवोल्यूट छोड़ दिया. लेकिन उन्होंने कंपनी में अपने एक दोस्त से इरफान को रेफर करने का अनुरोध किया, जिससे उनके लिए नौकरी का रास्ता खुल गया. उनके रिफरल की वजह से उन्हें भर्ती प्रक्रिया में शामिल किया गया.
नहीं मिली नौकरी
लेकिन कहानी का अंजाम यह नहीं था कि उन्हें आसानी से नौकरी मिल गई बल्कि इसका उल्टा ही हुआ, उन्हें नौकरी पाने के लिए कड़ी मेहनत करनी पड़ी. वह साफ कहते हैं कि रेफरल से नौकरी मिलना कोई शॉर्टकट नहीं है. रेवोल्यूट में रेफरल के कारण उन्हें शुरुआती सीवी स्क्रीनिंग पास करने और ऑनलाइन असेसमेंट का लिंक में मदद मिली. इसके बाद चयन के सभी चरण उन्हें खुद ही पास करने पड़े.
उनकी पहली बड़ी चुनौती हैकररैंक टेस्ट था
पॉडकास्ट में उन्होंने बताया कि मैंने कभी डीएसए (डेटा स्ट्रक्चर और एल्गोरिदम) पर काम नहीं किया है यानी उन्होंने वह गहरी डीएसए तैयारी नहीं की थी, जो कई इंजीनियरिंग छात्र करते हैं. इसके बजाय उन्होंने SwiftUI, iOS डेवलपमेंट और खुद ऐप बनाने और उन्हें लॉन्च करने पर ज्यादा ध्यान दिया था. हैकररैंक टेस्ट में SQL और Python पर आधारित डेटा स्ट्रक्चर के सवाल थे. अपने पहले से मौजूद प्रोग्रामिंग नॉलेज की वजह से इरफान इस सवालों को आसानी से सॉल्व कर लिया.
तीन दिन का गहन और तैयारी
इरफान को अपनी स्क्रीन शेयर करके Xcode में लाइव कोडिंग करनी थी. उनके AI कोडिंग टूल बंद थे इसलिए उन्हें अपनी तकनीकी समझ खुद दिखानी थी. नौकरी पाने की दौड़ में उनका अगला चरण स्पेन में मौजूद रेवोल्यूट यह नहीं देख रहा था कि वह कोडिंग की परेशानियों को सॉल्व कर सकते हैं या नहीं बल्कि यह भी देख रहा था कि उन्हें के एक वरिष्ठ आईओएस डेवलपर के तौर पर कैसे काम कर रहे थे. जल्द ही उन्हें समझ आ गया कि रेवोल्यूट सिर्फ यह नहीं देख रहा था कि वह कोडिंग की समस्याएं हल कर सकते हैं या नहीं बल्कि यह भी देख रहा था कि उन्हें Swift और SwiftUI की कितनी अच्छी समझ है.
इंटरव्यू आसान नहीं था. इरफान ने माना कि मुझे पूछे गए सभी सवालों के जवाब नहीं पता थे. लेकिन स्क्रीनिंग और तकनीकी इंटरव्यू के बीच उन्होंने करीब तीन दिन तक Swift की किताब को गहराई से पढ़कर तैयारी की. इस तैयारी का उन्हें फायदा भी मिला. उन्होंने टेक्निकल राउंड पास कर लिया और इसके बाद HR राउंड में पहुंच गए.
आसान नहीं था HR राउंड भी पास करना
HR इंटरव्यू की भी पूरी तैयारी टेक्निकल इंटरव्यू पास करने के बाद भी इरफान ने यह नहीं माना कि नौकरी पक्की हो गई है. उन्होंने पहले के उम्मीदवारों के अनुभवों के बारे में रिसर्च की, पूर्व इंटर्न से बात की और STAR पद्धति से जुड़े सवालों के जवाब भी तैयार किए. STAR का मतलब Situation, Task, Action और रिजल्ट है. इसका इस्तेमाल व्यवहार से जुड़े इंटरव्यू सवालों के स्पष्ट और छोटे जवाब देने के लिए किया जाता है.
उन्होंने किसी विवाद को संभालने, परेशानियों को हल करने और अपनी पिछली इंटर्नशिप से जुड़े अनुभवों पर आधारित सवालों की भी प्रैक्टिस की.
उन्होंने आगे पॉडकास्ट में बताया कि तैयारी से बहुत मदद मिलती है. इसके बाद वह मेल आया जिसका उन्हें इंतजार था, उनका ऑफर लेटर. उनके मुताबिक, इंटरव्यू प्रक्रिया के दौरान जिस मुआवजे पर चर्चा हुई थी, वह लगभग 4.2 लाख रुपये प्रति माह था.
असली ताकत केवल कोडिंग नहीं
इरफान का मानना है कि उनकी तकनीकी क्षमता उनकी सफलता का केवल एक हिस्सा था. उन्होंने कई iOS ऐप बनाए, ग्राहकों के साथ काम किया, दुबई इस्लामिक बैंक में इंटर्नशिप की और SwiftUI में अपनी स्किल मजबूत की. उनके पास NIT जालंधर की डिग्री, सार्वजनिक रूप से बोलने का अनुभव और प्रिंसेस डायना अवॉर्ड भी था. लेकिन वह बार-बार एक और अहम स्किल पर जोर देते हैं वह है कम्युनिकेशन. उन्होंने बाततीच के दौरान आगे बतया कि आप दुनिया के सबसे बुद्धिमान व्यक्ति हो सकते हैं, लेकिन अगर आप अपनी बात खुलकर नहीं कह सकते और बहुत विनम्र तरीके से अपनी बात नहीं रख सकते, तो लोग शायद आपकी असली काबिलियत को समझ नहीं पाएंगे.
आजतक एजुकेशन डेस्क