अगर आप भी एलएलबी के छात्र हैं या लॉ में करियर बनाना चाहते हैं, तो यह स्पेशल रिपोर्ट आपके लिए है. आइए जानते हैं देश और विदेश में कमाई के वो कौन से एरिया हैं, जहां आप शानदार करियर बना सकते हैं.
भारत के भीतर एलएलबी (3 वर्षीय या 5 वर्षीय इंटीग्रेटेड कोर्स) करने के बाद आपके पास प्राइवेट और सरकारी दोनों सेक्टर्स में बेहतरीन मौके होते हैं. बड़ी कंपनियों (MNCs), टेक फर्म्स या बैंक के इन-हाउस लीगल डिपार्टमेंट में काम करना. इसमें कंपनियों के कॉन्ट्रैक्ट्स, मर्जर और एक्विजिशन (M&A) और टैक्स से जुड़े कानूनी मामले देखने होते हैं. यहांशुरुआती पैकेज ₹4 लाख से ₹10 लाख सालाना होता है.
ज्यूडिशियल सर्विसेज (Judiciary - जज)
काम: राज्यों द्वारा आयोजित होने वाली सिविल जज (Junior Division) परीक्षा पास करके मजिस्ट्रेट या जज बनना.
चयन प्रक्रिया: इसके लिए राज्य लोक सेवा आयोग परीक्षा (प्रारंभिक, मुख्य और इंटरव्यू) कराता है. यह देश के सबसे प्रतिष्ठित और सुरक्षित सरकारी पदों में से एक है.
लीगल कंसलटेंट/एडवाइजर (Legal Advisor)
काम: सरकारी विभागों, गैर-सरकारी संगठनों (NGOs) या स्टार्टअप्स को कानूनी सलाह देना ताकि वे किसी भी कानूनी पचड़े से बच सकें. यहां अनुभव के आधार पर ₹5 लाख से ₹8 लाख सालाना कमाई हो सकती है.
लीगल जर्नलिज्म (Legal Journalism)
काम: यदि आपके पास लॉ की डिग्री है और लिखने का शौक है, तो आप लॉ वेबसाइट्स के अलावा मुख्यधारा के मीडिया हाउस में लीगल रिपोर्टर के रूप में कोर्ट के फैसलों और कानूनों को आसान भाषा में जनता तक पहुंचा सकते हैं.
विदेश में कैसे मिलेगी नौकरी?
भारतीय लॉ ग्रेजुएट्स के लिए विदेश में नौकरी पाना अब पहले से कहीं ज्यादा आसान हो गया है, क्योंकि भारत की तरह यूके (UK), अमेरिका (US), कनाडा और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों में भी कॉमन लॉ सिस्टम (Common Law System) का पालन किया जाता है. विदेश जाने के मुख्य रास्ते ये हैं:
1. यूके (UK) में सॉलिसिटर बनने का रास्ता: SQE एग्जाम
ब्रिटेन ने अपनी चयन प्रक्रिया को बेहद आसान कर दिया है. अब भारतीय एलएलबी ग्रेजुएट्स बिना किसी अतिरिक्त विदेशी डिग्री के सीधे SQE (Solicitors Qualifying Examination) दे सकते हैं.
इसके बाद Solicitors Regulation Authority (SRA) से कैरेक्टर सर्टिफिकेट लेकर आप SQE परीक्षा के दो चरण पास कर सकते हैं. इसके बाद 2 साल का वर्क एक्सपीरियंस लेकर आप यूके में सॉलिसिटर के रूप में प्रैक्टिस कर सकते हैं. बता दें कि यूके की लॉ फर्म्स में नए सॉलिसिटर की शुरुआती सैलरी लाखों में होती है.
अमेरिका (US) में करियर: LLM और बार एग्जाम
अमेरिका में सीधे भारतीय डिग्री से वकालत नहीं की जा सकती, लेकिन इसका एक निश्चित शॉर्टकट है. भारतीय एलएलबी के बाद आप अमेरिका की किसी मान्यता प्राप्त यूनिवर्सिटी से 1 साल का एलएलएम (LLM - मास्टर ऑफ लॉ) करें. इसके बाद आप न्यूयॉर्क (New York) या कैलिफोर्निया (California) जैसे राज्यों के 'बार एग्जाम' में बैठने के पात्र हो जाते हैं. बार एग्जाम क्लियर करते ही आपको वहां लाइसेंस मिल जाता है.
कनाडा का रास्ता: NCA एग्जाम
कनाडा में प्रैक्टिस करने के लिए भारतीय लॉ डिग्री को मान्यता दी जाती है, लेकिन इसके लिए यहां उम्मीदवारों को NCA (National Committee on Accreditation) परीक्षा पास करनी होती है, जो यह तय करती है कि आपकी भारतीय डिग्री कनाडाई लीगल सिस्टम के कितनी समकक्ष है.
इंटरनेशनल आर्बिट्रेशन
यदि आप विदेश में बिना किसी देश का बार एग्जाम दिए काम करना चाहते हैं, तो 'अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता' सबसे बेस्ट फील्ड है. बड़ी बहुराष्ट्रीय कंपनियों के बीच होने वाले सीमा-पार विवादों को सुलझाने के लिए वैश्विक स्तर पर भारतीय वकीलों को हायर किया जाता है. इसके लिए इंटरनेशनल ट्रेड लॉ या कॉर्पोरेट लॉ में विशेषज्ञता जरूरी है.
प्रोफाइल को ग्लोबल कैसे बनाएं?
यदि आपका सपना विदेश में करियर बनाने का है, तो एलएलबी के दौरान ही इन बातों पर काम शुरू कर दें:
इंटरनेशनल मूट कोर्ट (Moot Court): कॉलेज के दिनों में जेसप (Jessup) या विस मूट (Vis Moot) जैसी अंतरराष्ट्रीय मूट प्रतियोगिताओं में हिस्सा लें. इससे वैश्विक स्तर पर नेटवर्किंग मजबूत होती है.
लीगल टेक और एआई (Legal Tech & AI): बदलते दौर में एआई-संचालित कॉन्ट्रैक्ट एनालिसिस और डेटा प्राइवेसी लॉ की समझ रखने वाले वकीलों की मांग विदेशों में सबसे ज्यादा है.
भाषा पर पकड़: अंग्रेजी के साथ-साथ यदि आप फ्रेंच, जर्मन या स्पैनिश जैसी भाषाएं सीखते हैं, तो यूरोपीय देशों में जॉब के चांस 50% तक बढ़ जाते हैं.