चीन का डर... ट्रंप अपने नाम पर बनवा रहे बैटलशिप, महंगे युद्धपोत और भारी खर्च पर छिड़ी बहस

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने घोषणा की है कि चीन को रोकने के लिए नई ट्रंप-क्लास बैटलशिप बनाई जाएगी. 3 जहाजों की लागत 43 अरब डॉलर बताई गई है. ये युद्धपोत हाइपरसोनिक मिसाइल, रेलगन और लेजर हथियारों से लैस होंगे.

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ट्रंप क्लास बैटलशिप की तस्वीर के साथ अमेरिकी राष्ट्रपित डोनाल्ड ट्रंप. (File Photo: AP) ट्रंप क्लास बैटलशिप की तस्वीर के साथ अमेरिकी राष्ट्रपित डोनाल्ड ट्रंप. (File Photo: AP)

ऋचीक मिश्रा

  • नई दिल्ली,
  • 30 अप्रैल 2026,
  • अपडेटेड 5:52 PM IST

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दिसंबर 2025 में ट्रंप-क्लास बैटलशिप की घोषणा की थी. इसे उन्होंने चीन की बढ़ती नौसेना शक्ति का मुकाबला करने के लिए 'गोल्डन फ्लीट' का हिस्सा बताया. ये विशाल युद्धपोत अमेरिकी नौसेना की ताकत को नई ऊंचाई देने का दावा कर रहे हैं, लेकिन इनकी भारी कीमत को लेकर अब तीखी बहस छिड़ गई है.

तीन ट्रंप-क्लास बैटलशिप की कुल अनुमानित लागत 43 अरब डॉलर (लगभग 3.6 लाख करोड़ रुपये) बताई जा रही है. सिर्फ पहले वॉरशिप USS Defiant के लिए 2028 में 17 अरब डॉलर की फंडिंग मांगी गई है. इतनी बड़ी राशि खर्च करने को लेकर अमेरिकी कांग्रेस, रक्षा विशेषज्ञों और कुछ नौसेना अधिकारियों में गहरी असहमति है.

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ट्रंप-क्लास बैटलशिप की खासियतें

ट्रंप-क्लास बैटलशिप सामान्य डिस्ट्रॉयर से तीन गुना बड़ा युद्धपोत है. इसका वजन लगभग 35,000 टन है. इनमें अत्याधुनिक हथियार लगाए गए हैं, जिनमें शामिल हैं... 

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ये जहाज मुख्य रूप से अमेरिकी एयरक्राफ्ट कैरियर ग्रुप्स का कमांड सेंटर बनकर काम करेंगे. रीयर एडमिरल बेन रेनॉल्ड्स ने कहा कि ये अलग-अलग आकार के जहाजों के समझौतों से बचाने के लिए जरूरी हैं. इनकी क्षमता इतनी ज्यादा है कि ये एक साथ कई खतरे से निपट सकते हैं.

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चीन के बढ़ते खतरे के खिलाफ तैयारियां

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इन बैटलशिप को चीन की तेजी से बढ़ रही नौसेना शक्ति के जवाब में पेश किया है. चीन अपनी नौसेना को तेज गति से आधुनिक बना रहा है. प्रशांत महासागर में अपना दबदबा बढ़ा रहा है. ट्रंप का मानना है कि अमेरिका को भी विशाल और शक्तिशाली जहाजों की जरूरत है ताकि वह चीन को रोके रख सके.

हालांकि कई विशेषज्ञ और पूर्व नौसेना अधिकारी इन बैटलशिप की आलोचना कर रहे हैं. उनका कहना है कि इतने बड़े और महंगे जहाज आज के युद्ध में बहुत आसानी से निशाना बन सकते हैं. ड्रोन, हाइपरसोनिक मिसाइलें और एंटी-शिप मिसाइलों के जमाने में इतना बड़ा टारगेट बनाना खतरनाक हो सकता है. 

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आलोचक यह भी कह रहे हैं कि अमेरिकी शिपयार्ड्स (जहाज बनाने के कारखाने) पहले से ही दबाव में हैं. इतने बड़े प्रोजेक्ट से शिपयार्ड्स पर और बोझ बढ़ेगा, जिससे अन्य जरूरी जहाजों का निर्माण प्रभावित हो सकता है. 

पूर्व नौसेना सचिव जॉन फेलन को हाल ही में हटा दिया गया था. उनकी बर्खास्तगी भी ट्रंप-क्लास बैटलशिप से जुड़े फैसलों और नौसेना की रणनीति को लेकर माने जा रहे मतभेदों से जुड़ी बताई जा रही है.

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आगे क्या होगा?

ट्रंप प्रशासन इन बैटलशिप को अमेरिकी नौसेना की रीढ़ बनाने का दावा कर रहा है, जबकि विरोधी पक्ष कह रहा है कि इतना पैसा छोटे, तेज, चुपके से चलने वाले और ज्यादा संख्या में जहाजों पर लगाया जाना चाहिए. अभी यह स्पष्ट नहीं है कि अमेरिकी कांग्रेस इन जहाजों के लिए 43 अरब डॉलर की मंजूरी देगी या नहीं. इस प्रोजेक्ट पर अंतिम फैसला आने वाले महीनों में होना है.

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ट्रंप-क्लास बैटलशिप अमेरिकी नौसेना के भविष्य की दिशा तय करने वाला बड़ा फैसला है. एक तरफ जहां यह चीन के खिलाफ मजबूत जवाबी रणनीति का प्रतीक है. वहीं दूसरी तरफ इसकी भारी लागत, संभावित कमजोरियां और शिपयार्ड क्षमता को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं. 

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