'लंबी लड़ाई की तैयारी में था भारत...', राजनाथ सिंह ने खोला ऑपरेशन सिंदूर पर सबसे बड़ा राज

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर सिर्फ 72 घंटे में पूरा हुआ, लेकिन भारत लंबी लड़ाई की पूरी तैयारी के साथ गया था. उन्होंने इसे नई विश्व व्यवस्था का प्रतीक बताया. पाकिस्तान पर आतंकवाद समर्थन का आरोप लगाया. तीनों सेनाओं की संयुक्त कार्रवाई और स्वदेशी हथियारों की सफलता पर जोर दिया.

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एक साल पहले पहलगाम अटैक के बाद ऑपरेशन सिंदूर चलाया गया था. (Photo: ITG) एक साल पहले पहलगाम अटैक के बाद ऑपरेशन सिंदूर चलाया गया था. (Photo: ITG)

शिवानी शर्मा

  • नई दिल्ली,
  • 30 अप्रैल 2026,
  • अपडेटेड 12:01 PM IST

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने ऑपरेशन सिंदूर को इस नई विश्व व्यवस्था का प्रतीक बताया. यह ऑपरेशन लगभग एक साल पहले पहलगाम आतंकी हमले के बाद शुरू किया गया था. 22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े आतंकियों ने 26 निर्दोष पर्यटकों की हत्या कर दी थी. 

इस हमले के बाद भारत ने पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) में आतंकी ठिकानों पर ऑपरेशन सिंदूर चलाया. रक्षा मंत्री ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार की नीति साफ है - किसी भी हालत में आतंकवादी गतिविधि बर्दाश्त नहीं की जाएगी. 

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भारत ने पहले सर्जिकल स्ट्राइक, एयर स्ट्राइक और अब ऑपरेशन सिंदूर के जरिए आतंकवाद के खिलाफ अपना रुख साबित किया है. उन्होंने कहा कि ऑपरेशन सिर्फ 72 घंटे में पूरा कर लिया गया, लेकिन इसके पीछे लंबी तैयारी थी. अगर जरूरत पड़ती तो भारत लंबी लड़ाई के लिए भी पूरी तरह तैयार था.

आज की दुनिया तेजी से बदल रही है. कई बड़े देश अपनी ताकत बढ़ा रहे हैं. राष्ट्रीय हितों को पहले से ज्यादा जोर-शोर से सामने रख रहे हैं. पुराना नियम-आधारित अंतरराष्ट्रीय सिस्टम अब सवालों के घेरे में है. संयुक्त राष्ट्र जैसी अंतरराष्ट्रीय संस्थाएं कमजोर पड़ रही हैं. 

प्रौद्योगिकी, सप्लाई चेन और डिजिटल टूल्स को भी हथियार के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है. ऐसे में भारत को इस नई दुनिया में और ज्यादा सतर्कता के साथ आगे बढ़ना चाहिए. उन्होंने कहा कि भारत को अपनी सुरक्षा और विकास की रणनीति को नई परिस्थितियों के अनुसार ढालना होगा.

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आतंकवाद के तीन आयाम और उसकी जड़ें

राजनाथ सिंह ने आतंकवाद को मानवता पर एक काला धब्बा बताया. उन्होंने कहा कि आतंकवाद सिर्फ एक विकृत मानसिकता है. यह सुरक्षा का मुद्दा ही नहीं, बल्कि मानव मूल्यों की रक्षा की लड़ाई है. आतंकवाद को अक्सर धर्म या किसी हिंसक विचारधारा के नाम पर जायज ठहराने की कोशिश की जाती है, जो दरअसल आतंकियों को कवर फायर देना है.

रक्षा मंत्री ने जोर दिया कि आतंकवाद सिर्फ राष्ट्र-विरोधी कृत्य नहीं है, बल्कि इसके तीन आयाम हैं - ऑपरेशनल (संचालन संबंधी), आइडियोलॉजिकल (वैचारिक) और पॉलिटिकल (राजनीतिक). आतंकवाद की असली ताकत उसकी वैचारिक और राजनीतिक जड़ों में है. उन्होंने इसे रावण की नाभि से जोड़कर समझाया कि जब तक इस नाभि यानी वैचारिक और राजनीतिक संरक्षण को नहीं सुखाया जाएगा, आतंकवाद पूरी तरह खत्म नहीं होगा. इसलिए आतंकवाद को सिर्फ सैन्य स्तर पर नहीं, बल्कि सभी तीन आयामों में लड़ना जरूरी है.

पाकिस्तान पर सीधा हमला

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने पाकिस्तान पर सीधा आरोप लगाया कि वह लगातार आतंकवाद को समर्थन देता रहा है. उन्होंने कहा कि भारत और पाकिस्तान आजादी के समय एक साथ स्वतंत्र हुए, लेकिन आज भारत सूचना प्रौद्योगिकी (IT) के लिए जाना जाता है, जबकि पाकिस्तान इंटरनेशनल टेररिज्म (International Terrorism) का केंद्र बन गया है.

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उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत आतंकवाद और उसके प्रायोजकों (स्पॉन्सर्स) में कोई फर्क नहीं करता. पीएम मोदी की नीति के तहत आतंकवाद के खिलाफ जीरो टॉलरेंस का रवैया अपनाया गया है. ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत को परमाणु हमले की धमकियां भी मिलीं, लेकिन भारत उनमें नहीं फंसा और राष्ट्रहित में जो जरूरी था, वह किया.

तीनों सेनाओं की संयुक्त ताकत का प्रदर्शन

ऑपरेशन सिंदूर भारत की सैन्य शक्ति के नए रूप का उदाहरण बना. इसमें थल सेना, नौसेना और वायु सेना ने एक साथ, एक योजना के तहत काम किया. रक्षा मंत्री ने कहा कि अब भारत की सैन्य शक्ति साइलो में नहीं चलती, बल्कि संयुक्त और एकीकृत रूप में उभरी है. यह एक वैश्विक शक्ति के रूप में भारत की छवि को मजबूत करता है.

भारत ने ऑपरेशन अपनी शर्तों और अपने समय पर शुरू किया और अपनी शर्तों पर ही समाप्त किया. सिर्फ उन्हीं ठिकानों को निशाना बनाया गया जो हमले के जिम्मेदार थे. ऑपरेशन इसलिए नहीं रोका गया क्योंकि क्षमता कम थी, बल्कि भारत ने अपनी मर्जी से रोका. जरूरत पड़ने पर ज्यादा कुछ भी किया जा सकता था.

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स्वदेशी हथियारों की बढ़ती विश्वसनीयता

ऑपरेशन सिंदूर में ब्रह्मोस मिसाइल सिस्टम से लेकर निगरानी प्लेटफॉर्म तक में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का खूब इस्तेमाल हुआ. इससे भारत की सटीकता और घातक क्षमता काफी बढ़ गई. रक्षा मंत्री ने बताया कि ऑपरेशन के बाद स्वदेशी हथियारों और रक्षा उपकरणों की विश्वसनीयता दुनिया भर में बढ़ी है.

अब कई देश भारत से हथियार और रक्षा सामग्री खरीदने में रुचि दिखा रहे हैं. उन्होंने कहा कि भारत का मिलिट्री-इंडस्ट्रियल कॉम्प्लेक्स अब शांति काल के साथ युद्ध के समय में भी तेज सप्लाई देने के लिए तैयार है. सर्ज कैपेसिटी और स्टोरेज कैपेसिटी मजबूत हुई है. इससे भारत की डिटरेंस बढ़ी है.

भविष्य की तैयारी: AI और टेक्नोलॉजी

रक्षा मंत्री ने भविष्य की चुनौतियों का जिक्र करते हुए कहा कि भारत कंप्यूटिंग इंफ्रास्ट्रक्चर बढ़ा रहा है. GPU क्षमता बना रहा है. फ्यूचर स्किल्स प्रोग्राम चला रहा है. AI को 'Augmented Infantry' यानी बढ़ी हुई पैदल सेना के रूप में देखा जा रहा है. सेना ने AI, मशीन लर्निंग और बिग डेटा का इस्तेमाल करके अपनी क्षमताएं मजबूत करने का रोडमैप तैयार किया है. इससे देश न सिर्फ ज्यादा सुरक्षित बनेगा, बल्कि शक्तिशाली और समृद्ध भी होगा.

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के इन बयानों से साफ है कि नया भारत आतंकवाद और उसके समर्थकों के खिलाफ बिना किसी समझौते के खड़ा है. ऑपरेशन सिंदूर ने न सिर्फ आतंकियों को सबक सिखाया, बल्कि दुनिया को भारत की सैन्य तैयारी, संयुक्त ताकत और स्वदेशी क्षमता का संदेश भी दिया. बदलते विश्व में भारत अपनी सुरक्षा और मूल्यों की रक्षा के लिए पूरी तरह सजग और तैयार है.

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नई विश्व व्यवस्था या अधिक व्यवस्थित दुनिया?

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने हाल ही में किर्गिस्तान में शंघाई सहयोग संगठन (SCO) के रक्षा मंत्रियों की बैठक में भी अपने विचार रखे. उन्होंने पूछा कि क्या हमें एक 'नई विश्व व्यवस्था' की जरूरत है या फिर एक नई दुनिया जो ज्यादा व्यवस्थित हो? उन्होंने कहा कि इस बदलते समय में हमें ऐसा सिस्टम बनाना चाहिए जहां हर व्यक्ति को सम्मान और गरिमा मिले. जहां छोटे-छोटे मतभेद झगड़ों में न बदलें और झगड़े कभी भी तबाही का कारण न बनें.

राजनाथ सिंह ने जोर दिया कि आज की सबसे बड़ी चुनौती किसी व्यवस्था की कमी नहीं है, बल्कि पुराने नियमों और सिद्धांतों पर सवाल उठाने की प्रवृत्ति है. हमें संवाद, सहयोग और करुणा पर आधारित सह-अस्तित्व की दिशा में बढ़ना चाहिए, न कि संघर्ष और अराजकता की ओर. उन्होंने कहा कि भारत इस नई दुनिया की जरूरतों को समझ रहा है. खुद को उसके विभिन्न पहलुओं के अनुसार ढाल रहा है.

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