ताइवान अपनी सेना को आधुनिक बनाने के लिए नई तकनीक अपना रहा है. चीन के बढ़ते खतरे के बीच ताइवान अब रोबोट कुत्तों को तैनात करने की तैयारी कर रहा है. ये रोबोट कुत्ते दक्षिण चीन सागर के विवादित द्वीपों पर गश्त, निगरानी और सुरक्षा के काम में इस्तेमाल किए जा सकते हैं. ताइवान की सेना के शीर्ष हथियार संस्थान ने हाल ही में तीन अलग-अलग रोबोट डॉग्स का प्रदर्शन किया है.
रोबोट पेट्रोल डॉग चार पैरों वाले रोबोट हैं जो असली कुत्तों की तरह चल-फिर सकते हैं. ये अमेरिकी कंपनी घोस्ट रोबोटिक्स द्वारा बनाए गए हैं, जो अमेरिकी सेना की प्रमुख आपूर्तिकर्ता है. ताइवान के नेशनल चुंग-शान इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी (NCSIST) ने इन रोबोटों पर अपनी स्वदेशी तकनीक लगाई है.
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ये तीन वर्जन में तैयार किए गए हैं - टोही, निगरानी और फायरपावर वर्जन. फायरपावर वाला रोबोट गन भी ले जा सकता है. ये रोबोट ऊबड़-खाबड़ इलाकों, रेतीले समुद्र तटों और द्वीपों पर आसानी से चल सकते हैं जहां सामान्य वाहन नहीं पहुंच पाते. इनमें कैमरे, सेंसर और संचार उपकरण लगे हैं जो रियल टाइम में जानकारी भेजते हैं.
ताइवान क्यों चाहता है रोबोट डॉग?
ताइवान चीन को अपना हिस्सा मानता है. लगातार ताइवान पर दबाव बनाए हुए है. ताइवान की सेना को आधुनिक बनाने और चीन को रोकने के लिए ड्रोन, मिसाइल और अब रोबोट कुत्तों पर जोर दिया जा रहा है.
NCSIST के मिसाइल और रॉकेट सिस्टम रिसर्च डिवीजन के डिप्टी हेड जेन कुओ-क्वांग ने कहा कि मरीन्स और कोस्ट गार्ड को समुद्र तटों, बीच और द्वीपों पर गश्त के लिए ऐसे उपकरणों की बहुत जरूरत है. खासकर नान्शा (स्प्राटली) और डोंग्शा (प्रतास) द्वीप समूहों में ये रोबोट बहुत उपयोगी साबित हो सकते हैं.
ये द्वीप दक्षिण चीन सागर के उत्तर में रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण हैं. वहां आबादी नहीं है, सिर्फ कोस्ट गार्ड तैनात है. ताइवान के पास स्प्राटली में इतु आबा नाम का एक द्वीप है. पूरे प्रतास द्वीप समूह पर उसका नियंत्रण है.
चीन का बढ़ता खतरा
चीन ताइवान और दक्षिण चीन सागर के ज्यादातर हिस्से पर दावा करता है. हाल के वर्षों में चीन की कोस्ट गार्ड जहाज और ड्रोन प्रतास द्वीपों के पास बढ़ गई हैं. ताइवान ने चीन की इन गतिविधियों की शिकायत की है. ऐसे में रोबोट डॉग ताइवान को बिना सैनिकों के जान जोखिम में डाले निरंतर निगरानी करने में मदद करेंगे.
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रोबोट कुत्ते 24 घंटे काम कर सकते हैं. थकते नहीं हैं. खतरनाक इलाकों में भी भेजे जा सकते हैं. अगर जरूरत पड़ी तो फायरपावर वाला वर्जन दुश्मन को चेतावनी देने या जवाबी कार्रवाई में भी इस्तेमाल हो सकता है.
ताइवान की आधुनिक रक्षा रणनीति
ताइवान पिछले कई वर्षों से अपनी सेना को मजबूत कर रहा है. ड्रोन टेक्नोलॉजी पर खास ध्यान दिया जा रहा है. अब रोबोट डॉग्स इस आधुनिकीकरण का नया कदम हैं. ताइवान की रक्षा रणनीति पोर्क्यूपाइन स्ट्रैटेजी पर आधारित है - यानी छोटे-छोटे लेकिन घातक हथियारों से बड़े दुश्मन को रोकना.
रोबोट डॉग्स इस रणनीति में फिट बैठते हैं क्योंकि ये सस्ते, आसानी से तैनात किए जा सकने वाले और कम जोखिम वाले हैं. हालांकि अभी ताइवान ने इनकी औपचारिक खरीदारी का ऑर्डर नहीं दिया है, लेकिन सेना की जरूरत साफ जताई जा चुकी है.
रोबोट डॉग्स के फायदे
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रोबोट डॉग्स अभी पूरी तरह परिपक्व नहीं हैं. इनकी बैटरी लाइफ, मौसम प्रतिरोधक क्षमता (खासकर समुद्री नम हवा) और साइबर हमलों से सुरक्षा बड़ी चुनौतियां हैं. चीन के पास भी एडवांस रोबोट और ड्रोन तकनीक है, इसलिए ताइवान को लगातार नई तकनीक विकसित करनी होगी.
अगर ताइवान इन रोबोट डॉग्स को सफलतापूर्वक तैनात करता है तो यह दक्षिण चीन सागर में उसके नियंत्रण को मजबूत करेगा. साथ ही दुनिया भर की सेनाएं ऐसी तकनीक पर नजर रख रही हैं. ये रोबोट पहले से अमेरिकी सेना में इस्तेमाल हो रहे हैं. ताइवान के इस प्रयास से साफ है कि भविष्य की लड़ाइयां इंसानों के साथ-साथ स्मार्ट मशीनों के बीच भी होगी.
ऋचीक मिश्रा