14 को पीएम मोदी हाइवे पर बनी इमरजेंसी एयरस्ट्रिप पर करेंगे लैंड!

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 14 फरवरी 2026 को असम के मोरान में NH-127 की 4.2 किमी इमरजेंसी एयरस्ट्रिप पर उतर सकते हैं. यह पूर्वोत्तर भारत में पहली बार होगा. राफेल और सुखोई विमान डेमो उड़ान भरेंगे. ELF युद्ध या आपदा में उपयोगी होता है. यह इंफ्रास्ट्रक्चर के दोहरे फायदे दिखाएगा.

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भारतीय वायुसेना का राफेल और सुखोई फाइटर जेट भी दिखाएंगे डेमो. (File Photo: AFP) भारतीय वायुसेना का राफेल और सुखोई फाइटर जेट भी दिखाएंगे डेमो. (File Photo: AFP)

शिवानी शर्मा

  • नई दिल्ली,
  • 10 फरवरी 2026,
  • अपडेटेड 1:15 PM IST

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 14 फरवरी 2026 को असम के मोरान में एक हाईवे पर बनी इमरजेंसी एयरस्ट्रिप पर उतर सकते हैं. सूत्रों ने इंडिया टुडे को बताया कि यह पूर्वोत्तर भारत में पहली बार होगा जब कोई प्रधानमंत्री पारंपरिक एयरपोर्ट की बजाय हाईवे पर लैंड करेगा. यह एयरस्ट्रिप राष्ट्रीय राजमार्ग के डिब्रूगढ़-मोरान हिस्से पर बनाई गई है.

मोरान एयरस्ट्रिप क्या है?

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मोरान एयरस्ट्रिप NH-127 के 4.2 km लंबे हिस्से पर विकसित की गई है. यह भारत की पहली इमरजेंसी लैंडिंग फैसिलिटी (ELF) है, जो सैन्य और सिविलियन (सामान्य) विमानों दोनों के लिए इस्तेमाल की जा सकती है. ELF का मतलब है कि युद्ध या आपात स्थिति में विमान हाईवे पर उतर या उड़ान भर सकते हैं. 

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इससे सड़क का दोहरा फायदा होता है- रोजमर्रा की ट्रैफिक के साथ-साथ सैन्य जरूरतों के लिए. यह एयरस्ट्रिप पूर्वोत्तर की रणनीतिक महत्व को बढ़ाती है, क्योंकि यह क्षेत्र चीन की सीमा से सटा है. सरकार ने ऐसे कई ELF पूरे देश में विकसित किए हैं, लेकिन मोरान वाला पूर्वोत्तर का पहला है.

पीएम मोदी की यात्रा का प्लान

  • लैंडिंग: पीएम का विमान सीधे हाईवे पर उतरेगा. यह पूर्वोत्तर में पहला ऐसा मौका होगा.
  • डेमो: पीएम की मौजूदगी में राफेल और सुखोई लड़ाकू विमान एक स्पेशल एरियल डेमो करेंगे. इसमें विमान हाईवे से ही लैंडिंग और टेकऑफ दिखाएंगे. डेमो करीब 30-40 मिनट का होगा.
  • उद्देश्य: यह इवेंट भारत की इमरजेंसी तैयारियों, पूर्वोत्तर के विकास और राष्ट्रीय सुरक्षा को दिखाएगा. पीएम की यात्रा इंफ्रास्ट्रक्चर के दोहरे इस्तेमाल (सिविल-मिलिट्री) पर जोर देगी.

यह डेमो एयरस्ट्रिप की क्षमता को प्रदर्शित करेगा. राफेल फ्रांस से खरीदे गए आधुनिक जेट हैं, जबकि सुखोई रूस से लिए गए हैं. दोनों ही भारतीय वायुसेना के मुख्य हथियार हैं.

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ELF का महत्व क्यों?

भारत में ELF का विचार आपातकालीन स्थितियों के लिए है. उदाहरण के लिए...

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  • युद्ध में अगर एयरपोर्ट क्षतिग्रस्त हो जाएं, तो हाईवे विकल्प बन सकते हैं.
  • बाढ़ या प्राकृतिक आपदा में राहत सामग्री पहुंचाने के लिए.
  • पूर्वोत्तर जैसे दूरदराज क्षेत्रों में यह सुरक्षा बढ़ाता है.

सरकार ने राजस्थान, उत्तर प्रदेश, तमिलनाडु और अन्य जगहों पर भी ELF बनाए हैं. मोरान ELF पूर्वोत्तर  मजबूत बनाने का हिस्सा है, जहां इंफ्रास्ट्रक्चर विकास पर जोर है.

क्या होगा इवेंट का असर?

यह यात्रा पूर्वोत्तर की रणनीतिक अहमियत पर संदेश देगी. पीएम मोदी अक्सर ऐसे इवेंट्स से विकास और सुरक्षा को जोड़ते हैं. अगर प्लान सफल रहा, तो यह भारत की वायुसेना की ताकत और इंफ्रास्ट्रक्चर की नई मिसाल बनेगा.

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