भारतीय सेना में नया इतिहास: NDA की पहली महिला कैडेट्स IMA से हुईं पास आउट, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने बताया 'ऐतिहासिक मोड़'

2022 में एनडीए में प्रवेश पाने वाली देश की पहली महिला कैडेट्स का बैच देहरादून स्थित आईएमए से सफलतापूर्वक पास आउट हुआ. ये बैच भारतीय सेना में अधिकारी के रूप में कमीशन हो गया.

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राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के साथ भारतीय सेना में शामिल 9 महिला अधिकारी. (Photo: ITG) राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के साथ भारतीय सेना में शामिल 9 महिला अधिकारी. (Photo: ITG)

शिवानी शर्मा

  • नई दिल्ली,
  • 13 जून 2026,
  • अपडेटेड 4:41 PM IST

भारतीय सशस्त्र बलों (Indian Armed Forces) में लैंगिक समानता और महिला नेतृत्व की दिशा में शनिवार को एक बेहद ऐतिहासिक और गौरवशाली मील का पत्थर स्थापित हुआ है. राष्ट्रीय रक्षा अकादमी (NDA) के दरवाजे महिलाओं के लिए खोले जाने के बाद साल 2022 में प्रवेश पाने वाली महिला कैडेट्स का पहला बैच अपनी ट्रेनिंग पूरी कर आधिकारिक तौर पर भारतीय सेना में अधिकारी के रूप में कमीशन हो गया है. इन महिला कैडेट्स ने देहरादून स्थित इंडियन मिलिट्री अकादमी (IMA) से अपनी अंतिम पासिंग आउट परेड पूरी की.

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भारतीय सैन्य अकादमी में 158वें रेगुलर कोर्स और 141वें टेक्निकल ग्रेजुएट कोर्स की पासिंग आउट परेड की समीक्षा मुख्य अतिथि के रूप में राष्ट्रपति और सशस्त्र बलों की सर्वोच्च कमांडर द्रौपदी मुर्मू ने की. उन्होंने इस परेड मैदान में नौ महिला कैडेट्स की भागीदारी को अकादमी के इतिहास में एक ऐतिहासिक और क्रांतिकारी मोड़ बताया.

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परेड ग्राउंड पर नौ जांबाज महिलाएं: राष्ट्रपति ने बढ़ाया हौसला

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने परेड ग्राउंड पर देश सेवा के संकल्प के साथ कदमताल करती नौ महिला कैडेट्स को देखकर विशेष प्रसन्नता व्यक्त की. ये नौ महिलाएं एनडीए से प्रशिक्षित होकर आई और आईएमए (IMA) में अपना अंतिम वर्ष का प्री-कमीशन प्रशिक्षण पूरा कर इतिहास रचने वाली देश की पहली महिला सैन्य अधिकारी बन गई हैं.

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परेड को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति मुर्मू ने कहा कि यह IMA के इतिहास में एक ऐतिहासिक क्षण है. यह न केवल भारत के रक्षा बलों के इतिहास में एक मील का पत्थर है, बल्कि महिला नेतृत्व वाले विकास की ओर भारत के बढ़ते कदमों का एक प्रेरक उदाहरण भी है.

सुप्रीम कोर्ट के फैसले से आईएमए के परेड ग्राउंड तक का सफर

इन महिला अधिकारियों का सेना में शामिल होना एक बेहद लंबी और परिवर्तनकारी यात्रा का सुखद परिणाम है. दशकों पुरानी पुरुष-प्रधान परंपरा को तोड़ते हुए सुप्रीम कोर्ट ने एक ऐतिहासिक फैसले के जरिए महिलाओं के लिए एनडीए के रास्ते खोले थे. 

खड़कवासला (पुणे) स्थित एनडीए में तीन साल के कड़े सैन्य और शैक्षणिक प्रशिक्षण को सफलतापूर्वक पूरा करने के बाद, इन महिला कैडेट्स को उनके अंतिम वर्ष के विशेष प्रशिक्षण के लिए आईएमए भेजा गया था, जिसे पूरा कर आज उन्होंने देश के सामने अपनी योग्यता को साबित किया है.

पिछले एक दशक में भारतीय सेना में महिलाओं की भूमिका का लगातार विस्तार हुआ है. उन्हें कॉम्बैट-सपोर्ट भूमिकाओं में शामिल करने से लेकर कई महत्वपूर्ण शाखाओं में स्थाई कमीशन दिया गया है. अब इस पहले एनडीए बैच के आने से अग्रिम मोर्चों और ऑपरेशनल एपॉइंटमेंट में महिलाओं की भागीदारी और अधिक मजबूत होगी.

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140 करोड़ भारतीयों का भरोसा और सुरक्षा की जिम्मेदारी

राष्ट्रपति ने देश के सबसे कठिन सैन्य प्रशिक्षण कार्यक्रमों में से एक को पूरा करने वाले सभी नवनियुक्त सैन्य अधिकारियों को बधाई दी. उन्होंने याद दिलाया कि अब उनके कंधों पर देश की संप्रभुता, एकता और अखंडता की रक्षा करने की बहुत बड़ी जिम्मेदारी है, क्योंकि उन पर 140 करोड़ से अधिक भारतीयों का अटूट विश्वास है. 

उन्होंने युवा अधिकारियों से बदलते सुरक्षा परिदृश्यों, तीव्र तकनीकी बदलावों और जटिल वैश्विक खतरों के सामने हमेशा सतर्क और अनुकूल रहने का आह्वान किया. इस पासिंग आउट परेड में भारत के मित्र देशों के विदेशी कैडेट्स ने भी हिस्सा लिया. 

राष्ट्रपति ने उनकी सराहना करते हुए कहा कि विदेशी कैडेट्स की उपस्थिति सैन्य प्रशिक्षण और पेशेवर आदान-प्रदान के माध्यम से अंतरराष्ट्रीय साझेदारी, आपसी विश्वास और वैश्विक रक्षा सहयोग को मजबूत करने के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को दर्शाती है. इस दीक्षांत समारोह में कुल 481 भारतीय अधिकारी कैडेट्स और 16 मित्र देशों के 34 विदेशी अधिकारी कैडेट्स आईएमए से पास आउट हुए.

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