अमेरिका ने वेनेजुएला पर हमला क्यों किया... असली वजह 1974 की एक डील और डॉलर की लाइफ

अमेरिका ने वेनेजुएला पर हमला कर मादुरो को पकड़ लिया. वजह ड्रग्स या आतंकवाद नहीं, बल्कि पेट्रोडॉलर सिस्टम बचाना है. 1974 की किसिंजर-सऊदी डील से डॉलर की मांग बनी. वेनेजुएला ने युआन में तेल बेचकर डॉलर को चुनौती दी. सद्दाम और गद्दाफी की तरह सजा मिली. पेट्रोडॉलर मर रहा है. ब्रिक्स और चीन तेजी से वैकल्पिक सिस्टम बना रहे हैं.

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सिर्फ डॉलर के गिरती साख को बचाने के लिए ये हमला हुआ है. पहले भी हो चुका है. (Photo: Getty) सिर्फ डॉलर के गिरती साख को बचाने के लिए ये हमला हुआ है. पहले भी हो चुका है. (Photo: Getty)

ऋचीक मिश्रा

  • नई दिल्ली,
  • 05 जनवरी 2026,
  • अपडेटेड 5:39 PM IST

यह ड्रग्स, आतंकवाद या लोकतंत्र के बारे में नहीं, बल्कि पेट्रोडॉलर सिस्टम को बचाने की जंग है.

अमेरिका ने वेनेजुएला पर हमला करके राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को पकड़ लिया है. लेकिन असली कहानी इससे कहीं ज्यादा गहरी है. यह ड्रग्स तस्करी या आतंकवाद की वजह से नहीं हुआ. असल में, यह अमेरिकी डॉलर की सत्ता को बचाने की कोशिश है, जो 50 साल से दुनिया की अर्थव्यवस्था पर राज कर रहा है. वेनेजुएला ने इस सिस्टम को चुनौती दी थी. अब अमेरिका उसे दबाने की कोशिश कर रहा है.  

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पेट्रोडॉलर क्या है? यह अमेरिका के लिए क्यों जरूरी?

1974 में अमेरिका के विदेश मंत्री हेनरी किसिंजर ने सऊदी अरब से एक गुप्त डील की. डील यह थी- दुनिया में जितना भी तेल बिकेगा, वह अमेरिकी डॉलर में ही बिकेगा. बदले में, अमेरिका सऊदी अरब को सैन्य सुरक्षा देगा.

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इस डील से क्या हुआ? 

हर देश को तेल खरीदने के लिए डॉलर चाहिए. इससे डॉलर की मांग हमेशा बनी रहती है. अमेरिका जितने चाहे डॉलर छाप सकता है, क्योंकि पूरी दुनिया डॉलर से तेल खरीदती है. इससे अमेरिका की सेना, कल्याण योजनाएं और घाटे का खर्च चलता है. पेट्रोडॉलर अमेरिका की आर्थिक ताकत की नींव है – इससे ज्यादा महत्वपूर्ण है कोई हथियार या जहाज नहीं.

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वेनेजुएला ने क्या किया जो अमेरिका को इतना गुस्सा आया?

वेनेजुएला के पास दुनिया के सबसे बड़े तेल भंडार हैं – 303 अरब बैरल. यह सऊदी अरब से भी ज्यादा है. दुनिया के कुल तेल का 20%. लेकिन वेनेजुएला ने 2018 में घोषणा की कि वह डॉलर से आजाद हो जाएगा. उन्होंने अपना तेल चीनी युआन, यूरो, रूबल या किसी भी करेंसी में बेचना शुरू कर दिया – लेकिन डॉलर में नहीं.

वे ब्रिक्स (ब्राजील, रूस, इंडिया, चीन, साउथ अफ्रीका) में शामिल होने की कोशिश कर रहे थे. चीन के साथ सीधे पेमेंट चैनल बना रहे थे, जो SWIFT (डॉलर-आधारित बैंकिंग सिस्टम) को बाइपास करते हैं. इतने तेल से वे दशकों तक डॉलर-विरोधी अभियान चला सकते थे.

यह अमेरिका के लिए खतरा था, क्योंकि अगर वेनेजुएला सफल होता, तो दूसरे देश भी डॉलर छोड़ देते.

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इतिहास में क्या हुआ जब किसी ने पेट्रोडॉलर को चुनौती दी?

अमेरिका ने पहले भी ऐसे नेताओं को सजा दी है...

  • 2000: इराक के सद्दाम हुसैन ने कहा कि तेल यूरो में बेचेंगे, डॉलर में नहीं.
  • 2003: अमेरिका ने इराक पर हमला किया. सद्दाम को फांसी दी गई. तेल फिर डॉलर में बिकने लगा. WMD (जनसंहारक हथियार) कभी नहीं मिले – क्योंकि वो थे ही नहीं.
  • 2009: लीबिया के गद्दाफी ने गोल्ड दीनार नाम की अफ्रीकी करेंसी बनाने का प्रस्ताव दिया, जो सोने पर आधारित होती और तेल व्यापार के लिए इस्तेमाल होती.
  • हिलेरी क्लिंटन के लीक ईमेल से पता चला कि यह हमले की मुख्य वजह थी. ईमेल में लिखा था कि यह सोना लीबियाई गोल्ड दीनार पर आधारित पैन-अफ्रीकी करेंसी बनाने के लिए था.
  • 2011: नाटो ने लीबिया पर बमबारी की. गद्दाफी को मार दिया गया. क्लिंटन ने कैमरे पर हंसते हुए कहा कि हम आए, हमने देखा, वह मर गया. अब लीबिया में गुलामी बाजार हैं.

अब मादुरो की बारी. उनके पास सद्दाम और गद्दाफी से 5 गुना ज्यादा तेल है. वो युआन में तेल बेच रहे थे, ब्रिक्स में शामिल होने वाले थे. चीन-रूस-ईरान से जुड़ रहे थे – ये तीनों देश डॉलर को चुनौती दे रहे हैं.

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अमेरिका ने क्या कहा?

अमेरिकी सलाहकार स्टीफन मिलर ने खुलकर कहा कि वेनेजुएला का तेल उद्योग अमेरिकी मेहनत से बना. वे कह रहे हैं कि 100 साल पहले अमेरिकी कंपनियों ने वहां तेल विकसित किया, इसलिए वह तेल अमेरिका का है. 

पेट्रोडॉलर पहले से ही मर रहा है

  • रूस यूक्रेन युद्ध के बाद रूबल और युआन में तेल बेच रहा है.
  • सऊदी अरब युआन में सेटलमेंट पर विचार कर रहा है.
  • ईरान सालों से गैर-डॉलर करेंसी में व्यापार कर रहा है.
  • चीन ने CIPS सिस्टम बनाया, जो 185 देशों के 4800 बैंकों से जुड़ा है.
  • ब्रिक्स स्थानीय करेंसी में ट्रेड के लिए सिस्टम बना रहा है.
  • mBridge प्रोजेक्ट से सेंट्रल बैंक तुरंत लोकल करेंसी में सेटलमेंट कर सकते हैं.

अगर वेनेजुएला ब्रिक्स में शामिल होता, तो यह प्रक्रिया तेज हो जाती – ब्रिक्स दुनिया की 40% जीडीपी कंट्रोल करता.

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यह ड्रग्स या आतंकवाद क्यों नहीं है?

वेनेजुएला से अमेरिका में सिर्फ 1% कोकेन आती है. मादुरो पर आतंकी संगठन से जुड़ाव का कोई सबूत नहीं. लोकतंत्र? अमेरिका सऊदी अरब का साथी है, जहां कोई चुनाव नहीं होता.

आगे क्या होगा?

रूस, चीन, ईरान ने इसे सशस्त्र हमला बताया है. चीन वेनेजुएला का सबसे बड़ा तेल खरीदार है – उसे नुकसान हो रहा है. ब्रिक्स देश देख रहे हैं कि डॉलर छोड़ने पर क्या होता है. अमेरिकी तेल कंपनियां वेनेजुएला लौटने को तैयार हैं. विपक्षी सरकार बनेगी, तेल फिर डॉलर में बिकेगा.

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लेकिन बड़ा सवाल: अगर बमबारी से डॉलर बचाना पड़ रहा है, तो क्या डॉलर पहले से मर नहीं रहा? ग्लोबल साउथ के देश अब तेजी से डॉलर छोड़ सकते हैं. यह अमेरिका की सत्ता का अंत हो सकता है. यह घटना 1990 के पनामा हमले से मिलती है – दोनों 3 जनवरी को हुए, दोनों में ड्रग्स का बहाना. इतिहास दोहराता नहीं, लेकिन तुकबंदी करता है. वेनेजुएला की जंग डॉलर की जिंदगी की जंग है.

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