ईरान ने फोड़ दी अमेरिका की 'आसमानी आंख'... कतर में उड़ाया बैलिस्टिक मिसाइल रडार

ईरान ने हाल ही में कतर में अमेरिका के AN/FPS-132 बैलिस्टिक मिसाइल अर्ली वार्निंग रडार पर हमला किया, जो 1.1 बिलियन डॉलर का है. सैटेलाइट इमेज से पुष्टि हुई कि यह महत्वपूर्ण रडार काफी क्षतिग्रस्त हुआ. एक सस्ते शाहेद ड्रोन ने अमेरिकी मिसाइल डिफेंस की आंखों को अंधा कर दिया, जिससे खाड़ी क्षेत्र में सुरक्षा खतरे में पड़ गई. यह बड़ा झटका है.

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इस तस्वीर में बीच में एक सफेद गोल आकृति दिख रही है वही रडार डोम है. (Photo: Planet) इस तस्वीर में बीच में एक सफेद गोल आकृति दिख रही है वही रडार डोम है. (Photo: Planet)

ऋचीक मिश्रा

  • नई दिल्ली,
  • 04 मार्च 2026,
  • अपडेटेड 11:26 AM IST

ईरान ने अमेरिका के खिलाफ जवाबी कार्रवाई में कतर में स्थित एक बहुत महत्वपूर्ण रडार सिस्टम पर हमला किया. यह रडार अमेरिकी स्पेस फोर्स का AN/FPS-132 बैलिस्टिक मिसाइल अर्ली वार्निंग रडार है.  

अब सैटेलाइट इमेजरी से इसकी पुष्टि हो गई है कि हमला सफल रहा और रडार को काफी क्षति पहुंची है. यह सिस्टम करीब 1.1 बिलियन डॉलर यानी लगभग 9000 करोड़ रुपये का है. यह मध्य पूर्व में अमेरिका का सबसे बड़ा और सबसे महत्वपूर्ण रडार है.

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इसका मुख्य काम आने वाली बैलिस्टिक मिसाइलों को जल्दी पकड़ना है ताकि अमेरिकी सेना और उसके सहयोगी देशों को समय पर चेतावनी मिल सके. एक सस्ता शाहेद ड्रोन, जो इस्तेमाल की गई कार से भी सस्ता पड़ता है, ने इस महंगे और अहम डिफेंस सिस्टम को अंधा कर दिया. यह घटना अमेरिकी रक्षा व्यवस्था की कमजोरियों को उजागर करती है.

यह रडार क्या है और क्यों इतना खास है

AN/FPS-132 रडार को अपग्रेडेड अर्ली वार्निंग रडार (UEWR) कहा जाता है. यह अमेरिका के ग्लोबल मिसाइल वार्निंग नेटवर्क का हिस्सा है. इसे 2013 में कतर में लगाया गया था. इसकी डिटेक्शन रेंज 5000 किलोमीटर है. यह ईरान, अन्य देशों से लॉन्च होने वाली बैलिस्टिक मिसाइलों को बहुत दूर से ट्रैक कर सकता है. 

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यह रडार अल उदैद एयर बेस के पास स्थित है, जो मध्य पूर्व में अमेरिका का सबसे बड़ा एयर बेस है. यहां से अमेरिका पूरे क्षेत्र में अपनी सेना को सपोर्ट करता है. यह रडार मिसाइल लॉन्च होने के तुरंत बाद उसकी दिशा, स्पीड और टारगेट की जानकारी देता है. 

इससे पैट्रियट या थाड जैसे मिसाइल डिफेंस सिस्टम को एक्टिवेट करने का समय मिलता है. बिना इस रडार के अमेरिका और उसके सहयोगी देशों जैसे सऊदी अरब, यूएई को मिसाइल हमलों से बचाव में ज्यादा मुश्किल होगी. यह सिस्टम दुनिया में सिर्फ कुछ ही जगहों पर है, इसलिए इसका नुकसान बहुत बड़ा माना जा रहा है.

ईरान के हमले की कहानी और कैसे हुआ हमला

ईरान के इस्लामिक रिवॉल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने इसे 'ट्रू प्रॉमिस 4' ऑपरेशन का हिस्सा बताया. यह हमला अमेरिका और इजरायल के ईरान पर हाल के हमलों का जवाब था. ईरान ने बैलिस्टिक मिसाइलों और ड्रोनों से हमला किया. कतर की डिफेंस मिनिस्ट्री ने कहा कि उन्होंने ज्यादातर मिसाइलों और ड्रोनों को रोक लिया, लेकिन कुछ अल उदैद बेस पर गिरे. एक UAV यानी ड्रोन ने रडार साइट को टारगेट किया. 

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ईरानी मीडिया ने दावा किया कि रडार पूरी तरह नष्ट हो गया. कुछ रिपोर्ट्स में कहा गया कि ड्रोन शाहेद टाइप का था, जो बहुत सस्ता लेकिन घातक है. कतर ने माना कि कुछ हमले सफल रहे और 8 लोग शार्पनेल से घायल हुए. अमेरिका या कतर ने अभी तक नुकसान की पूरी डिटेल नहीं बताई, लेकिन सैटेलाइट तस्वीरों से साफ दिख रहा है कि रडार को भारी डैमेज हुआ है. यह पहली बार है जब इतना महंगा अमेरिकी स्ट्रैटेजिक सिस्टम किसी दुश्मन के हमले से इतना प्रभावित हुआ.

इस हमले के क्या असर होंगे

यह हमला अमेरिकी मिसाइल डिफेंस शील्ड पर बड़ा झटका है. खाड़ी क्षेत्र में अमेरिका की आंखें कमजोर हो गई हैं. अब मिसाइल लॉन्च होने पर चेतावनी का समय कम हो सकता है. इससे अमेरिकी बेस, इजरायल और गल्फ देशों की सुरक्षा पर खतरा बढ़ गया है. ईरान ने दिखा दिया कि सस्ते ड्रोनों से भी महंगे सिस्टम को निशाना बनाया जा सकता है. यह घटना ड्रोन युद्ध की नई रणनीति को उजागर करती है.

अमेरिका को अब नए तरीके से अपनी डिफेंस को मजबूत करना पड़ेगा. कतर जैसे देशों में अमेरिकी बेस होने से क्षेत्रीय तनाव और बढ़ सकता है. ईरान का यह कदम दिखाता है कि वह अब सीधे अमेरिकी संपत्ति पर हमला करने से नहीं हिचक रहा. भविष्य में ऐसे हमले और बढ़ सकते हैं. 

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