रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के भारत दौरे के बाद अब इंडियन आर्मी चीफ जनरल धीरज सेठ रूस जा रहे हैं. यह दौरा ऐसे वक्त हो रहा है, जब भारत और रूस के बीच रक्षा सहयोग को लेकर कई अहम प्रस्ताव चर्चा में हैं. ऐसे में आर्मी चीफ का मॉस्को दौरा काफी अहम माना जा रहा है. नजर इस बात पर होगी कि दोनों देशों के बीच रक्षा क्षेत्र में आगे किस तरह का सहयोग बढ़ता है और किन डिफेंस प्रोजेक्ट्स पर बातचीत आगे बढ़ती है.
जनरल धीरज सेठ 16 से 18 सितंबर तक रूस के आधिकारिक दौरे पर रहेंगे. इस दौरान वह रूसी सेना के वरिष्ठ अधिकारियों से मुलाकात करेंगे. दोनों देशों के बीच सैन्य सहयोग, ट्रेनिंग और रक्षा जरूरतों से जुड़े मुद्दों पर बातचीत होगी.
पुतिन के दौरे के बाद क्यों अहम है आर्मी चीफ का दौरा?
पुतिन ने हाल ही में भारत में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की थी. दोनों नेताओं के बीच रक्षा समेत कई क्षेत्रों में सहयोग पर चर्चा हुई थी. रूस की ओर से भारत के लिए कई रक्षा प्रस्ताव भी सामने आए हैं. इनमें Su-57 फाइटर जेट, Su-30MKI के अपग्रेड और एयर डिफेंस सिस्टम से जुड़े प्रस्ताव शामिल हैं.
अब आर्मी चीफ का रूस जाना इस बातचीत को सैन्य स्तर पर आगे बढ़ाने का मौका देगा. हालांकि, अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि इस दौरे में कोई बड़ी डील फाइनल होगी. फिलहाल कई प्रस्तावों पर बातचीत और संभावनाओं को तलाशने का दौर है.
गौरतलब है, भारत के पास बड़ी संख्या में रूसी मूल के सैन्य प्लेटफॉर्म और हथियार हैं. इनमें टैंक, बख्तरबंद वाहन, एयर डिफेंस सिस्टम और रॉकेट सिस्टम शामिल हैं. इनकी देखभाल और समय पर स्पेयर पार्ट्स की सप्लाई सेना के लिए अहम है.
रिपोर्टों के मुताबिक, जनरल धीराज सेठ की बातचीत में रूसी मूल के हथियारों के स्पेयर पार्ट्स और सप्लाई का मुद्दा भी अहम रह सकता है. दोनों देश पुराने सिस्टम को अपग्रेड करने और उनकी ऑपरेशनल क्षमता बनाए रखने के तरीकों पर चर्चा कर सकते हैं.
रूस की ओर से भारत को कुछ नए सैन्य सिस्टम की पेशकश भी की गई है. इनमें Pantsir-S1M एयर डिफेंस सिस्टम का नाम सामने आया है. यह कम दूरी की एयर डिफेंस प्रणाली है. इसका इस्तेमाल अहम सैन्य ठिकानों और सैनिकों को हवाई खतरों से बचाने के लिए किया जाता है.
इसके अलावा BMP-3 इन्फैंट्री कॉम्बैट व्हीकल को लेकर भी चर्चा की संभावना है. भारतीय सेना लंबे समय से BMP सीरीज के वाहनों का इस्तेमाल करती रही है. ऐसे में नए प्लेटफॉर्म की जरूरत और मौजूदा सिस्टम के आधुनिकीकरण पर बातचीत महत्वपूर्ण हो सकती है.
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नए टैंक को लेकर भी हो सकती है चर्चा
भारतीय सेना भविष्य के लिए नई पीढ़ी के मुख्य युद्धक टैंक की जरूरत पर काम कर रही है. इसका मकसद धीरे-धीरे पुराने T-72 और T-90 बेड़े की जगह नई क्षमता विकसित करना है.
रूस की ओर से इस क्षेत्र में भी संभावित सहयोग की पेशकश की जा सकती है. इसमें नई टेकनीक, प्लेटफॉर्म या संयुक्त विकास और निर्माण जैसे विकल्प शामिल हो सकते हैं. हालांकि, किसी प्रस्ताव के अंतिम रूप लेने को लेकर अभी कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है.
दौरे के दौरान जनरल धीरज सेठ रूसी लैंड फोर्सेज के कमांडर-इन-चीफ कर्नल जनरल आंद्रेई मोर्डविचेव से मुलाकात करेंगे. दोनों सैन्य सहयोग और ट्रेनिंग से जुड़े मुद्दों पर चर्चा करेंगे.
आर्मी चीफ मॉस्को के नेशनल डिफेंस कंट्रोल सेंटर भी जाएंगे. यहां वह रूसी रक्षा मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों से मुलाकात करेंगे. इनमें डिप्टी डिफेंस मिनिस्टर वसीली ओस्माकोव भी शामिल हैं. वह रक्षा उद्योग और खरीद से जुड़े मामलों को देखते हैं.
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इसके बाद जनरल धीराज सेठ सेंट पीटर्सबर्ग भी जाएंगे. वहां वह मिखाइलोव्स्काया मिलिट्री आर्टिलरी एकेडमी का दौरा करेंगे. वह वहां के अधिकारियों और फैकल्टी से बातचीत करेंगे.
आर्मी चीफ का रूस दौरा ऐसे समय हो रहा है, जब भारत अपनी रक्षा जरूरतों के लिए स्वदेशी उत्पादन और अलग-अलग देशों से सप्लाई बढ़ाने पर जोर दे रहा है. इसके बावजूद रूसी मूल के हथियार भारतीय सेना के बड़े हिस्से में मौजूद हैं. इसलिए रूस के साथ स्पेयर पार्ट्स, अपग्रेड और तकनीकी सहयोग अभी भी अहम है.
ऐसे में जनरल धीराज सेठ का दौरा सिर्फ सैन्य बातचीत तक सीमित नहीं है. इस दौरान मौजूदा हथियारों की जरूरत, नए सिस्टम और भविष्य की रक्षा साझेदारी पर भी चर्चा का रास्ता खुल सकता है. पुतिन के हालिया भारत दौरे के बाद होने वाला यह सैन्य स्तर का संपर्क दोनों देशों के रक्षा रिश्तों की दिशा के लिहाज से अहम रहेगा.
मंजीत नेगी