मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच ईरान की सैन्य क्षमता एक बार फिर चर्चा में है. जून 2025 में इजराइल और अमेरिका के साथ हुए 12 दिनों के युद्ध के बाद ईरान ने अपनी सेना को और मजबूत किया है, लेकिन क्या यह अमेरिका जैसी विश्व की सबसे बड़ी सैन्य शक्ति के सामने टिक पाएगा? क्या ईरान 11 से 13 हजार किलोमीटर दूर से अमेरिका को हिट कर पाएगा. इतनी दूर से वो युद्ध की कौन सी रणनीति अपनाएगा.
ईरान की सैन्य ताकत कितनी है?
ईरान मध्य पूर्व की एक प्रमुख सैन्य शक्ति है, लेकिन वैश्विक स्तर पर यह टॉप 20 में आता है. 2025 के ग्लोबल फायरपावर इंडेक्स के अनुसार, ईरान दुनिया की 145 देशों में 16वें स्थान पर है. यह रैंकिंग 2024 में 14वें स्थान से गिर गई है, लेकिन जून 2025 के युद्ध के बाद ईरान ने अपनी सैन्य क्षमता को तेजी से बढ़ाया है.
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ईरान की मुख्य ताकतें इस प्रकार हैं...
सैनिक: करीब 6.10 लाख सक्रिय सैनिक और 3.50 लाख रिजर्व फोर्स. कुल मिलाकर 9.60 लाख से ज्यादा. इसमें इस्लामिक रिवॉल्यूशनरी गार्ड्स कॉर्प्स (IRGC) एक अलग और मजबूत इकाई है, जो असिमेट्रिक युद्ध (गैर-पारंपरिक लड़ाई) में विशेषज्ञ है.
जमीनी सेना: हजारों टैंक, आर्टिलरी और रॉकेट सिस्टम. हालांकि, ज्यादातर उपकरण सोवियत युग के पुराने हैं, लेकिन संख्या में मजबूत. ईरान ने हाल में रूसी और चीनी तकनीक से अपग्रेड किया है.
वायुसेना: लगभग 550 लड़ाकू विमान, लेकिन ज्यादातर पुराने. ड्रोन और यूएवी (अनमैन्ड एरियल व्हीकल) में ईरान दुनिया के टॉप देशों में है. 2025 के युद्ध में ईरान ने ड्रोनों से इजराइल पर बड़े हमले किए थे.
नौसेना: छोटी तेज नावें, पनडुब्बियां और माइंस. यह फारस की खाड़ी में असिमेट्रिक वारफेयर के लिए तैयार है.
मिसाइल कार्यक्रम: ईरान की सबसे बड़ी ताकत. हजारों बैलिस्टिक और क्रूज मिसाइलें, जिनकी रेंज 2000-3000 किमी तक है. 2025 में ईरान ने हाइपरसोनिक मिसाइलें और लंबी दूरी के ड्रोनों का विकास तेज किया.
ईरान का सैन्य बजट लगभग 10-15 अरब डॉलर है, जो अमेरिका के 800 अरब डॉलर से बहुत कम है. लेकिन ईरान संख्या और घरेलू उत्पादन पर निर्भर करता है.
अमेरिकी हमले की स्थिति में ईरान खुद को बचा पाएगा?
पूर्ण युद्ध में ईरान अमेरिका के सामने नहीं टिक पाएगा, क्योंकि अमेरिका दुनिया की नंबर 1 सैन्य शक्ति है. अमेरिका के पास एडवांस तकनीक, 11 एयरक्राफ्ट कैरियर, परमाणु हथियार और वैश्विक पहुंच है. लेकिन ईरान असिमेट्रिक युद्ध से अमेरिका को भारी नुकसान पहुंचा सकता है. 2025 के 12-दिनों के युद्ध में ईरान ने 500 से ज्यादा बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं, जिससे इजराइल और अमेरिकी ठिकानों को नुकसान हुआ.
विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान पारंपरिक युद्ध हार जाएगा, लेकिन वह युद्ध लंबा चलाकर दुश्मन को काफी नुकसान कर सकता है. ईरान की रक्षा रणनीति डिटरेंस (रोकथाम) पर आधारित है - अर्थात, हमला करने वाले को इतना दर्द देना कि वह पीछे हट जाए. हाल की रिपोर्ट्स में कहा गया है कि 2026 में ईरान की सैन्य ताकत युद्ध के बाद बढ़ी है, लेकिन आर्थिक चुनौतियां और आंतरिक विरोध प्रदर्शन इसे कमजोर कर रहे हैं.
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दोनों देश इतनी दूर हैं, तो हमला कैसे होगा?
ईरान और अमेरिका के बीच करीब 11 से 13 हजार किलोमीटर की दूरी है, लेकिन अमेरिका की सैन्य पहुंच पूरी दुनिया में है. अमेरिका को दूरी कोई समस्या नहीं, क्योंकि उसके पास मध्य पूर्व में कई ठिकाने हैं. हमला इस प्रकार हो सकता है...
अरब देशों में ठिकानों से: अमेरिका कतर (अल उदैद - सबसे बड़ा ठिकाना), बहरीन, यूएई, सऊदी अरब, इराक, जॉर्डन और कुवैत में हजारों सैनिक तैनात रखता है. इनसे फाइटर जेट, बॉम्बर (जैसे बी-2 स्टेल्थ) और क्रूज मिसाइलें (टोमाहॉक) लॉन्च की जा सकती हैं.
अमेरिका मुख्य रूप से अरब देशों के ठिकानों से ही ईरान पर हमला करेगा, क्योंकि ये ईरान के बहुत करीब हैं और लॉजिस्टिक्स आसान है.
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ईरान की रणनीति क्या होगी?
ईरान की रणनीति असिमेट्रिक और डिटरेंस पर आधारित है. वह पारंपरिक युद्ध से बचते हुए दुश्मन को कमजोर करने की कोशिश करेगा...
ईरान के पास कौन सी मिसाइलें हैं जो अमेरिका तक पहुंच सकती हैं?
ईरान का मिसाइल कार्यक्रम तेजी से विकसित हो रहा है. नवंबर 2025 में ईरान ने 10,000 किमी रेंज वाली मिसाइल को लॉन्च किया, जो अमेरिका की मुख्य भूमि तक पहुंच सकती है. यह आईसीबीएम (इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल) जैसी है, लेकिन पश्चिमी विशेषज्ञ इसे पूरी तरह ऑपरेशनल नहीं मानते. ईरान के स्पेस प्रोग्राम से यह संकेत मिलता है कि आईसीबीएम पर काम चल रहा है.
अन्य प्रमुख मिसाइलें...
जवाब में अमेरिका क्या करेगा?
अमेरिका ईरान की मिसाइल साइटों, कमांड सेंटर्स, नौसेना और आईआरजीसी को निशाना बनाएगा. वह हवाई श्रेष्ठता से ईरान की रक्षा प्रणाली को दबाएगा. अगर ईरान प्रॉक्सी या होर्मुज बंद करेगा, तो अमेरिका और मजबूत जवाब देगा - जैसे ईरान के तेल ढांचे या नेतृत्व पर हमला. अमेरिका पूर्ण युद्ध जीत सकता है, लेकिन क्षेत्रीय अस्थिरता और तेल कीमतों से उसे नुकसान होगा.
ऋचीक मिश्रा