हेड मास्टर ने स्कूल में किया आत्मदाह, ब्लैक बोर्ड पर लिखा सुसाइड नोट

उत्तर प्रदेश में ललितपुर जिले के तालबेहट थाना क्षेत्र में ग्राम प्रधान और शिक्षा विभाग के अधिकारियों के रिश्वत मांगने और उत्पीड़न से त्रस्त प्राथमिक विद्यालय के एक बुजुर्ग प्रधानाध्यापक ने सेवानिवृत होने से एक दिन पहले शनिवार को मुख्यमंत्री के नाम ब्लैक बोर्ड में सुसाइड नोट लिखकर विद्यालय कक्ष में ही आग लगाकर आत्महत्या कर ली.

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उत्तर प्रदेश में ललितपुर जिले की घटना उत्तर प्रदेश में ललितपुर जिले की घटना

मुकेश कुमार

  • लखनऊ,
  • 01 अप्रैल 2018,
  • अपडेटेड 9:34 PM IST

उत्तर प्रदेश में ललितपुर जिले के तालबेहट थाना क्षेत्र में ग्राम प्रधान और शिक्षा विभाग के अधिकारियों के रिश्वत मांगने और उत्पीड़न से त्रस्त प्राथमिक विद्यालय के एक बुजुर्ग प्रधानाध्यापक ने सेवानिवृत्त होने से एक दिन पहले शनिवार को मुख्यमंत्री के नाम ब्लैक बोर्ड में सुसाइड नोट लिखकर विद्यालय कक्ष में ही आग लगाकर आत्महत्या कर ली.

पुलिस अधीक्षक डॉ. ओ.पी. सिंह ने रविवार को बताया कि सेवानिवृत्त होने से एक दिन पूर्व सिरसखेड़ा गांव के प्राथमिक विद्यालय के प्रधानाध्यापक ओमप्रकाश पटेरिया ने विद्यालय के ब्लैक बोर्ड में मुख्यमंत्री के नाम सुसाइड नोट लिखकर कक्ष के अंदर ही आग लगा ली. उन्हें गंभीर अवस्था में झांसी रेफर किया गया, लेकिन रास्ते में ही उन्होंने दम तोड़ दिया.

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एसपी ने बताया कि बुजुर्ग अध्यापक ने अपनी सुसाइड नोट में ग्राम प्रधान मोहन सिंह, अपने एक सहकर्मी और मध्यान्ह भोजन (मिड डे मील) के प्रभारी कपिल दुबे पर रिश्वत मांगने और न देने पर प्रताड़ित करने के आरोप लगाए हैं. इस मामले की जांच सीओ और संबंधित थानाध्यक्ष कर रहे हैं. जो जांच में दोषी पाया जाएगा, उसे बख्शा नहीं जाएगा.

विद्यालय पहुंचे गांव के कुछ ग्रामीण बताते हैं कि आत्मदाह करने वाले बुजुर्ग अध्यापक ने में मुख्यमंत्री से मिड डे मील कार्य से शिक्षकों को मुक्त करने, भ्रष्टाचार से मुक्ति दिलाने के अलावा पदावनति किए गए शिक्षक और शिक्षिकाओं के बारे भी लिखा है. वह मूलरूप से सेमरखेड़ा गांव के निवासी थे.

प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक प्रधानाध्यापक ने लिखा, 'मेरी मृत्यु के लिए ग्राम प्रधान को जिम्मेदार माना जाए, जो सिर्फ हराम के रुपया चाहता है. मेरा बहुत सा धन एमडीएम खाते में पड़ा है. एमडीएम का जिम्मेदार अधिकारी महाभ्रष्ट है. 17 अगस्त 2016 को 1000 ले गया था. 26 दिसंबर 2016 को पुन: एक युवक के साथ आया.'

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प्रधानाध्यापक ने आगे लिखा है, 'रुपया न देने पर गलत रिपोर्टिंग करके वेतन रोकवा दिया. एसएमसी के जिम्मेदार प्रधान के कहने पर चलता है. इस कारण आजतक स्वेटर की धनराशि के चेक का भुगतान नहीं हुआ है. अंत में मुख्यमंत्री से प्रार्थना है कि प्रधानाध्यापक को एमडीएम के कार्य से मुक्त करो, विभाग के भ्रष्टाचार से मुक्ति दिलाओ, जिन भाई-बहनों की पदावनति की गई है, यह पूर्णतया गलत है जब उनका प्रमोशन हुआ था, तब प्रमोशन में भी आरक्षण लागू था. ओमप्रकाश पटेरिया प्रधानाध्यापक सेमरखेड़ा.'

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