मेरठ के हस्तिनापुर इलाके में रहने वाले अतुल सिंह पंवार एक प्राइवेट स्कूल चलाते थे. 16 जुलाई की रात अतुल अपने घर के बिस्तर पर ऐसे सोए कि फिर कभी उठे ही नहीं. पहले तो अतुल की बीवी दामिनी को भी पता नहीं चला कि आखिर उसके पति की मौत कैसे हुई, लेकिन जब उसने अपने पति के बिस्तर पर एक छोटा मगर खतरनाक सांप देखा, तो उसे ये समझते देर नहीं लगी कि अतुल की मौत का जिम्मेदार कोई और नहीं बल्कि वो सांप ही है, जो उसके बिस्तर में छुपा था. वो एक बेहद जहरीला करैत सांप था, जिसे साइलेंट किलर के नाम से भी जाना जाता है.
मगर इस कहानी का असली ट्विस्ट तब आया, जब चंद घंटे गुजरते-गुजरते मेरठ पुलिस ने खुलासा किया कि अतुल की मौत का असल जिम्मेदार वो बेजुबान सांप नहीं, बल्कि खुद उसकी बीवी दामिनी है. असल में दामिनी ने ही अतुल को इस सांप से डसवा कर मौत के घाट उतारने की साजिश रची थी. लेकिन आखिर 8 साल पुरानी एक लव स्टोरी का ऐसा हश्र क्यों हुआ, दामिनी ने ये पूरी साजिश क्यों रची? यही सवाल सबसे बड़ा है.
अतुल के मामले पर आगे बात करेंगे. पर फिलहाल बात हमारे इर्द-गिर्द तेजी से बढ़ते उन अतुल और दामिनियों की, जिन्होंने मोहब्बत और भरोसे की बुनियाद पर टिके शादी के रिश्ते की ही बुनियाद हिला दी है. पत्नियों के हाथों पतियों की मौत का एक ऐसा किलर सिंड्रोम शुरू हुआ है, जिस पर फुलस्टॉप कब लगेगा, लगेगा भी या नहीं, ये फिलहाल कोई नहीं जानता.
दामिनी, मुस्कान, सोनम, निकिता, प्रियंका, सिया, रूबी... बेशक ये नाम अलग-अलग हैं, लेकिन ऐसे ही अलग-अलग नामों के साथ हर दूसरे दिन देश में कहीं ना कहीं किसी ना किसी पति के मौत की खबर सामने आती है. कहीं नीले ड्रम में. कहीं घर के अंदर फर्श के नीचे. कहीं नहर के पानी में तो कहीं बिस्तर पर.
क्या आप यकीन करेंगे कि इसी किलर सिंड्रोम ने साल 2026 के इन शुरुआती छह महीनों में तकरीबन 550 से भी ज्यादा पतियों की जिंदगी लील ली है. मर्दों और खास कर पतियों की लड़ाई में उनका साथ देने वाली गुरुग्राम की एक एनजीओ एकम न्याय फाउंडेशन ने महिलाओं के बीच फैले इसी किलर सिंड्रोम को लेकर अपनी जो लेटेस्ट रिपोर्ट तैयार की है, उसका सच कुछ ऐसा ही है.
इस रिपोर्ट के मुताबिक इस साल अब तक बीवियों के हाथों पतियों के मारे जाने या फिर बीवियों से तंग आ कर पतियों के खुदकुशी कर लेने के कुल 554 से भी ज्यादा मामले सामने आ चुके हैं. इनमें 322 मामले तो ऐसे हैं, जिनमें पत्नियों ने या तो अकेले या फिर अपने किसी आशिक के साथ मिल कर खुद अपने हाथों से अपने-अपने पतियों को मौत के घाट उतार दिया. जबकि कुल 232 पत्नियां अपने-अपने पतियों की जिंदगी में ऐसा अज़ाब लेकर आईं कि बेचारे पतियों ने खुद अपने हाथों से अपनी जीवनलीला समाप्त कर ली.
असल में हमारे देश में साल भर होने वाले अपराधों का लेखा-जोखा रखने वाली एजेंसी नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो यानी एनसीआरबी अलग-अलग किस्म के अपराधों का हिसाब-किताब तो रखती है, लेकिन पत्नियों के हाथों पतियों के या फिर पतियों के हाथों पत्नियों के मारे जाने का अलग से कोई डाटा तैयार नहीं करती.
ऐसे में गुरुग्राम के एनजीओ यानी एकम न्याय फाउंडेशन ने इस साल हुई पतियों के कत्ल और सुसाइड की ऐसी घटनाओं का ये आंकड़ा उन मीडिया रिपोर्ट्स के हवाले से तैयार किया है, जो किसी ना किसी अखबार, टीवी या वेबसाइट की सुर्खियां बनीं. इस एनजीओ की मानें तो सामने आए ये आंकड़े देश भर में पत्नियों के हाथों मारे जाने वाले पतियों के असल आंकड़े का एक हिस्सा भर है. क्योंकि देश में ऐसे भी बेशुमार केस होते हैं, जो या तो किसी अख़बार में नहीं छपते या फिर छपते भी हैं, तो उन पर हर बार हर किसी की नजर नहीं पड़ती.
ये आंकड़े कितने खतरनाक हैं, इसका अंदाज़ा इस बात से लग जाता है कि इसके मुताबिक देश में हर रोज़ कम से कम जहां दो पतियों का क़त्ल उनकी बीवियों के हाथ हो जाता है, वहीं कम से कम एक पति अपनी बीवी से ऊब कर खुदकुशी कर लेता है. रही बात वजहों की, तो उनमें सबसे ऊपर नंबर अडल्ट्री यानी विवाहेत्तर संबंधों का ही है.
ज्यादातर मामले ऐसे हैं, जिनमें पत्नियों या पतियों के विवाहेत्तर संबंधों के चलते पत्नियों के हाथों पतियों का कत्ल हुआ है. इसके अलावा पतियों के क़त्ल की दूसरी सबसे बड़ी वजह वजह घरेलू झगड़ों का है. अकेले इस साल 88 पति सिर्फ घरेलू झगड़ों की वजह से अपनी पत्नियों के हाथों मारे गए हैं.
विवाहेत्तर संबंधों के चलते होने वाले कत्ल के ज्यादातर मामलों के सामने आने के बाद अक्सर लोगों को ये कहते सुना जाता है कि इससे बढ़िया तो पार्टनर मूव ऑन ही कर जाता. कत्ल करने की क्या जरूररत थी? लेकिन अवैध संबंधों के चलते क़त्ल की ये वजह जितनी चौंकाती है, कत्ल करने के तरीके भी उतने ही हैरान करते हैं.
फिलहाल कत्ल करने और लाशों को ठिकाने लगाने के ऐसे-ऐसे तरीके पत्नियों ने ढूंढ निकाले हैं कि जुर्म की किताब में अब शायद ही ऐसा कोई तरीका बाकी बचा हो, जिसे इन्होंने ना आज़माया हो. फिर चाहे वो कत्ल के बाद पति को ड्रम में बंद करने का तरीका हो, लूट का ड्रामा रचा कर घर में ही पति को ठिकाने लगा देने की साजिश हो, कत्ल के बाद घर के अंदर फर्श के नीचे पति की लाश दफ्नाने की हो या फिर सांप के कटवा कर उसे मौत के घाट उतारने का हो.
हर तरीका एक से बढ़ कर एक और अजीब है. कर्नाटक के बेलगावी में एक पत्नी ने अपने पति को इलाज के दौरान उसके ड्रिप की बोतल में जहर मिला कर मौत के घाट उतरवा दिया और पुलिस से लेकर फॉरेंसिक एक्सपर्ट्स तक सबकुछ मैनेज भी कर लिया. ये और बात है कि कुछ दिनों के बाद कत्ल में शामिल बीवी के आशिक ने एक वीडियो जारी कर कातिल बीवी की पोल खोल दी और साजिश बेनकाब हो गई.
पतियों के कत्ल के ये आंकड़े तो डरावने हैं ही, कत्ल के तरीके भी बेहद ख़ौफ़नाक है. एनजीओ ने अपनी स्टडी में पाया है कि इस साल हुए साढ़े 5 सौ से ज्यादा पतियों के कत्ल के मामलों में कम से कम 25 मामले तो ऐसे हैं, जिन्हें जघन्य से भी जघन्यतम की श्रेणी में रखा जा सकता है. इन मामले में पति का सिर काट लेने, कत्ल के बाद लाश के टुकड़े-टुकड़े कर देने, खाने-पीने की चीजों में जहर मिला कर मौत के घाट उतार देने, खाई में धकेल देने या फिर जिंदा जला देने जैसे खौफनाक तरीके शामिल हैं.
ज्यादा पीछे जाने की जरूरत नहीं है. अभी चंद रोज़ पहले ही कर्नाटक के हुबली धारवाड़ में एक डॉक्टर पत्नी ने अपने डॉक्टर पति को ना सिर्फ चाकुओं से गोद कर मौत के घाट उतार दिया, बल्कि अपने 8 साल के छोटे से बेटे को भी चाकुओं के वार से बुरी तरह जख्मी कर मरने के लिए छोड़ दिया.
हद तो तब हो गई जब ऐसा करने के बाद पत्नी घर में पति की लाश और अधमरे बेटे को तड़पता छोड़ कर आराम से बिस्तर पर लेटी-लेटी मोबाइल पर रील्स देखती रही और पति और बच्चों के बारे में पूछने पर रिश्तेदारों को झूठ बोलती रही. वो तो भला हो उन रिश्तेदारों और पड़ोसियों का, जिन्हें एक पत्नी के इस व्यवहार पर शक हुआ और उन्होंने खुद जाकर डॉक्टर दंपत्ति का हाल-चाल जानने की कोशिश की और तब इस मामले का खुलासा हुआ.
सुप्रतिम बनर्जी