अमेरिका की एक अदालत में दाखिल आरोप पत्र (Indictment) में खालिस्तानी समर्थक हरदीप सिंह निज्जर की हत्या को लेकर बड़ा दावा किया गया है. दस्तावेज़ों में आरोप लगाया गया है कि लॉरेंस बिश्नोई और गोल्डी बराड़ ने हत्या का आदेश दिया था. आरोप पत्र में यह भी कहा गया है कि हत्या की साजिश को अंजाम देने के लिए निज्जर की तस्वीर और उसके कई पते सहयोगियों तक पहुंचाए गए थे. हालांकि यह ध्यान रखना जरूरी है कि अमेरिकी अदालत में दाखिल आरोपपत्र केवल आरोप हैं और अदालत में दोष साबित होने तक सभी आरोपी कानूनन निर्दोष माने जाते हैं.
अमेरिका की अदालत में दाखिल अभियोग (Indictment) में हरदीप सिंह निज्जर की हत्या से जुड़े मामले में कई गंभीर आरोप लगाए गए हैं. आरोप पत्र के अनुसार, लॉरेंस बिश्नोई और गोल्डी बराड़ ने इस हत्या की साजिश रची और हत्या का आदेश दिया है. अमेरिकी जांच एजेंसियों की ओर से दाखिल दस्तावेज़ों में दावा किया गया है कि पूरी योजना पहले से तैयार की गई थी. हालांकि अदालत में इन आरोपों की अभी सुनवाई होनी बाकी है.
आरोप पत्र में कहा गया है कि लॉरेंस बिश्नोई ने हरदीप सिंह निज्जर की तस्वीर और उसके कई ठिकानों के पते अपने सहयोगियों को उपलब्ध कराए थे. अमेरिकी दस्तावेज़ों के मुताबिक, इन जानकारियों का इस्तेमाल हत्या की योजना को अंजाम देने के लिए किया गया. जांच एजेंसियों का आरोप है कि इस जानकारी के आधार पर हमलावरों ने अपनी रणनीति तैयार की. यह दावा भी अभियोग का हिस्सा है.
अमेरिकी अभियोग में यह भी आरोप लगाया गया है कि लॉरेंस बिश्नोई जेल में बंद होने के बावजूद पूरे ऑपरेशन पर नजर रखे हुए था. दस्तावेज़ों के अनुसार, वह कथित तौर पर तस्करी के जरिए जेल के अंदर पहुंचाए गए मोबाइल फोन का इस्तेमाल कर अपने नेटवर्क से संपर्क में था. इसी मोबाइल के जरिए कथित रूप से ऑपरेशन से जुड़े निर्देश दिए जाते रहे. यह आरोप भी अमेरिकी जांच एजेंसियों की ओर से अदालत में पेश किए गए दस्तावेज़ों में शामिल है.
आरोप पत्र के मुताबिक, 18 जून 2023 को कनाडा के सरे (Surrey) शहर में एक गुरुद्वारे के बाहर हरदीप सिंह निज्जर की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी. इस घटना के बाद कनाडा और भारत के बीच भी कूटनीतिक तनाव देखने को मिला था. अब अमेरिकी अदालत में दाखिल दस्तावेज़ों में इस हत्या की साजिश को लेकर नए आरोप सामने आए हैं. इन आरोपों ने मामले को एक बार फिर चर्चा में ला दिया है.
अमेरिकी अदालत में दाखिल अभियोग में लॉरेंस बिश्नोई और गोल्डी बराड़ पर हत्या की साजिश रचने का आरोप लगाया गया है. दस्तावेज़ों के अनुसार, दोनों ने कथित तौर पर हत्या की पूरी योजना तैयार कर अपने सहयोगियों के जरिए उसे अंजाम दिलाने की कोशिश की.
अमेरिका की अदालत में दाखिल आरोपपत्र में लॉरेंस बिश्नोई के कथित अपराध नेटवर्क को लेकर भी कई गंभीर दावे किए गए हैं. दस्तावेज़ों के अनुसार, बिश्नोई जेल में बंद रहने के बावजूद कई महाद्वीपों में फैले संगठित अपराध नेटवर्क का संचालन कर रहा था. आरोप है कि वह तस्करी के जरिए जेल में पहुंचाए गए मोबाइल फोन और इंटरनेट कॉलिंग (VoIP) डिवाइस का इस्तेमाल कर अपने सहयोगियों से संपर्क बनाए रखता था। अमेरिकी जांच एजेंसियों ने इन दावों को आरोपपत्र का हिस्सा बनाया है.
अमेरिकी अभियोग में यह भी आरोप लगाया गया है कि लॉरेंस बिश्नोई जेल से ही अपने गिरोह के सदस्यों को निर्देश देता था. आरोपपत्र के मुताबिक, उसके निर्देश पर राजनीतिक हत्याएं, हत्या, फायरिंग, रंगदारी, अपहरण, ड्रग तस्करी, मानव तस्करी और अन्य संगठित अपराधों को अंजाम दिया जाता था.
दस्तावेज़ों में यह दावा भी किया गया है कि बिश्नोई का कथित अपराध नेटवर्क कई देशों तक फैला हुआ था और उसके सहयोगी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर वारदातों को अंजाम देते थे. हालांकि, यह सभी बातें अमेरिकी अदालत में दाखिल आरोपपत्र में लगाए गए आरोप हैं और अदालत में दोष साबित होने तक इन्हें अंतिम तथ्य नहीं माना जा सकता.
जांच एजेंसियों का दावा है कि इस साजिश के कई पहलुओं की जांच के बाद ही आरोपपत्र दाखिल किया गया है. हालांकि इन आरोपों पर अंतिम फैसला अदालत ही करेगी. इस मामले में अमेरिकी जांच एजेंसियों की ओर से पेश किए गए आरोपपत्र में कई अहम दावे किए गए हैं, लेकिन फिलहाल ये केवल आरोप हैं.
अदालत में सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष को अपने आरोपों के समर्थन में सबूत पेश करने होंगे. वहीं आरोपियों को भी अपना पक्ष रखने का पूरा कानूनी अधिकार मिलेगा. ऐसे में मामले का अंतिम निष्कर्ष न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही सामने आएगा.
कानूनी प्रक्रिया के तहत यह स्पष्ट करना जरूरी है कि अमेरिकी अदालत में दाखिल Indictment किसी व्यक्ति को दोषी घोषित नहीं करता. यह केवल अभियोजन पक्ष की ओर से लगाए गए आरोपों का औपचारिक दस्तावेज़ होता है. जब तक अदालत में आरोप साबित नहीं हो जाते, तब तक लॉरेंस बिश्नोई, गोल्डी बराड़ और इस मामले के अन्य सभी आरोपी कानूनन निर्दोष माने जाएंगे. इसलिए इस मामले को न्यायिक प्रक्रिया के अंतिम फैसले के संदर्भ में ही देखा जाना चाहिए.
सुबोध कुमार / अरविंद ओझा