पश्चिम बंगालः BJP विधायक की मौत के मामले में नया मोड़, लेन-देन में गड़बड़ी

भाजपा विधायक देबेन्द्र नाथ रॉय बंगाल के उत्तरी दिनाजपुर जिले में अपने निवास से एक किलोमीटर दूर मृत अवस्था में फंदे पर लटके पाए गए थे. वह पार्टी के एक सक्रिय सदस्य थे और एक मिनी बैंक के प्रमुख भी थे.

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BJP विधायक की मौत का मामला अब मिनी बैंक के लेन-देन की तरफ मुड़ गया है (फाइल फोटो) BJP विधायक की मौत का मामला अब मिनी बैंक के लेन-देन की तरफ मुड़ गया है (फाइल फोटो)

मनोज्ञा लोइवाल / परवेज़ सागर

  • कोलकाता,
  • 15 जुलाई 2020,
  • अपडेटेड 8:06 PM IST

पश्चिम बंगाल के उत्तरी दिनाजपुर में बीजेपी विधायक की मौत के मामले ने एक नया मोड़ ले लिया. जहां इस मामले को लेकर बीजेपी हंगामा करने के मूड में नजर आ रही थी, वहीं ये मामला मिनी बैंक स्थापित करने के खेल से जुड़ा है. पुलिस के सूत्रों ने इस बात की पुष्टि कर दी है कि इस केस के पीछे 2 करोड़ रुपये की धनराशि का बड़ा गबन हो सकता है, जो वसूली से जुड़ा हुआ प्रतीत हो रहा है.

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बता दें कि भाजपा विधायक देबेन्द्र नाथ रॉय बंगाल के उत्तरी दिनाजपुर जिले में अपने निवास से एक किलोमीटर दूर मृत अवस्था में फंदे पर लटके पाए गए थे. वह पार्टी के एक सक्रिय सदस्य थे और एक मिनी बैंक के प्रमुख भी थे. दरअसल, 1954 में पंजीकृत मोहिनीगंज बाराबारी बलिया सामाबे कृषि उन्नयन समिति लिमिटेड को वर्ष 2019 में एक मिनी बैंक में बदल दिया गया था. सचिव होने के नाते बीजेपी विधायक ने समिति के प्रबंधक से लेकर अधिकारी तक सब कुछ अपने नियंत्रण में कर लिया था.

उस मिनी बैंक के पास विभिन्न लोगों की कुल जमा राशि लगभग 5 करोड़ रुपये थी. लेकिन 2 करोड़ 37 लाख रुपये ही बैंक से ऋण के तौर पर गए बाकि के 2.60 करोड़ रुपये हिसाब में कम होने के संकेत मिले थे. जिसके बारे में जानकारी नहीं मिल पा रही थी. चूंकि बीजेपी विधायक रॉय बैंक के शीर्ष पद पर थे, इसलिए वे सारे हिसाब-किताब के लिए जिम्मेदार थे.

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सहकारी समिति या एआरसीएस के सहायक रजिस्ट्रार भी पूरे मामले की जांच के लिए दिनाजपुर में हैं. वे मौद्रिक पहलू की जांच करने के साथ-साथ पिछले कुछ वर्षों में किए गए सभी लेन-देन की जांच कर रहे हैं. दूसरी तरफ देबेंद्र नाथ के कॉल रिकॉर्ड की जांच की जा रही है.

पुलिस ने पिछले कुछ हफ्तों में देबेंद्र नाथ के मोबाइल नंबर पर आने-जाने वाली सभी कॉल्स का विवरण मोबाइल नेटवर्क कंपनी से मांगा है. उनके परिवार के कॉल रिकॉर्ड भी चेक किए जाएंगे. क्योंकि उनके परिवार ने दावा किया था कि पिछले कुछ दिनों से विधायक का फोन गायब था और वह अपने घरवालों के फोन का इस्तेमाल कर रहे थे.

विधायक को उस रात को फोन करने वाले व्यक्ति का भी पता लगाया जा रहा है. रॉय की पत्नी ने दावा किया था कि किसी ने उन्हें आधी रात के बाद फोन किया था. जिसके बाद वह घर से चले गए थे. रॉय के घुटने में गंभीर दर्द था और वह बिना किसी सहारे के 100 मीटर भी नहीं चल सकते थे. ना ही अपने वाहन को हर जगह ले जा सकते थे. इसलिए सवाल उठ रहा है कि वह बिना किसी सहायता के एक किलोमीटर से अधिक दूरी तक कैसे पहुंचे?

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इसके अलावा, अगर उन्हें आत्महत्या ही करनी थी, तो वो इतनी दूर क्यों गए? पुलिस अधीक्षक सुमित कुमार ने बताया कि सुसाइड नोट में उल्लेखित एक व्यक्ति निलोय सिंघा को गिरफ्तार कर लिया गया है. उससे पूछताछ की जा रही है. प्रथम दृष्टया यह आत्महत्या का मामला है. लेकिन पुलिस ने इस केस में आईपीसी की धारा यू/एस 34 और 302 भी लगा दी है. अब हत्या के एंगल से भी तफ्तीश की जा रही है. इस मामले में कोई कसर नहीं छोड़ी जाएगी.

पुलिस के मुताबिक गिरफ्तारी के बाद 15 जुलाई को निलोय को स्थानीय अदालत में पेश किया गया है. जबकि विधायक के सुसाइड नोट में उल्लेखित दूसरा व्यक्ति माबूद अली अभी भी फरार है. मालदा से उसके वाहन भी जब्त कर लिए गए हैं.

इस मामले की सीबीआई जांच की मांग को लेकर बुधवार को बीजेपी ने राज्यभर के हर पुलिस स्टेशन पर विरोध प्रदर्शन किया. इससे पहले भाजपा सांसद और नेताओं ने मंगलवार को गृह मंत्री अमित शाह और राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद से भी मुलाकात की थी. उसी के जवाब में टीएमसी सांसदों के एक प्रतिनिधिमंडल ने 15 जुलाई को राष्ट्रपति से मुलाकात की और उन्हें राज्य के सभी घटनाक्रमों के साथ-साथ मिनी बैंक से जुड़ी जानकारी भी दी, जो रॉय की मृत्यु के मामले में अहम भूमिका निभा सकती है.

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बता दें कि हेमताबाद के दिवंगत विधायक को बाराबारी बलिया सामाबे कृषि उन्नयन समिति लिमिटेड (मिनी बैंक) के सचिव के पद पर वर्ष 2012 में चुना गया था. इसका कार्यालय मोहिनीगंज हाट, पीओ बसियन, पीएस रायगंज, उत्तरी दिनाजपुर में स्थित है.

सहकारी समितियों (ARCS) के सहायक रजिस्ट्रार और उनकी टीम ने सभी खातों का सत्यापन किया और पाया कि बैंक में कुल 4 करोड़ 97 लाख रुपये जमा किए गए थे. केवल 2 करोड़ 37 लाख रुपये ही बैंक से ऋण के रूप में स्वीकृत किए गए हैं. 2 करोड़ 60 लाख रुपये से संबंधित दस्तावेज बैंक में नहीं हैं. एआरसीएस और उनकी टीम इस संबंध में एक विस्तृत जांच करेगी और रिपोर्ट देगी.

गौरतलब है कि हेमताबाद के भाजपा विधायक देबेन्द्र नाथ रॉय सीपीआई (एम) के साथ लंबे समय तक एक सामाजिक कार्यकर्ता के रूप में विभिन्न मोर्चों पर काम करते रहे थे. उन्होंने 2019 में लोकसभा चुनाव से ठीक पहले अपनी पार्टी बदल ली थी.

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