यूपी के क‍िडनैपर्स: सूबे की पुलिस से नहीं डरते बेखौफ अपराधी, अंजाम दीं कई घटनाएं

यूपी में किडनैपर इतने बेखौफ हैं कि फिरौती के लिए जो फोन लगाते हैं, उस फोन पर पूरे इत्मीनान से 15-15 मिनट तक बात करते हैं. उनकी बातचीत से कहीं लगता ही नहीं कि उन्हें पकड़े जाने का कोई डर भी है.

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उत्तर प्रदेश में एक बाद एक अपरहण की कई वारदातों को अंजाम दिया गया उत्तर प्रदेश में एक बाद एक अपरहण की कई वारदातों को अंजाम दिया गया

शम्स ताहिर खान / परवेज़ सागर

  • नई दिल्ली,
  • 30 जुलाई 2020,
  • अपडेटेड 9:24 PM IST

  • पुलिस की सख्ती के बावजूद बदमाश बेखौफ
  • कानपुर के बाद गोंडा और गोरखपुर में भी वारदात

कोई चार साल का, कोई 14 साल का तो कोई 35 साल का. कोई चाय वाले का बेटा, कोई पान वाले का बेटा तो कोई बिजनैसमैन का बेटा. यहां तक लैब टेक्नीशियन, बिल्डर और वकील तक का अपहरण हो रहा है. और ये सब कुछ हो रहा है उत्तर प्रदेश में. प्रदेश के बाकी शहर, कस्बे तो छोड़िए. खुद मुख्यमंत्री के अपने घर यानी गोरखपुर तक में बदमाशों को यूपी पुलिस से डर नहीं लगता.

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यूपी में किडनैपर इतने बेखौफ हैं कि फिरौती के लिए जो फोन लगाते हैं, उस फोन पर पूरे इत्मीनान से 15-15 मिनट तक बात करते हैं. उनकी बातचीत से कहीं लगता ही नहीं कि उन्हें पकड़े जाने का कोई डर भी है. जबकि वो फोन पर खुद ये भी कहते हैं कि उन्हें पता है कि फोन सर्विलांस पर है. यानी पुलिस की नजर में है. संजीत यादव के पिता और किडनैपर की एक बातचीत का ऑडियो भी पुलिस के हाथ लगा था.

पूरा एक महीना बीत गया. 27 जून की सुबह कानपुर की नहर में अपहरण के चार दिन बाद संजीत यादव का क़त्ल कर उसकी लाश बहा दी गई थी. कानपुर पुलिस के भरम में आकर इस अभागे परिवार ने फिरौती के तीस लाख रुपये भी दे दिए और सितम देखिए कि रिहाई तो दूर अब तक उसकी लाश भी नहीं मिली. लाश की तलाश अभी भी जारी है.

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कानपुर पुलिस की काहिली की किरकिरी होने के बाद सरकार ने कई पुलिसवालों को दर बदर कर दिया है. इसी चक्कर में कानपुर के कप्तान भी नप गए. अब कानपुर को नया कप्तान मिला है. नए कप्तान ने संजीत यादव के परिवार को नई उम्मीदें दी हैं. उन्होंने वादा किया है कि वो इस पूरे मामले का सच सामने लेकर आएंगे.

वैसे संजीत यादव के अपहरण के बाद अब किडनैपर और संजीत के पिता की बातचीत का ऑडियो भी सामने आया. किडनैपर की आवाज़ से साफ़ है कि वो आवाज़ बदल कर बात करने की कोशिश कर रहा था. फिरौती की रकम फिरौती देने की तारीख और फिरौती के लिए तय जगह के अलावा इस बातचीत में बहुत कुछ था.

वैसे हम आपको बता दें कि संजीत का किडनैपर फोन कर जब ये फिरौती मांग रहा था, उससे पहले ही वो संजीत का कत्ल कर चुका था. यही वजह है कि संजीत के घरवालों के बार-बार गिड़गिड़ाने के बावजूद वो संजीत से फोन पर उनकी बात नहीं करा पा रहा था. किडनैपर से फोन पर बातचीत के बाद ही 13 जुलाई को संजीत के पिता तय जगह पर 30 लाख रुपये लेकर गए. साथ में पुलिस भी थी. पैसे पुल के नीचे फेंक दिए. जैसा किडनैपर ने कहा था. मगर ना संजीत मिला, ना पैसे.

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गौरतलब है कि संजीत यादव के पिता को किडनैपर ने जब फिरौती के लिए फोन किया तो एक और बात कही थी. कहा था कि इसी किडनैपिंग के मामले में राहुल नाम के एक लड़के को पुलिस ने पकड़ रखा है. पहले पुलिस से उस लड़के को छुड़वाओ. पर इस लड़के का किडनैपर से रिश्ता क्या था?

दरअसल, कुछ समय पहले राहुल यादव नाम के उस लड़के से संजीत यादव की बहन के रिश्ते की बात चल रही थी. मगर राहुल के बारे में ठीक जानकारी नहीं मिलने की वजह से संजीत के पिता चमन यादव ने इस रिश्ते के लिए मना कर दिया था. तभी से राहुल यादव संजीत के परिवार से दुश्मनी मान बैठा था. संजीत अपहरण कांड में राहुल की भूमिका भी उजागर हुई. लेकिन पूरे मामले में बहुत देर हो गई. पुलिस ने लापरवाही ना बरती होती तो आज शायद संजीत बच जाता.

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