जिस पहाड़ी से केतन को दिया धक्का, 10 दिन बाद उसी जगह पहुंची सिया! डमी ट्रायल ने खोले कई राज

पुणे के लोहगढ़ किले में केतन हत्याकांड की जांच में बड़ा खुलासा हुआ है. पुलिस और फॉरेंसिक टीम ने सिया के साथ डमी ट्रायल कर यह समझने की कोशिश की कि केतन की मौत हादसा थी या उसे धक्का देकर हत्या की गई थी. जानिए इस रिक्रिएशन से जुड़ी पूरी कहानी.

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पुलिस सिया की निशानदेही और पूछताछ में हर पहलू को खंगाल रही है (फोटो-ITG) पुलिस सिया की निशानदेही और पूछताछ में हर पहलू को खंगाल रही है (फोटो-ITG)

aajtak.in

  • पुणे,
  • 30 जून 2026,
  • अपडेटेड 4:31 PM IST

340 फीट गहरी खाई, पहाड़ की खतरनाक चोटी और वहां मौजूद एक ऐसा राज, जिसने पुलिस को भी हैरान कर दिया. जिस जगह से 18 जून को केतन अग्रवाल की मौत हुई थी, ठीक 10 दिन बाद वहीं फिर से एक 'धक्का' दिया गया. लेकिन इस बार खाई में गिरने वाला कोई इंसान नहीं, बल्कि हत्या की गुत्थी को सुलझाने के लिए एक पुतला था. केतल का पुतला. जिसे सिया ने धक्का दिया. इसी बीच सवाल सिर्फ एक था- क्या वाकई केतन की मौत हादसा थी या सोची-समझी साजिश? चलिए जानते हैं इस पूरे घटनाक्रम की कहानी.

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28 जून 2026, सुबह 8 बजे, लोहगढ़ किला, पुणे
ठीक 10 दिन बाद सिया इस क़िले के ऊपर वहीं खड़ी थी, जहां से 18 जून को उसने चेतन के साथ मिलकर केतन को धक्का दिया था. केतन की मौत के 10 दिन बाद सिया को आज एक बार फिर से ठीक वहीं से केतन को नीचे खाई में दोबारा धक्का देना था. ऊपर पहाड़ की चोटी पर पुलिस और फ़ॉरेंसिक की टीम सिया के साथ खड़ी थी. नीचे खाई में पुलिस और फॉरेंसिक की एक दूसरी टीम खड़ी थी.

ऊपर सब कुछ तय होने और सिया के इशारे के बाद पुलिसवालों ने सिया को केतन को धक्का देने के लिए कहा. ठीक उसी तरह जैसे उसने 18 जून की सुबह केतन को धक्का दिया था. उतनी ही ताक़त और उतनी ही फ़ोर्स के साथ. पहाड़ की चोटी और नीचे खाई में पुलिस और फ़ॉरेंसिक टीम बिल्कुल तैयार थी. इधर, इशारा होता है, उधर सिया केतन को चोटी से नीचे धक्का देती है.

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खाई से चोटी की ऊंचाई 340 फ़ीट के आसपास है. लिहाज़ा नीचे से कैमरा चीज़ों को साफ-साफ नहीं पकड़ पाता. लेकिन बारिक़ी से और बेहद ध्यान से देखने पर नज़र आएगा कि ऊपर से किसी को धक्का दिया गया है और वो नीचे की तरफ़ लुढ़क कर गिर रहा है. अब ज़ाहिर है केतन की मौत तो 18 जून को ही हो चुकी थी, तो सिया केतन की मौत के 10 दिन बाद उसे दोबारा तो नहीं मार सकती.

लेकिन 18 जून को सिया ने केतन को धक्का देकर कैसे मारा? बस यही जानने के लिए पुणे पुलिस और फॉरेंसिक टीम के महारथी सिया को अपने साथ लेकर क़िले की ठीक उसी चोटी या जगह पर पहुंचे थे. जहां से केतन को धक्का दिया गया था. दरअसल, ये एक रिक्रिएशन था. इसे आप डमी ट्रायल भी कह सकते हैं. पुलिस से ज़्यादा फॉरेंसिक टीम ये जांचना और परखना चाहती थी कि केतन की मौत पांव फिसलने से हुई थी या धक्का देने से.

क्योंकि इन दोनों ही तरीक़ों से होने वाली मौत में ज़रा सा फ़र्क होता है. अगर कोई फिसल कर चोटी से नीचे गिरता है, तो उसकी बॉडी नीचे खाई में दूर जाकर नहीं गिरती बल्कि पहाड़ी से सटकर ही नीचे गिरती है. पर अगर किसी को पहाड़ी से धक्का दिया जाए तो धक्का देने के फ़ोर्स की वजह से गिरने वाला नीचे पहाड़ के दामन से कुछ दूरी पर जाकर गिरेगा. केतन की लाश खाई में जिस जगह से बरामद हुई थी. पहाड़ी की दामन से उस दूरी को नापने के लिए ही डमी ट्रायल हो रहा था.

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इस डमी ट्रायल या रिक्रिएशन से पहले सिया से लंबी पूछताछ हुई थी कि उसने किस पोजिशन में और कितनी ताक़त से केतन को धक्का दिया था. सिया के बयान के बाद फ़ॉरेंसिक टीम ने केतन के कद काठी और वज़न का एक पुतला बनाया. उसी पुतले को लेकर टीम 28 जून की सुबह पहाड़ी पर पहुंची. 18 जून को सिया और केतन किस रास्ते से गए, कहां कहां ठहरे और फिर वो आख़िरी जगह कौन सी थी, जहां से केतन को धक्का दिया गया था? ये सारी बाते, सारे रास्ते ख़ुद सिया पुलिस को बताते हुए ऊपर तक पहुंची थी.

फिर उसी की निशानदेही पर ठीक उसी जगह उस पुतले को खड़ा किया गया और सिया ने अपने हिसाब से उसी फ़ोर्स या ताक़त के साथ पुतले की शक्ल में एक तरह से केतन को 10 दिन के अंदर दोबारा खाई में फेंका.

हांलाकि रिकॉर्ड पर अब तक पुलिस ने ये ख़ुलासा नहीं किया है कि 18 जून को केतन को सिया ने धक्का दिया था या चेतन ने. या फिर दोनों ने मिलकर. लेकिन इस डमी ट्रायल के ज़रिए ख़ुद पुलिस ने इस सवाल का जवाब दे दिया कि असल में केतन को धक्का सिया ने ही दिया था. क्योंकि अगर ऐसा नहीं होता तो डमी ट्रायल में सिया नहीं चेतन हिस्सा ले रहा होता. कुछ दिन पहले चेतन के पिता ने भी ये बात कही थी कि जब वो चेतन से मिलने पुलिस स्टेशन गए थे, तब चेतन ने उनसे कहा था कि केतन को उसने नहीं सिया ने धक्का दिया था.

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रिक्रिएशन के दौरान मीडिया को किले पर जाने से रोक दिया गया था. लिहाज़ा पूरी मीडिया क़िले के एंट्री गेट पर सिया और पुलिस का इंतज़ार कर रही थी. जैसे ही सिया नीचे उतरी एक रिपोर्टर की आवाज़ ज़ोर से गूंजी सिया आपने केतन को क्यों मारा? हांलाकि मीडिया के इन सवालों के जवाब तो सिया ने नहीं दिए. उसने ये नहीं बताया कि उसने केतन को क्यों मारा. लेकिन सिया ने पुलिस कस्टडी में पूछताछ के दौरान पुणे पुलिस को इसका जवाब ज़रूर दिया कि उसने केतन को क्यों मारा था? 

पुणे पुलिस सूत्रों के मुताबिक फरवरी में सगाई होने के बाद से ही सिया परेशान रहने लगी थी. लेकिन सगाई के बाद जैसे ही दोनों के घरवालों ने 25 नवंबर को सिया और केतन की शादी तय कर दी तब वो ज़्यादा घबरा गई. इस बारे में चेतन और सिया ने कई बार लंबी बात की. चेतन ने सिया को ये कहा भी कि वो घरवालों को साफ़ साफ़ बता दे कि उसे केतन से शादी नहीं करनी. लेकिन सिया घरवालों से इस रिश्ते को तोड़ने की बात करने की हिम्मत नहीं जुटा सकी. उसे लगा कि अगर उसने शादी के लिए मना किया तो उसके मां-बाप और भाई का दिल टूट जाएगा. फिर बिरादरी में भी बदनामी होगी. 

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पुलिस सूत्रों के मुताबिक जब सिया ने घरवालों से इस बारे में बात करने से साफ मना कर दिया तब चेतन ने पहली बार उससे कहा कि वो दोनों कहीं भाग जाते हैं. फिर भाग कर शादी कर लेंगे. तब सिया ने चेतन को जवाब दिया था कि उसके लिए भागने से ज़्यादा आसान काम है केतन की जान लेकर उसे रास्ते से हटा देना. वो सिया ही थी जिसने चेतन से कहा कि अगर केतन को कुछ हो जाता है तो ये शादी अपने आप टूट जाएगी. फिर वो बड़ी आसानी से चेतन से शादी कर सकती है. दरअसल, सिया को चेतन से शादी करने के लिे तीन साल का वक्त चाहिए था. और तीन साल का ये वक्त खरीदने के लिए ही उसने केतन को मार डाला.

सिया ने केतन को मारने का फ़ैसला तो कर लिया था पर उसे कैसे मारेंगे ये उसे समझ नहीं आ रहा था. शुरुआत में चेतन केतन को मारने के ख़िलाफ था. वो भाग कर शादी करना चाहता था. लेकिन फिर वो भी इस साज़िश में सिया के साथ शामिल हो गया. दोनों ने केतन को मारने के लिए सबसे पहले गूगल में मौत के तरीक़े सर्च किए. बहुत से तरीके मिले पर दोनों कोई ऐसा तरीक़ा चाहते थे जिससे किसी को शक ही ना हो. किस्मत का खेल देखिए इसी बीच 31 मई को ट्रेकिंग का शौकीन केतन पहली बार सिया को अपने साथ लोहगढ़ किले ले जाता है. यहां आने के बाद 31 मई को पहली बार सिया को आइडिया मिल चुका था. आइडिया केतन को मारने के तरीक़े का. उसने उसी दिन तय कर लिया था कि वो केतन को ऊपर से खाई में धक्का दे देगी. इसके बाद वो जून के पहले हफ़्ते में चेतन के साथ फिर से लोहगढ़ क़िले गई. वहां दोनों ने पूरे क़िले का दौरा किया. जगह की रेकी की. सीसीटीवी कैमरों को देखा और फिर वो स्पॉट फ़ाइनल किया जहां से केतन को धक्का दिया जाना था.

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पुलिस पूछताछ में ये भी पता चला कि सिया और चेतन ने ना सिर्फ क़िले की रेकी की थी, गूगल पर मौत के तरीक़े ढूंढे थे बल्कि उन सवालों और जवाबों के रिहसर्ल भी किए थे जो पकड़े जाने पर पुलिस उनसे पूछती और जिसका जवाब उन्हें देना था. इन लोगों ने बाक़ायदा एक एक सवाल और जवाब तक रट लिए थे. इतना ही नहीं दोनों ने ये भी तय किया था कि 16 जून के बाद दोनों एक दूसरे को ना फ़ोन करेंगे ना मैसेज. यहां तक की दोनों ने अपने अपने मोबाइल से सभी चैट और तस्वीरें तक डिलीट कर दी थीं. फिर उन डिलिटड आइटम को रिसाइकिल बिन से भी डिलीट कर दिया था.

18 जून को यानि जिस दिन केतन को धक्का दिया गया, उस दिन सिया और केतन तो साथ थे लेकिन चेतन अपनी इसी स्कूटी से घर से लोहगढ़ क़िले के लिए निकला. चूंकि चेतन और सिया ने क़िले की रेकी कर रखी थी इसलिए उन्हें ये पहले से पता था कि लोहगढ़ किले में कुल तीन जगहों पर सीसीटीवी कैमरे लगे हैं. पहला किले के इस एंट्री गेट पर. दूसरा क़िले और सेल्फ़ी प्वॉइंट के ठीक बीच में एक ऐसी जगह पर जहां लोग अमूमन चढ़ाई के दौरान सुस्ताने के लिए रुकते हैं. जबकि तीसरा कैमरा जिस जगह क़िले की सीढ़ियां ख़त्म होती हैं और सेल्फ़ी प्वॉइंट शुरु वहीं लगा है.

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चूंकि चेतन हर कैमरे की लोकेशन को जानता था, इसलिए उसे पता था कि पहला कैमरा एंट्री प्वॉइंट पर है. कैमरे में उसका चेहरा क़ैद होगा. इसीलिए 18 जून की सुबह चेतन ने अपना चेहरा छुपाने के लिए हुडी पहन लिया था. ये उसी एंट्री गेट के सीसीटीवी कैमरे में चेतन की तस्वीर कैद है. जिसमें चेतन की पीठ पर पिट्ठू बैग भी देखा जा सकता है. जिस जगह केतन को धक्का दिया गया था, उससे ठीक पहले चेतन ने अपनी हुडी उतार दी थी और पिट्ठू बैग से टीशर्ट निकाल कर पहन ली थी. 

केतन को धक्का दिए जाने के बाद चेतन वापसी में कुछ दूरी पर जाकर फिर से अपनी टीशर्ट उतारता है और हुडी पहन लेता है. उसने ये सब कुछ प्लान के तहत किया था. प्लान ये कि अगर गलती से कोई चश्मदीद उसे और सिया को देख ले तो वो उसे टी शर्ट पहने नज़र आए. जबकि किले के एंट्री प्वॉइंट पर वो हुडी में क़ैद हुआ था. इससे ये साबित हो जाता है कि ऊपर केतन को धक्का मारने वाले शख्स के हुलिए और कपड़े अलग थे. जबकि चेतन तो हुडी में था.

सिया की पूरी साज़िश को समझने के लिए पुणे पुलिस ने एक एक कर अलग-अलग सिया के भाई साहिल गोयल और फिर मां-बाप को पूछताछ के लिए बुलाया था. सिया के भाई साहिल को सबसे पहले पुलिस ने पूछताछ के लिए बुलाया था. असल में 6 जून को प्रीवेडिंग शूट के लिए केतन और सिया बाली जा रहे थे. इंडोनेशिया में बाली की फ्लाइट पकड़ने के लिए सभी पुणे से एक कैब से मुंबई गए थे. क्योंकि फ़्लाइट मुंबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट से ही थी. 

पर सिया बाली जाना नहीं चाहती थी. क्योंकि उसे केतन को ठिकाने लगाना था. लिहाज़ा, साज़िश के तहत उसने रास्ते में ही एक रेस्त्रां में केतन का पासपोर्ट उसके बैग से निकाल कर उसे फाड़ कर वॉशरूम में फ्लश कर दिया था. चूंकि साहिल भी उस वक्त सिया के साथ था इसलिए पुलिस ने पासपोर्ट को लेकर साहिल से भी सवाल पूछे. पुलिस ने साहिल से सिया को लेकर क्या क्या पूछा हालाकि इसके बारे में साहिल ने कुछ नहीं बताया.

उधर, सात दिनों की सिया की पुलिस हिरासत सोमवार को ख़त्म हो गई. एक सवाल हरेक के मन में था कि क्या सिया के मां-बाप या भाई सिया के लिए वकील करेंगे. क्योंकि सिया के मां-बाप ने ये कहा था कि अगर उनकी बेटी गुनहगार है तो उसे फांसी दे देनी चाहिए या उसी किले से उसे धक्का देकर मार देना चाहिए. लेकिन 29 जून को जब सिया और चेतन की पुलिस हिरासत की मियाद ख़त्म होने वाली थी और कोर्ट में जिरह तब पहली बार ये सामने आया कि सिया के घरवाले पिछले चार दिनों से उसके लिए वकील ढूंढ रहे थे. 

हांलाकि हुआ ये कि एक वकील साहब जिन्हें परिवार ने सिया के केस की पैरवी करने के लिए हायर भी नहीं किया वो ख़ुद अपनी मर्ज़ी से सिया का केस लड़ने कोर्ट पहुंच गए. जबकि सिया के भाई ने केस की पैरवी के लिए किन्ही और वकील साहब को ही हायर किया है. फिर सोमवार को कोर्ट में पेशी के बाद सिया और चेतन को अदालत ने 4 और दिन के लिए पुलिस हिरासत में भेज दिया. 

पुलिस की दलील थी कि सिया को पुणे और मुंबई के बीच उस जगह भी ले जाना है, जहां उसने बाली जाने से ऐन पहले केतन का पासपोर्ट फाड़ कर उसे वॉशरूम में फ्लश कर दिया था. इसके अलावा सिया के बाद चेतन को भी पुलिस अपने साथ लेकर लोहगढ़ किले ले जाएगी. वैसे इस बीच एक अजीब सच भी सामने आया है. सिया और केतन का रिश्ता तय करने से पहले दोनों परिवारों ने अपने अपने पंडित से दोनों की कुंडली दिखाई थी. 

सिया और केतन की कुंडली बहुत अच्छे से मिल गई थी. इसी के बाद दोनों की सगाई हुई थी. यानि अब कोई इसे कम से कम कुंडली का दोष तो नहीं कह सकता. कहना भी नहीं चाहिए. क्योंकि दोष कुंडली का नहीं ख़ूनी इश्क़ का था. जिसके दोषी दो लोग हैं- सिया और चेतन.

(पुणे से गोपाल हारने और श्रीकृष्ण पांचाल के साथ ओमकार वाबले)

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