वारदात: आखिर पाकिस्तान कैसे बन गया आतंकिस्तान?

अमेरिका ने कहा है कि पाकिस्तान आतंक की जन्नत है और आतंकी संगठनों को पनाह देता है. ज़ाहिर है किसी आज़ाद मुल्क के लिए दुनिया के सबसे ताकवर मुल्क का ऐसा कहना बेहद गंभीर बात है. पर सवाल ये है कि आखिर पकिस्तान देखते ही देखते आतंक की जन्नत कैसे बन गया? वो कौन लोग हैं जिन्होंने एक आज़ाद देश को आतंक की भट्टी में झोंक दिय़ा? हम आपको बताएंगे कि आखिर पाक-स्थान कैसे आतंकिस्तान बन गया.

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पाकिस्तान ने जिस आतंकवाद को पनाह दी वही उसके लिए सिरदर्द बन गया है पाकिस्तान ने जिस आतंकवाद को पनाह दी वही उसके लिए सिरदर्द बन गया है

परवेज़ सागर / शम्स ताहिर खान

  • नई दिल्ली,
  • 21 जुलाई 2017,
  • अपडेटेड 2:36 PM IST

अमेरिका ने कहा है कि पाकिस्तान आतंक की जन्नत है और आतंकी संगठनों को पनाह देता है. ज़ाहिर है किसी आज़ाद मुल्क के लिए दुनिया के सबसे ताकवर मुल्क का ऐसा कहना बेहद गंभीर बात है. पर सवाल ये है कि आखिर पकिस्तान देखते ही देखते आतंक की जन्नत कैसे बन गया? वो कौन लोग हैं जिन्होंने एक आज़ाद देश को आतंक की भट्टी में झोंक दिय़ा? हम आपको बताएंगे कि आखिर पाक-स्थान कैसे आतंकिस्तान बन गया.

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आतंक की जन्नत है पाकिस्तान

पाकिस्तान यानी पाक-स्थान, मतलब पाक जगह, लैंड ऑफ़ फ़ेयर पीपुल. यही असली मतलब है का. पाक फ़ारसी शब्द है जबकि स्थान हिंदी. इन दोनों शब्दों को मिला कर बना था पाकिस्तान. पर अब? अब क्या है पाकिस्तान? 'आतंक की जन्नत है पाकिस्तान' जी हां. अब सिर्फ भारत ही नहीं बल्कि दुनिया के सबसे ताकतवर देश का भी यही कहना है कि पाकिस्तान आतंक की जन्नत है. और जब अमेरिका ऐसा बोलें तो उसे हलके में नहीं लिय़ा जा सकता. कंट्री रिपोर्ट ऑफ टेररिज़्म के ज़रिए अमेरिकी गृह मंत्रालय ने साफ कर दिया है कि तालिबान, हक्कानी नेटवर्क, लश्कर-ए-तैयबा, जैश-ए-मोहम्मद और जमात-उद-दावा जैसे आतंकी संगठनों को शह देने वाला पाकिस्तान अब खुले तौर पर आंतक की जन्नत बन चुका है.

पाकिस्तान में पल रहे आतंकी

दुनिया के सबसे ताकतवर देश अमेरिका ने भी मान लिया है कि पाकिस्तान में आतंकी पल रहे हैं. अमेरिका ये भी मानता है कि आतंकियों का स्वर्ग है पाकिस्तान. पाकिस्तान को 'आतंकी राष्ट्र' घोषित करेगा अमेरिका? आतंक के छुरे से हिंदुस्तान पर घात लगाने वाला मुल्क खुद उससे लड़ने के नाम पर अमेरिका और दुनिया की आंखों में धूल झोंकने में नाकामयाब रहा. अब उसका असली चेहरा सामने आ गया है. जिस अमेरिका के दम पर पाकिस्तान खुद को बेफिक्र समझता है. अब उसी अमेरिका ने पाकिस्तान की हकीकत दुनिया के सामने बेनकाब कर दी है. हालांकि ये पहली बार नहीं है, जब अमेरिका ने पाकिस्तान को आतंकियों की जन्नत कहा है.

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आतंकियों की पनाहगाह है पाकिस्तान

तो क्या सचमुच पाक सरज़मीं अब आतंक की जन्नत बन चुकी है? आखिर कैसे एक पूरा मुल्क देखते ही देखते आतंक के चंगुल में फंस गया? कैसे एक पूरे मुल्क पर आतंकवादी संगठनों और उनके आकाओं ने कब्जा कर लिया? जवाब जानने से पहले हिंदुस्तान के किसी भी ज़ख्मी शहर को याद कीजिए, 93 के लहुलुहालन मुंबई की कराह सुनिए. सबसे हरे ज़ख्म पठानकोट की आह महसूस कीजिए. आतंकवादी संगठन और उऩके आकाओं के नाम याद कीजिए. देश के सबसे बड़े भगौड़े डॉन के बारे में सोचिए. बगदादी से पहले दुनिया के सबसे बड़े आतंकवादी के खात्मे के बारे में गौर कीजिए. कश्मीर में झांकिए. इसके बाद आपके सुर और अमेरिका के बोल अलग नहीं होंगे. क्योंकि सचमुच आतंक की जन्नत बन चुका है पाकिस्तान.

आतंकियों को अपनी गोद बैठाया पाक ने

आतंकवाद के लिए पाकिस्तान किसी और को जिम्मेदार नहीं ठहरा सकता. क्योंकि जो उसने बोया है वही आज काट रहा है. दुनिया के सबसे बड़े आतंकवादी ओसामा बिन लादेन को अपने घर एबटाबाद में छुपा कर रखा. कश्मीर पर बुरी नजर ड़ालने के लिए पाक अधिकृत कश्मीर में आतंकवादियों को पैदा किया. लश्कर सरगना हाफिज सईद को पनाह दी. जैश के चीफ मौलाना मसूद अजहर के सिर पर हाथ रखा, अफगानिस्तान से भागे तो पाकिस्तान में तालिबान के लिए जमीन मुहैया कराई. शिया-सुन्नी लड़ाई को सियासत के लिए हवा दी. और भारत का मोस्ट वांटंड डॉन दाऊद इब्राहीम जब मुंबई में 93 करके हवा हुआ तो उसे भी अपनी गोद में छुपा लिया.

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पाकिस्तान को चलाते हैं ISI और सेना

अब इतने सारे अमन और इंसानियत के दुश्मन अगर एक साथ किसी मुल्क में हों तो वो मुल्क नहीं तो और क्या कहलाएगा? हां, पाक स्थान से आतंक की जन्नत बनने के लिए थोड़ी बहुत मुरव्वत अगर किसी के साथ बरती जा सकती है, तो बस पाकिस्तानी प्रधानमंत्री नवाज़ शऱीफ से. वो भी क्या करें. पूरा पाकिस्तान और दुनिया जानती है कि उस पाक स्थान को शऱीफ नहीं पाक फौज और आईएसआई ही चलती है. इन दोनों से टकराने का मतलब क्या होता है ये पाकिस्तान के सारे सियासतदान जानते हैं. जनरल अयूब से लेकर जनरल जियाउल हक और उसके बाद जरनल परवेज़ मुशर्रफ से पहले का पाकिस्तान भी और बाद का पाकिस्तान भी. पर सच जानने के बाद भी ये सवाल हमेशा उठता है कि आखिर पाकिस्तान ने अपने पाक स्थान को आतंक की जन्नत बनने ही क्य़ों दिया?

जो बोया, वही काटा

पुरानी कहावत है कि इंसान जो बोता है, वही काटता है. आतंक की आग में बुरी तरह झुलस रहे पड़ोसी मुल्क की कहानी कुछ ऐसी ही है. पाकिस्तान में अलग-अलग वक्त पर अलग-अलग हुक्मरानों और फ़ौज ने आतंकवाद को अपने-अपने फायदे के लिए इस्तेमाल किया. अब नतीजा ये है कि वही आतंकवाद सबसे ज़्यादा खुद पाकिस्तान को लहूलुहान कर रहा है.

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पाकिस्तान को मिले ये जख्म

21 दिसंबर 2007, पेशावर की मसजिद में फिदायीन हमले में 50 लोगों की मौत हुई. 1 जुलाई 2010, लाहौर के दाता दरबार पर फिदायीन हमला हुआ, जिसमें 50 लोगों की मौत हुई. 2 नवंबर 2014, वाघा बॉर्डर पर झंडे की रस्म के दौरान फिदायीन हमला हुआ, जिसमें 60 लोगों की जान चली गई. 16 दिसंबर 2014 को पेशावर के आर्मी स्कूल पर तहरीक-ए-तालिबान ने हमला किया, जिसमें 145 स्कूली बच्चों की दर्दनाक मौत हुई. 20 जनवरी 2016, बाचा ख़ान य़ूनिवर्सिटी, पेशावर में आतंकी हमले के दौरान 25 बच्चे मौत के मुंह में समा गए.

कभी भी कहीं भी हो जाता है आतंकी हमला

पाकिस्तान में ऐसे आतंकी हमले और उनसे होनेवाली मौतों की फेहरिस्त ठीक कहां से शुरू होती है और कहां जा कर ख़त्म होती है, ये सही-सही किसी को नहीं पता. इसकी वजह भी सीधी सी है कि पाकिस्तान में कब कहां कैसे और किधर से आतंकवादी हमला हो जाए, ये ना तो वहां की पुलिस को पता है, ना सुरक्षा एजेंसियों को और ना ही गद्दी पर बैठे सियासी हुक्मरानों को. यही वजह है कि आज दुनिया पाकिस्तान को आतंक की जन्नत कह कर पुकारने लगी है. हालांकि एक हक़ीक़त ये भी है कि अपनी ज़मीन पर आतंकवादियों को पनाह देने वाला पाकिस्तान अब खुद ही इसका सबसे ज़्यादा शिकार हो रहा है.

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लेकिन ये सबकुछ जानते हुए भी पाकिस्तानी हुक्मरान, वहां की फ़ौज और आईएसआई जैसी एजेंसियां अपने-अपने मकसद की खातिर दहशतगर्दी के खिलाफ़ संजीदा नहीं है. बल्कि कभी वो खुद को आतंकवाद का शिकार बता कर रोना रोने लगते हैं और कभी दूसरों पर इल्ज़ाम मढ़ देते हैं. ऐसे में पाकिस्तान का आने वाला कल खुशनुमा होगा, फिलहाल इस बात की कोई उम्मीद नज़र नहीं आती.

 

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