₹967 करोड़, 59 KM, 220 की स्पीड पर ट्रेनों का ट्रायल! कंप्लीट होने वाला है हाई स्पीड टेस्ट ट्रैक का काम

भारतीय रेलवे का पहला डेडिकेटेड हाई स्पीड टेस्ट ट्रैक अब अंतिम चरण में पहुंच गया है. राजस्थान में गुढ़ा और थथाना मिठरी के बीच 59 किलोमीटर लंबा यह ट्रैक ₹967.07 करोड़ की लागत से तैयार हो रहा है. रेलवे के मुताबिक, यहां वंदे भारत समेत अलग-अलग रोलिंग स्टॉक की टेस्टिंग 2027-28 से शुरू हो सकती है.

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भारत का पहला हाई-स्पीड टेस्ट ट्रैक अपने निर्माण के अंतिम चरण में है. (Photo: X/@NWRailways) भारत का पहला हाई-स्पीड टेस्ट ट्रैक अपने निर्माण के अंतिम चरण में है. (Photo: X/@NWRailways)

आजतक बिजनेस डेस्क

  • जयपुर,
  • 25 अगस्त 2026,
  • अपडेटेड 12:19 PM IST

भारतीय रेलवे का पहला डेडिकेटेड हाई स्पीड टेस्ट ट्रैक अब निर्माण के अंतिम चरण में पहुंच गया है. राजस्थान में गुढ़ा और थथाना मिठरी के बीच करीब 59 किलोमीटर लंबा यह टेस्ट ट्रैक ₹967.07 करोड़ की लागत से तैयार किया जा रहा है. रेलवे के मुताबिक, इस हाई स्पीड टेस्ट ट्रैक पर वंदे भारत (Vande Bharat) समेत अलग-अलग तरह के रोलिंग स्टॉक की टेस्टिंग और ट्रायल 2027-28 से शुरू होने की उम्मीद है. यह प्रोजेक्ट रिसर्च डिजाइन एंड स्टैंडर्ड्स ऑर्गनाइजेशन (RDSO) विकसित कर रहा है, जबकि इसका प्रशासनिक दायरा नॉर्थ वेस्टर्न रेलवे (NWR) के पास है.

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यह टेस्ट ट्रैक जोधपुर डिवीजन के नावा इलाके में बनाया जा रहा है और जयपुर से करीब 70 किलोमीटर दूर स्थित है. नॉर्थ वेस्टर्न रेलवे के चीफ पब्लिक रिलेशन ऑफिसर (CPRO) अमित सुदर्शन के मुताबिक, इस फैसिलिटी से रेलवे को नई टेक्नोलॉजी को तेजी से अपनाने में मदद मिलेगी. डेडिकेटेड टेस्ट ट्रैक प्रोजेक्ट को दो चरणों में मंजूरी दी गई थी. इसके पहले फेज को दिसंबर 2018 में और दूसरे फेज को नवंबर 2021 में मंजूरी मिली. पूरे प्रोजेक्ट में 7 बड़े पुल, 129 छोटे पुल और 4 स्टेशन शामिल हैं. ये स्टेशन गुढ़ा, जब्दीनगर, नावा और मिठरी हैं.

गुढ़ा स्टेशन में भी किए गए बदलाव

टेस्ट ट्रैक को मौजूदा रेलवे नेटवर्क से जोड़ने के लिए गुढ़ा स्टेशन पर जरूरी बदलाव का काम पूरा कर लिया गया है. नॉर्थ वेस्टर्न रेलवे ने यहां रिसर्च डिजाइन एंड स्टैंडर्ड्स ऑर्गनाइजेशन के डेडिकेटेड टेस्ट ट्रैक को जोड़ने के लिए मौजूदा क्योसान इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग सिस्टम में संशोधन किया है. इसके अलावा गुढ़ा एंड स्टेशन की तरफ स्लॉट कंट्रोल और सभी 18 पॉइंट के पॉइंट इंडिकेशन सर्किट में भी बदलाव किए गए हैं. रेलवे के मुताबिक, ये संशोधन नई सुरक्षा गाइडलाइंस को ध्यान में रखकर किए गए हैं. इनका मकसद पॉइंट ऑपरेशन के दौरान सुरक्षा को और बेहतर करना है.

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ट्रैक पर होंगे अलग-अलग टेस्टिंग लूप

इस 59 किलोमीटर लंबे टेस्ट ट्रैक में अलग-अलग तरह की टेस्टिंग के लिए कई सेक्शन बनाए गए हैं. इसमें 23 किलोमीटर की मेन लाइन और गुढ़ा में 13 किलोमीटर का हाई स्पीड लूप शामिल है. नावा में 3 किलोमीटर का एक्सेलरेटेड टेस्टिंग लूप और मिठरी में 20 किलोमीटर का कर्व टेस्टिंग लूप बनाया जा रहा है. रोलिंग स्टॉक की स्टैटिक टेस्टिंग के लिए 4.5 किलोमीटर लंबा ट्विस्टेड ट्रैक पहले ही पूरा होकर कमिशन किया जा चुका है.

सितंबर तक पूरा होगा हाई स्पीड सेक्शन

रेलवे के मुताबिक, 31.5 किलोमीटर हाई स्पीड स्ट्रेच और 3 किलोमीटर एक्सेलरेटेड टेस्टिंग लूप का काम लगभग पूरा हो चुका है. इसे सितंबर 2026 तक फाइनल करने का लक्ष्य है. वहीं, मिठरी का 20 किलोमीटर लंबा कर्व टेस्टिंग लूप भी एडवांस स्टेज में है और 2026 के अंत तक इसके चालू होने की उम्मीद है.

यह भारत का पहला ऐसा टेस्ट ट्रैक होगा

यह फैसिलिटी बस ट्रेनों की स्पीड और परफॉर्मेंस जांचने तक सीमित नहीं होगी. यहां रोलिंग स्टॉक के साथ ट्रैक मटेरियल, पुल, TRD उपकरण, सिग्नलिंग सिस्टम और जियोटेक्निकल पैरामीटर की भी टेस्टिंग की जा सकेगी. अमित सुदर्शन के मुताबिक, गुढ़ा-थथाना मिठरी के बीच 59 किलोमीटर का नया ब्रॉड गेज डेडिकेटेड टेस्ट ट्रैक डेवलप किया गया है. रेलवे का दावा है कि UIC-518 और EN-14363 जैसे अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप व्यापक रोलिंग स्टॉक टेस्टिंग सुविधा वाला यह भारत का पहला ऐसा टेस्ट ट्रैक होगा.

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