भारत का रियल एस्टेट बाजार 2026 में भी मजबूती के साथ आगे बढ़ता दिख रहा है. घरों की ऊंची कीमतों और महंगे होम लोन के बावजूद खरीदारों की दिलचस्पी बनी हुई है. खासकर प्रीमियम और लग्जरी हाउसिंग सेगमेंट की मजबूत मांग ने बाजार को सहारा दिया है. हालांकि देशभर में तेजी की इस तस्वीर के बीच दिल्ली-एनसीआर का प्रदर्शन बाकी बड़े शहरों की तुलना में कमजोर नजर आया है. ब्रोकरेज फर्म नुवामा की रिपोर्ट के मुताबिक, 2026 की पहली छमाही में देशभर में घरों की बिक्री वैल्यू में अच्छी बढ़ोतरी दर्ज की गई है. वहीं कुछ शहरों ने शानदार प्रदर्शन किया, जबकि दिल्ली-एनसीआर में बिक्री और नई लॉन्चिंग दोनों में कमजोरी दिखाई दी.
पहली छमाही में 11 फीसदी बढ़ी बिक्री वैल्यू
नुवामा की रिपोर्ट के अनुसार, 2026 की पहली छमाही (जनवरी-जून 2026) में देशभर में घरों की बिक्री वैल्यू में 11 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है. वहीं दूसरी तिमाही (अप्रैल-जून) में ये इजाफा 9 फीसदी रहा. जून 2026 के आंकड़े भी बाजार में मजबूती का संकेत देते हैं. जून में बिक्री वैल्यू सालाना आधार पर 5 फीसदी और मई के मुकाबले 6 फीसदी बढ़ी. इससे साफ है कि निवेशकों और घर खरीदारों की दिलचस्पी अभी भी रियल एस्टेट सेक्टर में बनी हुई है.
दिल्ली-एनसीआर में दिखी सुस्ती!
देश के ज्यादातर बड़े शहरों में रियल एस्टेट बाजार मजबूत बना हुआ है, लेकिन दिल्ली-एनसीआर की तस्वीर अलग है. रिपोर्ट के मुताबिक, एनसीआर में घरों की बिक्री वैल्यू में 7 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई है. वहीं बिक्री की मात्रा यानी यूनिट्स के हिसाब से बिक्री 18 फीसदी घट गई. इसके अलावा एनसीआर और चेन्नई में नए प्रोजेक्ट्स की लॉन्चिंग भी 21 से 34 फीसदी तक कम रही. इन आंकड़ों से संकेत मिलता है कि खरीदार फिलहाल इस बाजार में पहले के मुकाबले ज्यादा सतर्क नजर आ रहे हैं.
अनसोल्ड घरों का क्या है हाल?
रियल एस्टेट बाजार में बिक्री जितनी महत्वपूर्ण होती है, उतना ही महत्वपूर्ण अनसोल्ड इन्वेंट्री का स्तर भी होता है. इससे पता चलता है कि बाजार में उपलब्ध घरों को बेचने में कितना समय लग सकता है. नुवामा की रिपोर्ट के अनुसार, देशभर में अनसोल्ड इन्वेंट्री 20 महीने के स्तर पर स्थिर बनी हुई है. शहरों की बात करें तो, पुणे में अनसोल्ड इन्वेंट्री सिर्फ 14 महीने की है जबकि ज्यादातर बड़े शहरों में ये 17 से 22 महीने के बीच है. हैदराबाद में तो ये आंकड़ा 29 महीने तक पहुंच गया है, जो प्रमुख बाजारों में सबसे ज्यादा है.
चेन्नई में सबसे तेज बढ़ीं कीमतें
घरों की कीमतों में भी बढ़ोतरी का सिलसिला जारी है. रिपोर्ट के मुताबिक, दूसरी तिमाही में चेन्नई सबसे आगे रहा जहां घरों की कीमतों में सालाना आधार पर 20 फीसदी का उछाल दर्ज किया गया. वहीं दूसरे बड़े शहरों में भी प्रॉपर्टी की कीमतें 4 से 8 फीसदी तक बढ़ीं. प्रीमियम और लग्जरी हाउसिंग सेगमेंट में मजबूत मांग की वजह से डेवलपर्स को कीमतें बढ़ाने का मौका मिला है.
आगे क्या है चुनौती?
रिपोर्ट का मानना है कि अब तक लग्जरी और प्रीमियम सेगमेंट की मजबूत मांग ने रियल एस्टेट सेक्टर की रफ्तार बनाए रखी है. लेकिन आगे चलकर 5 करोड़ से 10 करोड़ रुपये वाले सेगमेंट में चुनौतियां बढ़ सकती हैं. ऐसे में डेवलपर्स को केवल लग्जरी प्रोजेक्ट्स पर निर्भर रहने की बजाय मिड-इनकम और प्रीमियम सेगमेंट पर ज्यादा ध्यान देना पड़ सकता है. इसके लिए कीमतों और टिकट साइज को नियंत्रण में रखना जरूरी होगा ताकि घर आम खरीदारों की पहुंच में बने रहें.
क्या कहते हैं ये आंकड़े?
रियल एस्टेट बाजार की मौजूदा तस्वीर बताती है कि देश में घरों की मांग अभी भी मजबूत बनी हुई है. लेकिन खरीदार अब पहले की तुलना में ज्यादा सोच-समझकर फैसला ले रहे हैं. जहां बेंगलुरु, चेन्नई और कुछ दूसरे बाजार मजबूत प्रदर्शन कर रहे हैं, वहीं दिल्ली-एनसीआर में बिक्री और नई लॉन्चिंग दोनों में कमजोरी दिखाई दे रही है. ऐसे में आने वाले महीनों में डेवलपर्स की रणनीति, प्राइसिंग और अफोर्डेबिलिटी इस सेक्टर की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएगी.
आदित्य के. राणा