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मोटी सैलरी के बावजूद लोन देने से बैंक का इनकार, Cibil Score की अहमियत को समझें

aajtak.in
  • नई दिल्ली,
  • 22 जुलाई 2022,
  • अपडेटेड 10:24 AM IST
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आज के समय में अपना आशियाना बनाने का सपना हो या फिर कोई कारोबार शुरू करना हो, लोन की जरूरत पड़ ही जाती है. अगर आप छोटा या बड़ा लोन (Loan) लेने का मन बना रहे हैं और चाहते हैं कि Bank बिना आनाकानी के आसानी से किफायती दरों पर लोन दे दे, तो आपके लिए अपने सिबिल स्कोर (Cibil Score) को समझना बेहद जरूरी है. क्योंकि कोई भी बैंक लोन देने के समय सिबिल स्कोर जरूर चेक करते हैं और इसी आधार पर लोन देते हैं. 

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विशेषज्ञों का कहना है कि लोन लेने वालों की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है. ऐसे में जरूरी है कि आप अपने सिबिल स्कोर (Cibil Score) की अहमियत को अच्छी तरह से समझें और अगर यह कमजोर है तो इस तरह के उपाय करें कि इसे मजबूत बनाया जा सके. दरअसल, बैंक हमेशा व्यक्ति का सिबिल स्कोर चेक कर के ही लोन अप्रूव (Approve) करते हैं. सिबिल स्कोर को क्रेडिट स्कोर (Credit Score) के नाम से भी जाना जाता है. 

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बैंक दरअसल, क्रेडिट स्कोर की मदद से यह देखते हैं कि आप समय पर लोन को चुकाते हैं या नहीं. इसके साथ ही बैंक यह भी चेक करते हैं कि क्या व्यक्ति ने किसी लोन की पेमेंट (Loan Payment) पर डिफॉल्ट (Default) किया है. यानी लोन मांगने वाले व्यक्ति के बारे में पूरी की पूरी जानकारी बैंकों को उसके सिबिल स्कोर के आधार पर ही पता चल जाती है. 

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बैंकों ने सिबिल स्कोर के मानक तय किए हुए हैं. इनके आधार पर इसका 750 से ऊपर होना आपको कम ब्याज दर (Low Interest Rate) पर लोन दिलाने में मददगार हो सकता है. आपका सिबिल स्कोर बेहतर तभी होगा, जब आपकी क्रेडिट हिस्ट्री अच्छी होगी. इसलिए जरूरी है कि आप पहले लिए गए कर्ज या फिर क्रेडिट कार्ड बिल (Credit Card Bill) का पूरा भुगतान सही समय पर करते रहें. 

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अगर आप किसी लोन की EMI चुकाने में चूक करते हैं या फिर कोई बिल पेंडिंग रहता है, तो इसका असर आपके सिबिल स्कोर पर होता है. इससे आपका स्कोर कम हो जाता है. अगर आप क्रेडिट कार्ड से खर्च करते हैं और बिल समय पर नहीं चुकाते हैं तो भी स्कोर पर बुरा असर होता है. क्रेडिट की जांच करने वाली कंपनियां किसी पेमेंट में डिफॉल्ट रहने पर आपका स्कोर कम कर देती हैं. क्रेडिट स्कोर खराब होने पर भविष्य में लोन लेने में दिक्कत आती है. 

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अगर आपका सिबिल स्कोर कमजोर (Poor Cibil Score) है, तो बैंक आपको आसानी से लोन नहीं देगा और देगा भी तो ज्यादा ब्याज दर पर. यानी लोन का भुगतान करने में आगे मुसीबत होगी और ज्यादा पैसा चुकाना होगा. भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने भी बैंकों को इस संबंध में सलाह दी है कि बैंकों को लोन देने से पहले सिबिल कंफर्मेशन जरूर करना चाहिए. इससे लोन डिफॉल्ट की संभावना कम हो जाती है.

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अपने सिबिल स्कोर (Cibil Score) को सुधारने के लिए समय पर पेमेंट करें. क्रेडिट कार्ड पेमेंट या फिर किसी अन्य बिल या ईएमआई का भुगतान डेडलाइन से पहले करना फायदेमंद रहेगा. इसके अलावा उतना ही खर्च करें जितना जरूरी हो और पेंडिग का भुगतान समय पर करें. क्रेडिट कार्ड से खर्च करते समय आपको बेहद सावधानी बरतने की जरूरत है.

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