विशाल सिक्का ने इन्फोसिस को टाटा क्यों कहा?

विशाल सिक्का ने आखिरकार इस्तीफा दे दिया है. इस्तीफा देने की वजहों का खुलासा करते हुए विशाल सिक्का ने कंपनी के कर्मचारियों को लेटर लिखते हुए कहा कि अब इंफोसिस का माहौल उनके काम करने लायक नहीं रह गया लिहाजा वह अपनी जिम्मेदारियों को छोड़ रहे हैं.

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इसलिए फाउंडर मूर्ति से टकरा गए सिक्का इसलिए फाउंडर मूर्ति से टकरा गए सिक्का

राहुल मिश्र

  • नई दिल्ली,
  • 18 अगस्त 2017,
  • अपडेटेड 1:02 PM IST

विशाल सिक्का ने आखिरकार इस्तीफा दे दिया है. इस्तीफा देने की वजहों का खुलासा करते हुए विशाल सिक्का ने कंपनी के कर्मचारियों को लेटर लिखते हुए कहा कि अब इंफोसिस का माहौल उनके काम करने लायक नहीं रह गया लिहाजा वह अपनी जिम्मेदारियों को छोड़ रहे हैं.

सिक्का के मुताबिक बीते लंबे समय से इंफोसिस के फाउंडर नारायण मूर्ति उनके खिलाप उलटे-सीधे आरोप लगा रहे थे. एक तरफ जहां वह बीते तीन साल को दौरान कंपनी को वैश्विक संकटों से उबारने की कोशिश में लगे थे वहीं मूर्ति और उनके समर्थन ऐसे आरोपों से उनका समय खराब कर रहे थे. सिक्का ने कहा कि आखिरकार यह साबित हो चुका है कि नारायण मूर्ति द्वारा उनपर लगाए गए सभी आरोप बेबुनियाद और झूठे है.

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सिक्का ने अपने इस पत्र में यह भी लिखा है कि कंपनी में नारायण मूर्ति और उनके करीबियों ने खराब कॉरपोरेट गवर्नेंस, उनके द्वारा किए गए अधिग्रहणों की निंदा और उनके द्वारा ली जा रही सैलरी को मुद्दा बनाने की कोशिश की गई. इन सभी कोशिशों से जहां इंफोसिस को नुकसान हो रहा था वहीं उनकी निजी जिंदगी पर भी इसका असर पड़ रहा था.

दरअसल दोनों विशाल सिक्का और इंफोसिस फाउंडर के बीच विवाद फरवरी 2017 में तब गहरा गया जब नारायण मूर्ति ने बोर्ड के खिलाफ जारी जंग के बीच में कंपनी के कॉरपोरेट गवर्नेंस पर सवाल खड़ा किया था. हालांकि विशाल सिक्का ने मीडिया में कंपनी के कॉरपोरेट गवर्नेंस पर उठ रहे सवालों को हमेशा बेबुनियाद कहा था और नारायण मूर्ति से अच्छे रिश्ते की बात को दोहराया था.

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मूर्ती समेत इंफोसिस के अन्य फाउंडर्स ने भी सवाल उठाया था कि एशिया की दूसरी सबसे बड़ी आईटी कंपनी में गवर्नेंस के कई मुद्दे कंपनी के हित में नहीं है. इसमें कंपनी के सीईओ विशाल सिक्का की सैलरी में हुए इजाफे समेत कंपनी के दो टॉप लेवल अधिकारियों को कंपनी छोड़ते वक्त दिया गया हर्जाना उचित नहीं है. लिहाजा सिक्का और अन्य अधिकारियों को मिल रही सैलरी और दिए गए हर्जाने पर फाउंडर्स की तरफ से मूर्ति के नेतृत्व में बोर्ड के सामने सवाल खड़ा किया गया था.

गौरतलब है कि इंफोसिस के इस विवाद की जड़ में पूर्व चीफ फाइनेंनशियल ऑफिसर राजीव बंसल को दिया गया हर्जाना भत्ता है. बंसल को कंपनी ने 24 महीने की सैलरी कंपनी छोड़ते वक्त दी थी. इस रकम पर सेबी ने सवाल उठाया था जिसके बाद नारायण मूर्ति समेत अन्य फाउंडर्स ने विशाल सिक्का समेत कुछ शीर्ष अधिकारियों को कंपनी से मिल रही सैलरी और हर्जाने पर सवाल खड़ा कर इंफोसिस बोर्ड के सामने सवाल खड़ा कर दिया था.

 

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