सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक पिछले कई दिनों से दिल्ली मेंं अनशन पर हैं, फिलहाल वो गुरुग्राम के मेंदाता अस्पताल में है. इस बीच सोशल मीडिया पर उनके लद्दाख वाले घर का वीडियो वायरल हो रहा है. यूट्यूबर अमिता छोरगिया नेगी द्वारा बनाए गए इस 'होम-टूर' वीडियो लोग खूब देख रहे हैं. हांलाकि ये वीडियो 3 साल पुराना है, लेकिन सोनम आजकल चर्चा में हैं, इसलिए इस वीडियो को लोग खूब देख रहे हैं.
शून्य से नीचे तापमान में भी बिना किसी हीटर के सोनम वांगचुक का घर अंदर से कैसे 18 से 20 डिग्री तक गर्म रहता है. यह घर पारंपरिक पहाड़ी वास्तुकला और मौसम के अनुकूल आधुनिक इंजीनियरिंग का एक बेहतरीन उदाहरण है. यह घर मिट्टी और 'रैम्ड-अर्थ' की तकनीकों से बना है, जिसमें लकड़ी के तत्वों का उपयोग किया गया है. निर्माण की यह तकनीक लद्दाख और आसपास के हिमालयी क्षेत्रों में लंबे समय से इस्तेमाल की जा रही है. मिट्टी की मोटी दीवारें घर के अंदर के तापमान को प्राकृतिक रूप से नियंत्रित करने में मदद करती हैं.
घर की बड़ी-बड़ी खिड़कियों के कांच सर्दियों में धूप को अंदर लाते हैं, जबकि एक गहरी रंग की 'थर्मल वॉल' दिन भर गर्मी को अपने अंदर जमा करती है और सूरज ढलने के बाद उसे छोड़ती है, वांगचुक का कहना है कि यह 'पैसिव हीटिंग सिस्टम' बिना किसी बाहरी हीटर के कड़ाके की ठंड वाली रातों में भी घर के अंदर का तापमान 18 से 20°C तक बनाए रखता है.
घर के अंदर का माहौल बहुत साधारण होने के बजाय काफी आधुनिक है, यहां सोफे, पुरानी लकड़ी का फर्नीचर, एक मॉड्यूलर किचन और अटैच बाथरूम बने हुए हैं. एक साथ बैठकर खाना पकाने और खाने की लद्दाखी परंपरा को बनाए रखने के लिए घर में एक बड़ा डाइनिंग स्पेस भी है.
इस प्रॉपर्टी परिसर में एक ग्रीनहाउस और घने सेब का एक बाग भी है, ये दोनों मिलकर यह दिखाते हैं कि सही योजना और डिज़ाइन के जरिए लद्दाख के ठंडे रेगिस्तानी माहौल में भी फसलों के मौसम को बढ़ाया जा सकता है और खेती को बढ़ावा दिया जा सकता है.
लद्दाख में कड़ाके की ठंड, बहुत तेज़ धूप और तापमान में भारी उतार-चढ़ाव होता है. यह घर स्थानीय मिट्टी, धूप और गर्मी को जमा करने वाली तकनीकों का सही इस्तेमाल करके इन कठिन परिस्थितियों को भी अपने पक्ष में मोड़ लेता है, जिससे कृत्रिम हीटरों की ज़रूरत बहुत कम हो जाती है.
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