30 या 40 किस उम्र में खरीदें घर, कितना लें होम लोन, जानें सही गणित

घर खरीदना एक व्यक्तिगत फैसला है, लेकिन इसे वित्तीय बुद्धिमत्ता के साथ लिया जाना चाहिए. एक घर तब 'आशियाना' बनता है जब उसमें रहने वाले लोग आर्थिक तंगी और ईएमआई के तनाव से मुक्त हों.

Advertisement
घर खरीदने का कब लें फैसला (Photo-ITG) घर खरीदने का कब लें फैसला (Photo-ITG)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 13 फरवरी 2026,
  • अपडेटेड 11:18 AM IST

भारत में हर इंसान का यही सपना होता है अपना घर खरीदना, नौकरी लगते ही सामाजिक और पारिवारिक दबाव लोगों पर इस तरह बढ़ जाता है कि अगर घर नहीं खरीदा तो जीवन में सबसे पीछे रह जाएंगे. हर इंसान के जीवन की चेकलिस्ट में 'अपना घर' सबसे ऊपर होता है.

बचपन से ही हमें सिखाया जाता है कि जीवन में स्थिरता का मतलब है अपना घर. भारतीय समाज में घर को केवल ईंट-पत्थरों का ढांचा नहीं, बल्कि सफलता, सम्मान और सुरक्षा का सबसे बड़ा पैमाना माना जाता है. अक्सर लोग अपनी पहली नौकरी लगते ही या शादी के तुरंत बाद घर खरीदने की दौड़ में शामिल हो जाते हैं.

Advertisement

यह भी पढ़ें: घर की लोकेशन ही नहीं, खिड़कियों का 'एंगल' भी देखें, नहीं कटेगी जेब!

लेकिन क्या आपने कभी यह सोचा है कि भावनाओं के आवेग और सामाजिक दबाव में लिया गया यह 'जीवन का सबसे बड़ा फैसला' आपको आर्थिक रूप से समृद्ध बना रहा है या कर्ज के जाल में धकेल रहा है? आज तक रेडियो के विशेष कार्यक्रम 'प्रॉपर्टी से फायदा' (PSF) में रियल एस्टेट एक्सपर्ट रवि सिन्हा ने इसी 'इमोशनल बाइंग' और निवेश के सही समय पर एक ऐसी चर्चा की है, जो घर खरीदने की आपकी सोच को पूरी तरह बदल सकती है.

सफलता का पैमाना या वित्तीय साक्षरता की कमी?

रवि सिन्हा कहते हैं- 'समाज का एक अनकहा नियम है - तुम सक्सेसफुल तभी हो जब तुम्हारे पास अपना घर है.' अगर आप किराए के घर में रह रहे हैं, तो इसे अक्सर एक 'अस्थाई' और 'अधूरी' जीवनशैली के रूप में देखा जाता है. इस सोच के पीछे सबसे बड़ी वजह 'वित्तीय शिक्षा की कमी' है.'

Advertisement

अक्सर लोग अपनी जीवन भर की जमा-पूंजी एक ही झटके में 'डाउन पेमेंट' के तौर पर दे देते हैं और अगले 20-25 सालों के लिए भारी-भरकम ईएमआई (EMI) के बोझ तले दब जाते हैं. रवि सिन्हा का कहना है कि जो घर आपकी जेब से हर महीने पैसे निकाल रहा है और जिसकी रीसेल वैल्यू या रेंटल इनकम आपकी लागत से कम है, वह असल में 'एसेट' नहीं बल्कि 'लायबिलिटी' है.

यह भी पढ़ें: रियल एस्टेट में गुजरात का जलवा, अहमदाबाद बना नया 'टियर-1' शहर

किस उम्र में खरीदें अपना घर? 20s, 30s या 40s?

अक्सर युवा 25 से 30 साल की उम्र में घर खरीदने की जल्दबाजी करते हैं. एक्सपर्ट्स का मानना है कि यह उम्र करियर बनाने और अपनी नेटवर्थ बढ़ाने की होती है, न कि कर्ज में डूबने की. घर खरीदने का सबसे उपयुक्त समय 40 साल की उम्र के बाद हो सकता है. इसके पीछे कई ठोस कारण हैं.

  • 40 की उम्र तक व्यक्ति का करियर अपने चरम पर होता है और आय का स्तर काफी बढ़ चुका होता है.
  • इस उम्र तक आपके पास अन्य निवेशों (Mutual Funds, Stocks, Gold) से एक अच्छी पूंजी जमा हो जाती है.
  • 40 के बाद आप अपने रिटायरमेंट के करीब होते हैं, तब एक स्थिर घर आपकी भविष्य की सुरक्षा के लिए अधिक सार्थक साबित होता है
  • इस उम्र तक आपको पता होता है कि आपको स्थायी रूप से किस शहर या इलाके में बसना है.   

 रेंट VS EMI

Advertisement

यह बहस पुरानी है किराया देना पैसे की बर्बादी है या ईएमआई भरना? एक्सपर्ट्स ने इस पर एक बहुत ही व्यावहारिक दृष्टिकोण रखा है. उनका कहना है कि केवल मालिकाना हक पाने के जुनून में अपनी पूरी सेविंग्स खत्म कर देना जोखिम भरा हो सकता है. कल्पना कीजिए कि आपने अपनी सारी बचत घर में लगा दी और बीच में आपकी जॉब चली गई. ऐसी स्थिति में आप न केवल घर खोने के डर में रहेंगे, बल्कि आपके पास दैनिक खर्चों के लिए भी पैसा नहीं बचेगा.

रवि सिन्हा आगे कहते हैं- ' निवेश ऐसा होना चाहिए जो आपको 'नेटवर्थ' दे, न कि 'डेटवर्थ' (कर्ज वाली वैल्यू)।" उधार लेकर अपनी  भावनाओं को पूरा करना वित्तीय आत्महत्या के समान हो सकता है.'

निवेश से पहले इन 5 बातों का रखें ध्यान

  • घर आपकी कुल संपत्ति का एक छोटा हिस्सा होना चाहिए.
  • आपकी पूरी नेटवर्थ सिर्फ एक फ्लैट में कैद नहीं होनी चाहिए.
  • उतना ही लोन लें जितनी आपकी चुकाने की क्षमता हो.
  • ईएमआई इन-हैंड सैलरी के 30-35% से अधिक नहीं होनी चाहिए
  • ऐसे ब्रोकर्स या एजेंट्स से सावधान रहें जो केवल अपना कमीशन के लिए बेस्ट डील' का लालच देते हैं.

प्रॉपर्टी खरीदने से पहले किसी स्वतंत्र वित्तीय सलाहकार या फंड मैनेजर से बात करें जो आपके पूरे वित्तीय पोर्टफोलियो को समझकर सही सलाह दे सके. माता-पिता, रिश्तेदारों या दोस्तों के 'स्टेटस सिंबल' के दबाव में आकर कभी घर न खरीदें. अपनी वित्तीय स्थिति का आंकलन खुद करें.

Advertisement

'अनरियल' रियल एस्टेट की हकीकत

प्रॉपर्टी मार्केट को अक्सर विशेषज्ञों द्वारा 'अनरियल' (Unreal) कहा जाता है. इसका कारण यह है कि प्रॉपर्टी की लिक्विडिटी बहुत कम होती है. अगर आपको अचानक पैसों की जरूरत पड़ जाए, तो आप रातों-रात अपना घर नहीं बेच सकते. वहीं, गोल्ड या म्यूचुअल फंड्स को बेचना कहीं ज्यादा आसान है. इसलिए, घर को निवेश से ज्यादा अपनी जरूरतों और सुख-सुविधाओं के नजरिए से देखना चाहिए.
 

 यह भी पढ़ें: महानगरों में घर के किराए में लगी आग, झुलस रहा है मिडिल क्लास

---- समाप्त ----

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement