महानगरों में घर के किराए में लगी आग, झुलस रहा है मिडिल क्लास

भारत के टॉप शहरों में किराए पर रहना अब एक महंगा सौदा बन चुका है, और आने वाले समय में भी सप्लाई की कमी और बढ़ती मांग के कारण इसमें कमी आने के आसार कम ही दिखाई देते हैं.

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आम आदमी के लिए किराया देना हो रहा है मुश्किल (Photo-ITG) आम आदमी के लिए किराया देना हो रहा है मुश्किल (Photo-ITG)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 12 फरवरी 2026,
  • अपडेटेड 10:52 AM IST

देश के प्रमुख महानगरों में रहने की लागत लोगों की जेब पर काफी भारी पड़ रही है. पिछले कुछ सालों में रेंटल मार्केट ने कई रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं. लोगों को छोटे घरों के लिए भी अपनी कमाई का 40-50 फीसदी किराए में देना पड़ा रहा है. जितना बड़ा शहर, उतना ज्यादा रेंट. अगर देश के सबसें महंगे शहरों की बात करें तो मुंबई आज भी निर्विवाद रूप से देश का सबसे महंगा रेंटल मार्केट बना हुआ है.

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एनारॉक की रिपोर्ट्स के अनुसार, मुंबई के प्रीमियम इलाकों में किराए की दरें पिछले एक साल में 15 से 20 प्रतिशत तक बढ़ी हैं. वर्ली, लोअर परेल और दक्षिण मुंबई जैसे क्षेत्रों में एक सामान्य 2BHK फ्लैट का मासिक किराया अब ₹1.25 लाख के पार जा चुका है. इसका मुख्य कारण शहर में नई जमीन की कमी और पुराने इलाकों का बड़े स्तर पर हो रहा पुनर्विकास है,जिससे किराए पर उपलब्ध घरों की सप्लाई काफी सीमित हो गई है.

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गुरुग्राम भी नहीं कम

मुंबई की इस बादशाहत को दिल्ली-NCR का 'मिलेनियम सिटी' गुरुग्राम अब कड़ी टक्कर दे रहा है. गुरुग्राम का रेंटल मार्केट पिछले कुछ सालों में सबसे तेजी से बढ़ने वाला मार्केट बनकर उभरा है. गोल्फ कोर्स रोड और गोल्फ कोर्स एक्सटेंशन जैसे इलाकों ने किराए के मामले में दिल्ली के कई पॉश इलाकों को भी पीछे छोड़ दिया है.

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यहां लग्जरी अपार्टमेंट्स की भारी मांग है, जिसका मुख्य कारण बहुराष्ट्रीय कंपनियों के दफ्तरों का इस ओर शिफ्ट होना है. गुरुग्राम में अब एक अच्छे गेटेड कम्युनिटी में रहने के लिए लोगों को ₹70,000 से ₹90,000 तक खर्च करने पड़ रहे हैं. खास बात ये है कि यहां रेंटल यील्ड भी मुंबई की तुलना में बेहतर है, जो इसे निवेशकों के लिए एक आकर्षक केंद्र बनाता है.

बेंगलुरु में भी बढ़ रहा है किराया

वहीं, दक्षिण भारत की 'आईटी सिटी' बेंगलुरु में स्थिति थोड़ी अलग और चुनौतीपूर्ण है. महामारी के बाद 'वर्क फ्रॉम ऑफिस' की पूरी तरह वापसी ने यहां के रेंटल मार्केट में आग लगा दी है. बेंगलुरु के व्हाइटफील्ड, सरजापुर रोड और इंदिरानगर जैसे इलाकों में घरों की किल्लत इस कदर बढ़ गई है कि मकान मालिक अब किरायेदारों से मोटा पैसा वसूल रहे हैं.

बेंगलुरु में केवल किराया ही नहीं, बल्कि भारी-भरकम 'सिक्योरिटी डिपॉजिट' भी एक बड़ा मुद्दा है, जहां 10 महीने तक का एडवांस किराया मांगना एक सामान्य बात हो गई है. यहां एक सामान्य 2BHK का किराया ₹55,000 से ₹70,000 के बीच है, इसके साथ ही हैदराबाद और पुणे जैसे शहर भी अब इस दौड़ में पीछे नहीं हैं, जहां आधुनिक सुविधाओं और बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर के कारण किराए में 10-12 प्रतिशत की सालाना वृद्धि देखी जा रही है.

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रेंटल मार्केट में आए इस उछाल के पीछे कई महत्वपूर्ण कारक काम कर रहे हैं, आज का मध्यम और उच्च-मध्यम वर्ग केवल एक छत नहीं चाहता, बल्कि वह 'लक्जरी लाइफस्टाइल' की तलाश में है. लोग अब ऐसे घरों को प्राथमिकता दे रहे हैं जहां क्लब हाउस, जिम, स्विमिंग पूल और हाई-टेक सिक्योरिटी जैसी सुविधाएं उपलब्ध हों. इसके अलावा, मेट्रो कनेक्टिविटी और ऑफिस से नजदीकी भी किराए की दरों को प्रभावित करने वाले सबसे बड़े कारक बनकर उभरे हैं. 

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