नोएडा से कम कीमत, गुरुग्राम जैसी लग्जरी, निवेश के लिए बेस्ट है ये शहर

आरआरटीएस और बेहतर कनेक्टिविटी ने इस शहर को दिल्ली की परछाई से बाहर निकालकर निवेशकों और मिडिल क्लास खरीदारों की पहली पसंद बना दिया है. क्यों अब गाजियाबाद केवल एक बजट विकल्प नहीं, बल्कि एक प्रीमियम और मैच्योर प्रॉपर्टी मार्केट में तब्दील हो चुका है.

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नोएडा और गुरुग्राम को टक्कर दे रहा है गाजियाबाद (Photo-ITG) नोएडा और गुरुग्राम को टक्कर दे रहा है गाजियाबाद (Photo-ITG)

स्मिता चंद

  • नई दिल्ली,
  • 14 मई 2026,
  • अपडेटेड 1:13 PM IST

दिल्ली-एनसीआर के रियल एस्टेट मार्केट में जब भी निवेश या घर खरीदने की बात आती है, तो सारा ध्यान नोएडा और गुरुग्राम की ओर चला जाता है, लेकिन गाजियाबाद की चर्चा कम की जाती है. रियल एस्टेट एक्सपर्ट शशांक त्रिवेदी ने आजतक रेडियो के शो 'प्रॉपर्टी से फायदा' में बताया कि कैसे गाजियाबाद अब एक 'बजट कॉम्प्रोमाइज मार्केट' से निकलकर 'पोटेंशियल हॉटस्पॉट' बनने की राह पर है.

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ऐतिहासिक रूप से गाजियाबाद हमेशा से दिल्ली के साये में रहा है. नोएडा जहां एक नियोजित शहर के रूप में पिछले 50 वर्षों में विकसित हुआ, वहीं गाजियाबाद एक पुरानी और स्थापित बस्ती रही है, एक्सपर्ट शशांक त्रिवेदी के अनुसार, गाजियाबाद को वह पहचान अब तक नहीं मिल पाई थी, जिसका वह हकदार था, लेकिन अब कनेक्टिविटी के मोर्चे पर हुए बड़े बदलावों ने इसकी तस्वीर बदल दी है.

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गाजियाबाद की किस्मत बदलने में सबसे बड़ा हाथ आरआरटीएस (RRTS - Rapid Rail Transit System) का है. शशांक ने इसे विस्तार से समझाते हुए कहा कि मेट्रो और आरआरटीएस में मुख्य अंतर गति और दूरी का है. प्रधानमंत्री मोदी द्वारा लॉन्च की गई इस सेवा ने दिल्ली से मेरठ की दूरी को महज एक से सवा घंटे में समेट दिया है.

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पहले जो लोग दिल्ली के चांदनी चौक या ईस्ट दिल्ली में काम करते थे, उनके लिए मेरठ या गाजियाबाद के बाहरी इलाकों से आना असंभव था, लेकिन अब आरआरटीएस के कारण कनेक्टिविटी इतनी सुगम हो गई है कि लोग आसानी से आना-जाना कर सकते हैं. इसके साथ ही मेट्रो के विस्तार ने इसे दिल्ली-एनसीआर के हर कोने से जोड़ दिया है.

नोएडा और गुरुग्राम के मुकाबले कहां खड़ा है गाजियाबाद?

जब बात निवेश की आती है, तो एक्सपर्ट्स 'एंट्री पॉइंट' को सबसे महत्वपूर्ण मानते हैं. शशांक त्रिवेदी ने नोएडा, गुरुग्राम और गाजियाबाद के बीच एक तुलनात्मक चार्ट पेश किया. 'नोएडा में प्रॉपर्टी के रेट्स आज 15,000 से 18,000 रुपये प्रति स्क्वायर फीट के बीच हैं, जबकि लग्जरी प्रोजेक्ट्स 30,000 रुपये तक जा रहे हैं. गुरुग्राम के रेट्स तो आसमान छू रहे हैं. इसके विपरीत, गाजियाबाद में आज भी 8,000 से 10,000 रुपये प्रति स्क्वायर फीट के रेट पर बेहतरीन प्रोजेक्ट्स उपलब्ध हैं.'

50 लाख रुपये का सालाना पैकेज पाने वाला व्यक्ति भी आज नोएडा या गुरुग्राम में अपनी पसंद का घर नहीं खरीद पा रहा है. ऐसे में 1 करोड़ से 2 करोड़ रुपये के बजट वाले 'एंड-यूजर' के लिए गाजियाबाद सबसे उपयुक्त विकल्प बनकर उभरा है.

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गुरुग्राम का 'रियल एस्टेट बबल' और गाजियाबाद की ग्रोथ

शशांक ने हालिया रिपोर्ट्स का हवाला देते हुए बताया कि गोल्फ कोर्स एक्सेंशन रोड जैसे प्राइम इलाकों में हजारों फ्लैट्स खाली पड़े हैं, जिसे कई एक्सपर्ट्स एक 'बबल' मान रहे हैं. दूसरी ओर, गाजियाबाद में 'टेक-ऑफ' का समय अब शुरू हुआ है. नोएडा के यमुना एक्सप्रेसवे और जेवर एयरपोर्ट की वजह से वहां कीमतें पहले ही काफी बढ़ चुकी हैं. ऐसे में जो इन्वेस्टर कम कीमत पर एंट्री लेकर 2-3 साल में अच्छे रिटर्न की तलाश में हैं, उनके लिए गाजियाबाद एक शानदार मौका है.

गाजियाबाद के साथ हमेशा से एक 'परसेप्शन' की समस्या रही है. लोग गाजियाबाद में रहने के बावजूद खुद को दिल्ली या नोएडा का निवासी बताना पसंद करते हैं. शशांक त्रिवेदी ने स्वीकार किया कि गुरुग्राम और नोएडा में कॉर्पोरेट कल्चर आने की वजह से वहां एक अलग तरह का 'क्राउड' और लाइफस्टाइल विकसित हुआ, जो गाजियाबाद में अब तक मिसिंग था.

हालांकि, अब स्थिति बदल रही है. गाजियाबाद पारंपरिक रूप से एक 'मैन्युफैक्चरिंग हब' रहा है, लेकिन अब यहां लग्जरी और अल्ट्रा-लग्जरी प्रोजेक्ट्स लॉन्च हो रहे हैं. जैसे-जैसे नोएडा और दिल्ली में कंजेशन बढ़ रहा है, प्रीमियम खरीदार अब गाजियाबाद की ओर रुख कर रहे हैं, जिससे वहां का सामाजिक ढांचा और परसेप्शन दोनों बदल रहे हैं.

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क्या आपको निवेश करना चाहिए?

शशांक त्रिवेदी के अनुसार, यदि आप एक ऐसे मिडिल क्लास बायर हैं जो अपनी फेमिली को एक अच्छी लाइफ देना चाहते हैं और बजट भी सीमित है, तो गाजियाबाद आपके लिए बेस्ट है. इन्वेस्टर के तौर पर देखें तो गाजियाबाद का मार्केट अब 'मैच्योर' होने की दिशा में है. यहां रेट भी नोएडा-गुरुग्राम के मुकाबले लगभग आधी है.

रियल एस्टेट की दुनिया में इन दिनों 'SOGA' शब्द काफी चर्चा में है, जो दरअसल 'South Ghaziabad' का संक्षिप्त रूप है. एक्सपर्ट शशांक त्रिवेदी ने बताया कि जिस तरह मुंबई में 'SOBO' का क्रेज है, उसी तरह गाजियाबाद की नई पीढ़ी (Gen-Z) ने शहर की छवि बदलने के लिए इस शब्द को सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया है. पहले लोग खुद को गाजियाबाद का बताने में हिचकिचाते थे, लेकिन अब इंस्टाग्राम रील्स और 'सोगा' कैंपेन के जरिए यहां के कैफे, लाइफस्टाइल और प्रीमियम प्रोजेक्ट्स को गर्व के साथ पेश किया जा रहा है. यहां तक कि बड़े ई-कॉमर्स ब्रांड्स ने भी इस ट्रेंड को अपनाकर गाजियाबाद के प्रति लोगों के नजरिए को बदलने में बड़ी भूमिका निभाई है.

इन्वेस्टमेंट के लिए पसंदीदा पॉकेट्स

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गाजियाबाद में निवेश की संभावनाओं पर बात करते हुए एक्सपर्ट ने इसे दो श्रेणियों में बांटा है, रहने के उद्देश्य से घर तलाश रहे लोगों के लिए 'इंदिरापुरम' आज भी पहली और सबसे पसंदीदा पसंद बना हुआ है, क्योंकि यहां का इंफ्रास्ट्रक्चर और माहौल पूरी तरह विकसित हो चुका है. वहीं, निवेश के नजरिए से उन इलाकों में भारी संभावनाएं देखी जा रही हैं जो दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे और आरआरटीएस (RRTS) कॉरिडोर के करीब हैं. एक्सपर्ट के अनुसार, गाजियाबाद अब केवल एक बजट विकल्प नहीं रह गया है, बल्कि यहां के कुछ नए प्रोजेक्ट्स गुणवत्ता और सुविधाओं के मामले में नोएडा के प्रीमियम प्रोजेक्ट्स को कड़ी टक्कर दे रहे हैं.

एक्सपर्ट का मानना है कि गाजियाबाद का रियल एस्टेट मार्केट अब 'मैच्योर' हो चुका है और कनेक्टिविटी में हुए क्रांतिकारी सुधारों ने इसे उन निवेशकों के लिए 'हॉटस्पॉट' बना दिया है जो कम जोखिम के साथ बेहतर रिटर्न की तलाश में हैं. अब यह शहर दिल्ली की परछाई से निकलकर अपनी एक स्वतंत्र और आधुनिक पहचान बना चुका है.

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