सालों की देरी और संशय के बाद, गुजरात का धोलेरा स्मार्ट सिटी आखिरकार उस इंड्रस्ट्रियल और मैन्यूफैक्चरिंग हब के रूप में उभरने के संकेत दे रहा है, जिसकी कल्पना इसके लिए की गई थी. निर्माणाधीन धोलेरा इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर विमान की सफल ट्रायल लैंडिंग और टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स के ₹91,000 करोड़ के सेमीकंडक्टर फैब्रिकेशन प्लांट पर तेजी से चल रहे काम जैसी हालिया प्रगति ने भारत के इस सबसे बड़े नियोजित ग्रीनफील्ड स्मार्ट सिटी में निवेशकों का भरोसा फिर से जगा दिया है.
गुजरात विशेष निवेश क्षेत्र अधिनियम (Gujarat Special Investment Region Act), 2009 के तहत धोलेरा दिल्ली-मुंबई औद्योगिक कॉरिडोर (DMIC) का पहला औद्योगिक नोड है. लगभग 920 वर्ग किलोमीटर में फैला और अहमदाबाद से करीब 100 किलोमीटर दूर स्थित यह शहर विश्व स्तरीय बुनियादी ढांचे, विनिर्माण क्षेत्रों, लॉजिस्टिक्स, कमर्शियल डिस्ट्रिक्ट्स और आवासीय क्षेत्रों को एक साथ जोड़ने के लिए डिजाइन किया गया है.
हालांकि, बिल्कुल नए सिरे से एक पूरा शहर बसाना बेहद चुनौतीपूर्ण साबित हुआ. उद्योगों के यहां आने से पहले सड़कों, बिजली नेटवर्क, पानी की आपूर्ति, सीवेज सिस्टम, बाढ़ नियंत्रण बुनियादी ढांचे और परिवहन कनेक्टिविटी को विकसित करना जरूरी था, जिसके कारण सालों की देरी हुई.
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इस स्थिति में बड़ा बदलाव मार्च 2024 में आया, जब केंद्र सरकार ने टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स के सेमीकंडक्टर फैब्रिकेशन प्लांट को मंजूरी दी, जिसे ताइवान की 'पावरचिप सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग कॉर्पोरेशन' (PSMC) के साथ मिलकर विकसित किया जा रहा है. यह प्लांट ऑटोमोबाइल, टेलीकॉम, कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स, डिफेंस और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के लिए चिप्स का निर्माण करेगा, जिसकी अनुमानित क्षमता प्रति माह 50,000 चिप्स होगी. मई 2026 में, टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स ने सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम को और मजबूत करने के लिए डच चिप उपकरण निर्माता कंपनी ASML के साथ भी साझेदारी की.
एयरपोर्ट से मिला बूस्ट
बुनियादी ढांचे को एक और बड़ी मजबूती 5 जून को मिली, जब भारतीय विमानन प्राधिकरण (AAI) के एक विमान ने धोलेरा इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर सफलतापूर्वक ट्रायल लैंडिंग की. चालू होने के बाद, इस एयरपोर्ट से कार्गो मूवमेंट, पैसेंजर कनेक्टिविटी और औद्योगिक लॉजिस्टिक्स में काफी सुधार होने की उम्मीद है.
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औद्योगिक गतिविधियों में आई इस तेजी ने धोलेरा के रियल एस्टेट बाजार में भी रुचि बढ़ा दी है. सत्याजा ग्रुप (Satyaja Group) के सेल्स और मार्केटिंग हेड, निमित कामदार ने बिजनेस टुडे को बताया, "परियोजना क्षेत्र और उसके आसपास हमारे पास 450 एकड़ जमीन है. हमने 2014 में जमीन खरीदना शुरू किया था. सेमीकंडक्टर प्रोजेक्ट की घोषणा के बाद, हमने अपना निवेश दोगुना कर दिया है, और जमीन की कीमतें हर दिन बढ़ रही हैं."
डेवलपर्स को भी निवेशकों की तरफ से भारी मांग देखने को मिल रही है. आरके ग्रुप ऑफ रियल एस्टेट के सेल्स रिप्रेजेंटेटिव, दीप वाघेला ने बिजनेस टुडे को बताया, "हमारे लगभग 90% प्रोजेक्ट्स निवेशकों द्वारा पूरी तरह से बुक किए जा चुके हैं." उन्होंने यह भी जोड़ा कि अहमदाबाद की तुलना में यहां जमीन अभी भी काफी सस्ती है.
धोलेरा क्यों महत्वपूर्ण है?
धोलेरा सिर्फ रियल एस्टेट की कहानी नहीं है. यह बिल्कुल नए सिरे से भविष्य के लिए तैयार एक औद्योगिक शहर बनाने का भारत का सबसे महत्वाकांक्षी प्रयास है.
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