चीन भरोसे अब और नहीं! क्रेन, लिफ्ट से TBM तक... भारत में बनेंगे हेवी इक्विपमेंट, सरकार का ये है प्लान

भारत हाई-वैल्यू इंफ्रास्ट्रक्चर उपकरणों की घरेलू मैन्युफैक्चरिंग बढ़ाने की तैयारी में है. सरकार करीब $1.2 बिलियन की इंसेंटिव स्कीम लाने की तैयारी कर रही है, जिसका मकसद चीन समेत विदेशी आयात पर निर्भरता घटाकर घरेलू कंपनियों को बढ़ावा देना है. BEML, L&T जैसी कंपनियों को इसका फायदा मिल सकता है.

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भारत सरकार हाई-वैल्यू इंफ्रास्ट्रक्चर इक्विपमेंट मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने के लिए 1.2 अरब डॉलर की इंसेंटिव स्कीम लाने की तैयारी कर रही है. (Photo: X/@HerrenknechtIndia) भारत सरकार हाई-वैल्यू इंफ्रास्ट्रक्चर इक्विपमेंट मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने के लिए 1.2 अरब डॉलर की इंसेंटिव स्कीम लाने की तैयारी कर रही है. (Photo: X/@HerrenknechtIndia)

आजतक बिजनेस डेस्क

  • नई दिल्ली,
  • 24 अगस्त 2026,
  • अपडेटेड 8:59 AM IST

भारत हाई-वैल्यू मैन्युफैक्चरिंग और इंफ्रास्ट्रक्चर उपकरणों के क्षेत्र में घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देने की तैयारी कर रहा है. न्यूज एजेंसी रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, सरकार इसके लिए करीब $1.2 बिलियन (₹11,484 करोड़) की इंसेंटिव स्कीम लाने की तैयारी में है. इस स्कीम का लक्ष्य अगले सात वर्षों में करीब $1.8 बिलियन का नया निवेश आकर्षित करना है. यह पहल ऐसे समय में सामने आई है, जब भारत में निर्माण और इंफ्रास्ट्रक्चर गतिविधियां तेजी से बढ़ रही हैं, लेकिन कई महत्वपूर्ण मशीनों के लिए देश की आयात पर निर्भरता अभी भी बनी हुई है.

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सरकार खास तौर पर चीन से होने वाले आयात पर निर्भरता कम करना चाहती है. इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में इस्तेमाल होने वाले कई भारी उपकरणों की सप्लाई लंबे समय से चीन से होती रही है. ऐसे में सरकार इस स्कीम को जल्द अंतिम रूप देने की तैयारी में है. प्रस्तावित इंसेंटिव स्कीम के दायरे में टनल बोरिंग मशीन (TBM), फायर-फाइटिंग सिस्टम और ऊंची इमारतों में इस्तेमाल होने वाली लिफ्ट जैसे उपकरण शामिल हो सकते हैं. सरकार का लक्ष्य भारत में इन मशीनों की सिर्फ असेंबली तक सीमित नहीं रहना है.

इंसेंटिव स्कीम के तहत हेवी मशीनों के जरूरी कंपोनेंट्स का घरेलू स्तर पर उत्पादन बढ़ाने पर भी जोर दिया जाएगा. TBM यानी टनल बोरिंग मशीन इस योजना का अहम हिस्सा है. इनका इस्तेमाल मेट्रो रेल, हाईवे और अन्य अंडरग्राउंड इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए सुरंग बनाने में किया जाता है. भारत में इन मशीनों की मांग लगातार बढ़ रही है, लेकिन घरेलू मैन्युफैक्चरिंग क्षमता अभी पर्याप्त नहीं है. यही वजह है कि कई बड़े प्रोजेक्ट्स के लिए विदेशी कंपनियों और सप्लायर्स पर निर्भरता बनी हुई है.

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चीन पर निर्भरता कम करने की तैयारी

गलवान में 2020 की झड़पों के बाद भारत और चीन के रिश्तों में तनाव बढ़ा. इसके बाद भारत ने चीनी कंपनियों के निवेश और सरकारी खरीद में उनकी भागीदारी को लेकर कुछ प्रतिबंध लगाए. दूसरी ओर, चीन ने 2024 में टनल बोरिंग मशीन के निर्यात पर नियम सख्त किए. इसके चलते जरूरी शिपमेंट्स की कस्टम क्लियरेंस प्रक्रिया में भी देरी की खबरें सामने आईं. रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, चीन से भारत का टनलिंग मशीनरी आयात 2023-24 में घटकर करीब $3 मिलियन रह गया, जबकि एक साल पहले यह $18 मिलियन था. 2024-25 में यह और घटकर करीब $500,000 हो गया. हालांकि 2025-26 में इसमें मामूली बढ़ोतरी हुई और आयात करीब $800,000 तक पहुंच गया.

BEML, L&T जैसी कंपनियों को फायदा

इस प्रस्तावित योजना से घरेलू कंपनियों को हाई-वैल्यू इंफ्रा उपकरणों के निर्माण में विस्तार का मौका मिल सकता है. भारत अर्थ मूवर्स लिमिटेड यानी BEML पहले से टनल बोरिंग मशीनों की मैन्युफैक्चरिंग भारत में हो, इसके अवसर तलाश रही है. लार्सन एंड टूब्रो (Larsen & Toubro) और जॉनसन लिफ्ट्स (Johnson Lifts) जैसी कंपनियों को भी इस इंसेंटिव स्कीम से फायदा मिलने की उम्मीद है. रिपोर्ट के मुताबिक, स्कीम पर अंतिम फैसला जल्द लिया जा सकता है. हालांकि हेवी इंडस्ट्री मिनिस्ट्री और फाइनेंस मिनिस्ट्री ने इस मामले पर फिलहाल कोई टिप्पणी नहीं की है.

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₹1 लाख करोड़ का हेवी इक्विपमेंट मार्केट

भारत का कंस्ट्रक्शन और इंफ्रास्ट्रक्चर इक्विपमेंट मार्केट करीब ₹1 लाख करोड़ यानी लगभग $10.4 बिलियन का है और आने वाले वर्षों में इसके और बढ़ने की उम्मीद है. ऐसे में सरकार की यह पहल घरेलू मैन्युफैक्चरर्स के लिए बड़ा अवसर बन सकती है. क्रेंस (Cranes) और एक्शन कंस्ट्रक्शन इक्विपमेंट (Action Construction Equipment) के सीईओ मनीष माथुर के मुताबिक, जब सरकार मैन्युफैक्चरिंग में आत्मनिर्भरता और आयात पर निर्भरता कम करने को प्राथमिकता दे रही है, तब इस तरह के इंसेंटिव घरेलू कंपनियों को टेक्नोलॉजी, रिसर्च एंड डेवलपमेंट और देश में निवेश बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित कर सकते हैं.

उनके मुताबिक, इस तरह के कदम भारतीय मैन्युफैक्चरर्स को तकनीकी क्षमता बढ़ाने, वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी उत्पाद तैयार करने और कंस्ट्रक्शन इक्विपमेंट मैन्युफैक्चरिंग में भारत को एक भरोसेमंद ग्लोबल हब के रूप में स्थापित करने में मदद कर सकते हैं. अगर प्रस्तावित इंसेंटिव स्कीम को मंजूरी मिलती है, तो इससे टनल बोरिंग मशीन, लिफ्ट और दूसरे हाई-वैल्यू इंफ्रा उपकरणों के घरेलू उत्पादन को बढ़ावा मिलने के साथ आयात पर निर्भरता कम करने की दिशा में भी मदद मिल सकती है.

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