'कानून का पालन ही सबसे बड़ा नागरिक कर्तव्य', गणतंत्र दिवस पर RSS प्रमुख मोहन भागवत का संदेश

77वें गणतंत्र दिवस पर RSS प्रमुख मोहन भागवत ने नागरिकों से संविधान में निहित कर्तव्यों का ईमानदारी से पालन करने का आह्वान किया. उन्होंने कहा कि भारत को अग्रणी गणराज्य बनाने के लिए सार्वजनिक जीवन में आदर्श आचरण जरूरी है.

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गणतंत्र दिवस पर RSS प्रमुख मोहन भागवत ने संविधानिक कर्तव्यों पर दिया जोर (Photo: PTI) गणतंत्र दिवस पर RSS प्रमुख मोहन भागवत ने संविधानिक कर्तव्यों पर दिया जोर (Photo: PTI)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 26 जनवरी 2026,
  • अपडेटेड 3:46 PM IST

बिहार के मुजफ्फरपुर में 77वें गणतंत्र दिवस के अवसर पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के प्रमुख मोहन भागवत ने नागरिक कर्तव्यों और संविधान की भूमिका पर विचार व्यक्त किए. RSS के मुजफ्फरपुर में स्थित कार्यालय ‘मधुकर निकेतन’ में ध्वजारोहण के बाद आयोजित कार्यक्रम में भागवत ने कहा कि भारत को दुनिया का अग्रणी गणराज्य बनाने के लिए हर नागरिक को अपने संविधान में मौलिक कर्तव्यों का पूरे मन से पालन करना बहुत आवश्यक है.

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मोहन भागवत ने साफ किया कि संविधान केवल अधिकारों का दस्तावेज नहीं, बल्कि यह हमें धर्म और नैतिकता की मार्गदर्शिका भी प्रदान करता है. उन्होंने संविधान के अध्ययन को नागरिकों के लिए जरूरी बताया, क्योंकि इससे वे अपने ज़िम्मेदारी के प्रति सजग रहते हैं. भागवत ने जोर दिया कि बिना नियम और कानून के सम्मान के किसी भी गणराज्य की स्थिरता संभव नहीं है.

उन्होंने भारतीय संस्कृति में नियमों का उल्लेख करते हुए कहा कि ये नियम मानवता और समाज के सभी वर्गों को साथ बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं. भारतीय परंपराएं न केवल व्यवहारिक हैं, बल्कि वे समाज को जोड़ने और बैलेंस बनाए रखने का आधार भी हैं.

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देश की आज़ादी के लिए हुए कठिन संघर्ष और पूर्वजों के बलिदानों का याद करते हुए उन्होंने कहा कि यह हर नागरिक की जिम्मेदारी है कि वे गणराज्य की रक्षा करें और उसे मजबूत बनाएं. मोहन भागवत ने कहा कि गणतंत्र सरकार से नहीं बल्कि नागरिकों के व्याहवार से मजबूत होता है.

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तिरंगे के महत्व को समझाते हुए उन्होंने कहा कि केसरिया रंग त्याग और गतिशीलता का प्रतीक है, सफेद रंग विचारों की पवित्रता दर्शाता है, जबकि हरा रंग प्रगति और समृद्धि का संकेत है. तिरंगे के बीच में स्थित अशोक चक्र यह संदेश देता है कि हर प्रगति को धर्म के मार्गदर्शन में किया जाना चाहिए.

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