बिहार में BJP का बड़ा सियासी दांव! MLC देवेश कुमार ने दिया इस्तीफा

पटना में बीजेपी के विधान परिषद सदस्य देवेश कुमार के इस्तीफे के बाद सियासी हलचल तेज हो गई है. माना जा रहा है कि उनकी खाली हुई सीट पर मंत्री दीपक प्रकाश को विधान परिषद भेजा जा सकता है. सुप्रीम कोर्ट में दीपक प्रकाश की नियुक्ति का मामला पहुंचने के बाद बीजेपी के इस कदम को संवैधानिक संकट से निकलने की रणनीति माना जा रहा है.

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बाएं से देवेश कुमार और दीपक प्रकाश.(Photo:ITG) बाएं से देवेश कुमार और दीपक प्रकाश.(Photo:ITG)

शशि भूषण कुमार

  • पटना,
  • 31 जुलाई 2026,
  • अपडेटेड 5:29 PM IST

पटना में बीजेपी ने एक बड़े सियासी घटनाक्रम के बीच अपने विधान परिषद सदस्य देवेश कुमार का इस्तीफा करा दिया है. देवेश कुमार ने अपना इस्तीफा विधान परिषद के सभापति अवधेश नारायण सिंह को सौंप दिया. उनके इस्तीफे के बाद अब सबसे ज्यादा चर्चा मंत्री दीपक प्रकाश को लेकर हो रही है. माना जा रहा है कि देवेश कुमार की खाली हुई विधान परिषद सीट पर दीपक प्रकाश को एमएलसी बनाया जा सकता है.

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दरअसल, मंत्री दीपक प्रकाश की नियुक्ति का मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचने के बाद बीजेपी इस पूरे मामले को लेकर एक्टिव हुई है. ऐसे में देवेश कुमार का अपनी विधान परिषद सीट से इस्तीफा देना बेहद अहम माना जा रहा है. इस कदम के बाद दीपक प्रकाश को विधान परिषद भेजे जाने का रास्ता खुल सकता है और उनके मंत्री बने रहने को संवैधानिक सुरक्षा देने की कोशिश की जा सकती है.

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पूरे घटनाक्रम के दौरान विधान परिषद में भी सियासी हलचल साफ दिखाई दी. बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी समेत पार्टी के अन्य नेता विधान परिषद पहुंचे. बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष और दूसरे नेता सामने वाले गेट से विधान परिषद में दाखिल हुए और सभापति अवधेश नारायण सिंह के पास पहुंचे. वहीं, देवेश कुमार ने पीछे के गेट से सभापति के कक्ष में प्रवेश किया.

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पीछे के गेट से पहुंचे देवेश कुमार, सौंपा इस्तीफा

देवेश कुमार पीछे के गेट से विधान परिषद के सभापति के कक्ष में पहुंचे. उन्होंने सभापति अवधेश नारायण सिंह को अपना इस्तीफा सौंपा और इसके बाद वहां से निकल गए. दूसरी तरफ बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी और अन्य नेता सामने के गेट से सभापति के पास पहुंचे थे. घटनाक्रम के दौरान दोनों तरफ से नेताओं की मौजूदगी ने इस पूरे मामले को और ज्यादा अहम बना दिया.

इस्तीफा देने के बाद देवेश कुमार वहां से निकल गए. वहीं बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी भी विधान परिषद से बाहर आए. मीडिया ने उनसे इस पूरे घटनाक्रम को लेकर सवाल पूछने की कोशिश की, लेकिन संजय सरावगी ने मीडिया के सवालों का कोई जवाब नहीं दिया. उनकी चुप्पी के बाद भी देवेश कुमार के इस्तीफे को लेकर सियासी चर्चाएं तेज हो गईं.

देवेश कुमार के इस्तीफे का सीधा राजनीतिक और संवैधानिक अर्थ यही माना जा रहा है कि उनकी सीट खाली होने के बाद दीपक प्रकाश को दोबारा विधान परिषद का सदस्य बनाने का रास्ता तैयार किया जा रहा है. अगर दीपक प्रकाश इस रिक्त सीट से विधान परिषद पहुंचते हैं, तो वह विधानमंडल के सदस्य बन सकेंगे और उनके मंत्री पद को संवैधानिक रूप से सुरक्षित रखने की कोशिश पूरी हो सकती है.

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सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी के बाद बढ़ा संवैधानिक दबाव

इस पूरे घटनाक्रम की पृष्ठभूमि में सुप्रीम कोर्ट में पहुंचा दीपक प्रकाश की नियुक्ति का मामला भी अहम है. हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने बिहार सरकार से कड़ी टिप्पणी करते हुए सवाल किया था कि जब कोई मंत्री छह महीने के भीतर विधानसभा या विधान परिषद का सदस्य नहीं बनता, तो वह मंत्री पद पर कैसे बना रह सकता है. अदालत ने सरकार से इस संबंध में संवैधानिक आधार स्पष्ट करने को कहा था.

ऐसे में देवेश कुमार की विधान परिषद सीट खाली होना और उसके बाद दीपक प्रकाश को उस सीट से एमएलसी बनाए जाने की संभावित चर्चा को इसी संवैधानिक सवाल से जोड़कर देखा जा रहा है. अगर दीपक प्रकाश को इस रिक्त सीट से विधान परिषद भेजा जाता है, तो उनके पास समय रहते विधानमंडल का सदस्य बनने का रास्ता खुल जाएगा.

संवैधानिक रूप से मंत्री के विधानमंडल का सदस्य होने को लेकर उठे सवाल के बीच यह कदम सरकार के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है. अनुच्छेद 164(4) के तहत उठे संवैधानिक विवाद को व्यावहारिक रूप से समाप्त करने की कोशिश के तौर पर भी इसे देखा जा रहा है. यानी देवेश कुमार का इस्तीफा केवल एक एमएलसी सीट खाली होने की प्रक्रिया नहीं, बल्कि दीपक प्रकाश की राजनीतिक और संवैधानिक स्थिति से जुड़ा अहम कदम माना जा रहा है.

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BJP का डैमेज कंट्रोल? दीपक प्रकाश की सीट पर टिकी नजर

राजनीतिक दृष्टि से देवेश कुमार के इस्तीफे को एनडीए सरकार के डैमेज कंट्रोल के तौर पर भी देखा जा सकता है. सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी के बाद सरकार पर संवैधानिक सवालों को लेकर दबाव बढ़ गया था. ऐसे में विधान परिषद की एक सीट खाली कराकर दीपक प्रकाश को उस सीट से सदस्य बनाने की संभावना सरकार के लिए एक व्यावहारिक रास्ता तैयार कर सकती है.

अगर दीपक प्रकाश को देवेश कुमार की खाली हुई सीट से विधान परिषद भेजा जाता है, तो वह विधानमंडल के सदस्य बन सकेंगे. इसके साथ ही मंत्री पद को लेकर उठे संवैधानिक सवाल का समाधान निकालने की कोशिश की जा सकेगी. सरकार अदालत के सामने यह भी दिखा सकेगी कि संवैधानिक प्रक्रिया का पालन किया जा रहा है.

फिलहाल इस पूरे घटनाक्रम में देवेश कुमार का इस्तीफा सबसे अहम कड़ी है. सामने से बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी समेत अन्य नेताओं का सभापति के पास पहुंचना, पीछे के गेट से देवेश कुमार का सभापति कक्ष में जाना और इस्तीफा सौंपकर निकल जाना, फिर संजय सरावगी का मीडिया के सवालों का जवाब दिए बिना बाहर निकलना कई राजनीतिक संकेत दे रहा है. अब निगाह इस बात पर है कि देवेश कुमार की खाली हुई विधान परिषद सीट पर दीपक प्रकाश को सदस्य बनाया जाता है या नहीं.

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