बिहार में बाढ़ का असर अब 15 जिलों तक पहुंच चुका है. 48.70 लाख से ज्यादा लोग इसकी चपेट में हैं और 88 प्रखंडों की 575 ग्राम पंचायतें प्रभावित हैं. इनमें पटना, भोजपुर, सारण, वैशाली, भागलपुर, बेगूसराय, बक्सर, समस्तीपुर, मुंगेर, कटिहार, लखीसराय, खगड़िया, पूर्णिया, मधेपुरा और अररिया सबसे ज्यादा प्रभावित जिले हैं.
(Photo- PTI)
जहां सड़कें और रास्ते पानी में घिर गए हैं, वहां नाव लोगों के लिए सबसे जरूरी साधन बन गई है. प्रशासन ने प्रभावित इलाकों में करीब 1,790 नावें लगाई हैं. इनका इस्तेमाल लोगों को निकालने के साथ जरूरी आवाजाही के लिए भी किया जा रहा है.
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पानी का स्तर कुछ जगह कम होने लगा है, लेकिन खतरा अभी टला नहीं है. गंगा कई जगह अभी भी उफान पर है. पुनपुन, बागमती और घाघरा नदियां भी कई स्थानों पर खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं.
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बाढ़ के बीच लोगों की चिंता सिर्फ अपने घर और परिवार को बचाने तक सीमित नहीं है. ग्रामीण इलाकों में लोगों को अपने मवेशियों को सुरक्षित जगह पहुंचाने के लिए काफी जद्दोजहद करनी पड़ रही है. कई जगह लोग अपने साथ पशुओं को लेकर ऊंची जगहों की ओर जाने को मजबूर हैं.
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बाढ़ के कारण बच्चों की पढ़ाई पर भी खासा असर पड़ा है. बच्चे पढ़ाई के लिए नदी पार करने को मजबूर हैं. पानी के बीच यह सफर उनके लिए रोज का जोखिम बन गया है.
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कई प्रभावित इलाकों में पानी लोगों के घरों और आसपास के हिस्सों तक पहुंच गया है. ऐसे में परिवारों के सामने सबसे बड़ी चिंता अपने लोगों को सुरक्षित रखने के साथ जरूरी सामान बचाने की भी है. पानी के बीच रोजमर्रा की जिंदगी पूरी तरह बदल गई है.
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जिन लोगों को बाढ़ वाले इलाकों से निकालकर सुरक्षित जगह पहुंचाया गया है, उनके लिए 13 राहत शिविर चलाए जा रहे हैं. इनमें करीब 12,260 लोगों के रहने, खाने और इलाज की व्यवस्था है. दूसरी ओर, 1,257 कम्युनिटी किचन प्रभावित लोगों तक खाना पहुंचाने का काम कर रही हैं.
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मवेशियों के लिए चारा पहुंचाना भी मुश्किल हो गया है. बाढ़ प्रभावित इलाकों में जानवरों को बचाने के साथ उनके भोजन की व्यवस्था बनाए रखना लोगों के लिए एक और बड़ी चिंता है.
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राहत और बचाव की टीमें अभियान में लगी हैं. नावों से लोगों को निकालने और जरूरी सामान पहुंचाने का काम जारी है. लेकिन जिन परिवारों के घर पानी से पूरी तरह घिरे हुए हैं, उनके लिए अपने घर और सामान की रक्षा करने में भी अनगिनत मुश्किलों का सामना करना पड़ता है.
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जलभराव के कारण कई इलाकों में आवाजाही भी मुश्किल है. पानी भरे रास्तों पर लोगों को आने-जाने में परेशानी हो रही है. खतरे को देखते हुए कई जगह सामान्य रास्तों का पर आवाजाही रोकनी पड़ रही है.