देश में E20 पेट्रोल को लेकर लंबे समय से कई तरह के सवाल उठ रहे हैं. क्या इथेनॉल की ब्लेंडिंग 20% से ज्यादा होगी. क्या पुराने वाहनों के इंजन को इससे नुकसान होता है या माइलेज कम होता है? क्या पानी की खपत बढ़ेगी? अब सरकार ने संसद में इन सभी सवालों का विस्तार से जवाब दिया है. सरकार का कहना है कि फिलहाल पेट्रोल में 20% से ज्यादा इथेनॉल मिलाने का कोई फैसला नहीं लिया गया है. साथ ही सरकार ने यह भी कहा कि इथेनॉल पूरी तरह से सुरक्षित है और E20 पेट्रोल से बड़े पैमाने पर इंजन खराब होने का कोई पुख्ता प्रमाण नहीं मिला है.
2,417.78 करोड़ लीटर इथेनॉल
पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस राज्य मंत्री सुरेश गोपी ने राज्यसभा में एक लिखित जवाब में कहा कि, राज्य के स्वामित्व वाली ऑयल मार्केटिंग कंपनियों (OMCs) ने पिछले तीन इथेनॉल सप्लाई ईयर में कुल 2,417.78 करोड़ लीटर इथेनॉल खरीदा है, जिसकी कुल कीमत 1.72 लाख करोड़ रुपये रही है. मंत्री ने बताया कि इंडियन ऑयल (IOCL), भारत पेट्रोलियम (BPCL) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम (HPCL) द्वारा इथेनॉल की खरीद लगातार बढ़ी है.
सरकार द्वारा पेश किए गए आंकड़ों के अनुसार, 2023-24 में इन कंपनियों ने 679.04 करोड़ लीटर इथेनॉल खरीदा. इसके बाद 2024-25 में यह बढ़कर 1,033.31 करोड़ लीटर हो गया. वहीं, मौजूदा 2025-26 में जून तक ही 705.43 करोड़ लीटर इथेनॉल की खरीद की जा चुकी है. सरकार ने यह भी बताया कि तीनों सरकारी ऑयल मार्केटिंग कंपनियों के साथ इस समय 501 इथेनॉल सप्लायर रजिस्टर्ड हैं.
सांसद अशोक सिंह और सांसद राजीव शुक्ला के सवालों के जवाब में सरकार ने साफ कहा कि फिलहाल पेट्रोल में इथेनॉल की मात्रा 20% से ज्यादा बढ़ाने का कोई निर्णय नहीं लिया गया है. इसके साथ ही डीजल में इथेनॉल मिलाने की भी अभी कोई योजना नहीं है. सरकार ने बताया कि E20 पेट्रोल पर कई संस्थाओं ने साइंटिफिक स्टडी और टेस्ट किए हैं.
मंत्री सुरेश गोपी ने कहा कि, इथेनॉल ब्लेंडिंग प्रोग्राम को देश भर में फेज्ड मैनर में लागू किया गया है. इस प्रोसेस में नीति आयोग, ऑटोमोटिव रिसर्च एसोसिएशन ऑफ इंडिया (ARAI), सोसाइटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स (SIAM), इंडियन ऑयल, इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ पेट्रोलियम, ऑयल मार्केटिंग कंपनियां और वाहन निर्माता कंपनियों ने मिलकर काम किया है.
इंजन खराबी, माइलेज पर जवाब
सरकार ने अपने जवाब में कहा कि, अब तक E20 की वजह से बड़े पैमाने पर इंजन फेल होने या वाहनों के कंपोनेंटस को किसी तरह का नुकसान पहुंचने का कोई प्रमाण नहीं मिला है. इसके अलावा पुराने वाहनों में भी E20 से जुड़े किसी बड़े नुकसान की पुष्टि नहीं हुई है. सरकार के मुताबिक कुछ पुराने E10 वाहनों में माइलेज पर हल्का असर देखा जा सकता है. यह कमी आमतौर पर 3% से 5% तक हो सकती है. हालांकि सरकार का कहना है कि वाहन का माइलेज केवल फ्यूल पर निर्भर नहीं करता. ड्राइविंग का तरीका, समय पर सर्विस, टायर में सही हवा और एयर कंडीशनर का इस्तेमाल भी माइलेज को काफी प्रभावित करते हैं.
क्या मिलेगा बिना इथेनॉल वाला पेट्रोल
सरकार ने स्पष्ट किया कि कम इथेनॉल मिश्रण वाला या बिना इथेनॉल वाला पेट्रोल अनिवार्य रूप से उपलब्ध कराने का कोई प्रस्ताव नहीं है. सरकार का कहना है कि अगर अलग-अलग तरह के पेट्रोल की पैरलल सप्लाई चलाई जाएगी तो इससे लागत बढ़ेगी. इसके अलावा पर्यावरण संरक्षण और ऊर्जा सुरक्षा से जुड़े फायदे भी कम हो जाएंगे. सरकार का दावा है कि E20 पेट्रोल में ऑक्टेन रेटिंग बेहतर होती है. इससे इंजन में फ्यूल के जलने की प्रक्रिया बेहतर होती है, इंजन स्मूद चलता है और प्रदूषण भी कम होता है.
पानी की कमी पर जवाब
सांसद प्रमोद तिवारी के सवाल के जवाब में सरकार ने कहा कि इथेनॉल उत्पादन से देश में जल संकट नहीं बढ़ेगा. सरकार के मुताबिक इथेनॉल अब कई तरह के कच्चे माल से बनाया जा रहा है. इसमें मक्का की हिस्सेदारी बढ़कर करीब 37% हो गई है. साथ ही सरकार ने यह भी कहा कि सभी डिस्टिलरी को जीरो लिक्विड डिस्चार्ज (ZLD) नियमों का पालन करना होता है. इसके तहत गंदे पानी को रिसाइकिल किया जाता है और बिना साफ के बाहर नहीं छोड़ा जाता.
सरकार के मुताबिक इथेनॉल ब्लेंडिंग प्रोग्राम से अब तक 1.97 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा की विदेशी मुद्रा की बचत हुई है. इससे कच्चे तेल के आयात में कमी आई है, कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन घटा है और किसानों को 1.66 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा का भुगतान मिला है. सरकार का कहना है कि यही वजह है कि इथेनॉल ब्लेंडिंग कार्यक्रम को आगे भी जारी रखा जाएगा, लेकिन फिलहाल 20% से आगे बढ़ाने का कोई फैसला नहीं लिया गया है.
आजतक ऑटोमोबाइल डेस्क