सरकार अपने देश के किसानों को आर्थिक सहायता देने के लिए कई योजनाएं चलाती है, ताकि उन्हें खेती करने और अपने परिवार का भरण-पोषण करने में मदद मिल सके. राज्य सरकारों की ओर से भी कुछ ऐसी ही योजनाएं चलाई जाती है. आज हम ऐसे ही एक यूपी सरकार की ओर से चलाई जाने वाली योजना के बारे में बता रहे हैं.
यह योजना किसानों को खेती करने के पैसे नहीं देती है, बल्कि अपने बेच्चों को पढ़ाने को पैसे देती है. हम बात कर रहे हैं UP सरकार की योजना मुख्यमंत्री कृषक छात्रवृत्ति योजना के बारे में... यह योजना किसानों और खेतिहर मजदूरों के मेधावी बच्चों को आर्थिक सहायता देने के लिए शुरू की गई है.
इस योजना के तहत पहले 3000 रुपये थी, लेकिन अब बढ़ाकर 5000 रुपये प्रति महीने कर दिया गया है. इसका लाभ राज्य के किसान व मजदूर परिवारों के पात्र विद्यार्थियों को दिया जाता है. इस योजना का मुख्य काम किसान के बच्चों की पढ़ाई ना रुके, इसके लिए आर्थिक सहायता देना है.
कौन ले सकता है लाभ?
विद्यार्थी के माता-पिता किसान या रजिस्टर्ड खेतिहर मजदूर होने चाहिए. साथ ही छात्र/छात्रा उत्तर प्रदेश के मूल निवासी होने चाहिए. छात्र मेधावी और उसकी पढ़ाई जारी होनी चाहिए.
जरूरी दस्तावेज
इस योजना में अप्लाई करने के लिए कुछ दस्तावेज की भी आवश्यता होती है. इसमें आधार कार्ड, उत्तर प्रदेश का निवास प्रमाण पत्र, आय प्रमाण पत्र, किसान/मजदूर होने का प्रमाण (खतौनी, किसान बही या श्रम कार्ड), पिछली कक्षा की मार्कशीट, बैंक खाता विवरण (पासबुक की कॉपी) शामिल हैं.
कैसे मिलेगा लाभ
मुख्यमंत्री कृषक छात्रवृत्ति योजना का लाभ लेने के लिए आपको पात्रता शर्तों को पूरा करना होगा. फिर इसमें आवेदन करना होगा. मंडी परिषद के आधिकारिक दिशानिर्देशों के अनुसार, केवल नियमित पढ़ाई करने वाले मेधावी छात्र ही इसमें आवेदन कर सकते हैं. ग्रेजुएशन में छात्रवृति के लिए यूपी बोर्ड से इंटरमीडिएट (12वीं) की परीक्षा में न्यूनतम 70% अंक और अन्य बोर्ड (जैसे CBSE/ICSE) के लिए न्यूनतम 85% अंक होने चाहिए. PG में छात्रवृति के लिए ग्रेजुएशन में 70 फीसदी अंक होने चाहिए.
कैसे करें अप्लाई